छत्तीसगढ़ के हर घर में अब पहुंचेगा नल से जल,2023 तक होगा जल जीवन मिशन पूरा

सतही और भूमिगत जल संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर

रायपुर | मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज वर्चुअल शिलान्यास के द्वारा जल जीवन मिशन के तहत 16 जिले में हर घर में नल कनेक्शन देने मुहीम की शुरआत की। उन्होंने 238 करोड़ 56 लाख 86 हजार रूपए की लागत के 658 कार्यों का भूमि पूजन किया। जल जीवन मिशन के तहत 65 हजार 396 घरों में नल कनेक्शन दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जल जीवन मिशन के प्रचार वाहन को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। 

मुख्यमंत्री बघेल ने इस अवसर पर रायगढ़, कांकेर, बीजापुर, दुर्ग, राजनांदगांव और रायपुर जिलों के जल जीवन मिशन के हितग्राहियों से रू-ब-रू चर्चा की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत ने की।

मुफ्त मिलेगा अब नल कनेक्शन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य इस लक्ष्य को हर हाल में निर्धारित समयावधि में पूरा करेगा। घर-आंगन में नल से जल आपूर्ति का सबसे ज्यादा लाभ हमारी माता-बहनों को मिलेगा। जिन्हें पानी का इंतजाम करने के लिए काफी परिश्रम और समय लगाना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत अब तक 5 लाख 66 हजार घरों में नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का काम पूरा कर लिया गया है। शेष घरों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए धन राशि की कमी नहीं होगी। हमने इस साल राज्य बजट में घरों तक नल कनेक्शन के माध्यम से पानी पहुंचाने के लिए 850 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इस साल 22 लाख से अधिक परिवारों को नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल आपूर्ति का काम पूरा कर लिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के सपने को पूरा करने के लिए लोगों तक स्वच्छ जल उपलब्ध कराना जरूरी है। ग्रामीण अंचलों में जल जनित रोगों से लोगों की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति से इस समस्या से निजात मिलेगी। जल जीवन मिशन के अंतर्गत घरों के अलावा शालाओं, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा सार्वजनिक स्थानों में भी रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी। घरों तक पानी पहुंचने से घरों में बने शौचालयों का उपयोग भी लोग करने लगेंगे।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में जल जीवन मिशन से लाभान्वित ग्रामीण महिलाओं से हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ग्रामीण घरों में गंदे पानी की निकासी की व्यवहारिक समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसी तरह एक बहन ने कहा कि गंदे पानी से पेड़ पौधों की वे सिंचाई करेंगी। श्री बघेल ने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण घरों या उनके आसपास के स्थानों में खाली जगह उपलब्ध होने पर वहां पेड़ पौधों का रोपण किया जाए। जिससे घर के गंदे पानी का उपयोग घर और बाड़ी में लगे पेड़-पौधों की सिंचाई हो सके। इसी के साथ-साथ घरों में सोख्ता गड्डा बनाए जाए और यदि गांव की गलियां चौड़ी है, तो नाली की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।

वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था पर दिया जोर 

मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रति व्यक्ति के मान से हर घर में 55 लीटर पानी प्रतिदिन पहुंचाने से भूमिगत और सतहीजल स्त्रोतों पर दबाव बढ़ेगा। इसलिए यह जरूरी है कि पानी की सतत आपूर्ति बनाए रखने के लिए वाटर रिचार्जिंग की व्यवस्था की जाए और जल संग्रहण संरचनाओं का संधारण भी किया जाए। उन्होंने प्रदेश में चलाए जा रहे नरवा प्रोजेक्ट के कामों को गति प्रदान करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इससे भूमिगत और सतही पानी की उपलब्धता बनी रहेगी। उन्हांेने कहा कि जिन नदी-नालों में रेत अधिक है, वहां मिट्टी का डाईकवॉल बनाकर पानी को रोका जाए। जिससे पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े सभी कलेक्टरों से प्रदेश में कोविड-19 टीकाकरण का काम तेजी से करने के निर्देश देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर को रोकने के लिए टीकाकरण ही कारगर उपाय है। प्रदेश में इसके पहले एक दिन में 3 लाख 26 हजार टीके लगाए जा चुके हैं। कल 21 जून को एक दिन में प्रदेश में 91 हजार लोगों का टीकाकरण किया गया, इस काम में और अधिक गति लाने की जरूरत है।

शुद्ध पेयजल की आपूर्ति से लोग होंगे निरोगी-मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति से दूषित पानी, आर्सेनिक, फ्लोराइड युक्त पानी से होने वाली स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। यदि किसी बसाहट में शुद्ध जल स्त्रोत नहीं है, तो दूसरी बसाहट या दूर के गांव से भी पानी लाने की व्यवस्था की जाएगी और गांवों में टंकी बनाकर नल के जरिए पानी लिया जाएगा। जरूरत के अनुसार कुछ बसाहटों या गांवों का समूह बनाकर भी घरों तक पानी पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 जून से 21 जून तक विभिन्न जिलों में लोकार्पण और शिलान्यास के वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान जल जीवन मिशन के तहत 425 करोड़ रूपए से अधिक लागत की 1373 योजनाओं का शिलान्यास किया गया। जिसके माध्यम से 1 लाख 46 हजार 739 घरों में नल कनेक्शन दिए जाएंगे। अब तक पूरे राज्य में जल जीवन मिशन के तहत 663 करोड़ रूपए से अधिक लागत की 2031 योजनाओं का शिलान्यास किया जा चुका है। जिनके माध्यम से 2.12 लाख से अधिक परिवारों को नल कनेक्शन से शुद्ध जल पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलेक्टरों, जनप्रतिनिधियों, विभाग के अधिकारियों से इस योजना को सफल बनाने के लिए पूरी लगन से काम करने का आव्हान किया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल देने का ऐतिहासिक कार्य किया जा रहा है। आज 16 जिलों में जलापूर्ति की योजनाओं का शिलान्यास किया गया।

प्रदेश में 2023 तक मिशन पूरा करने का लक्ष्य 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार ने कहा कि प्रदेश के सभी 45 लाख 48 हजार ग्रामीण परिवारों को वर्ष 2023 के अंत तक उनके घरों में मुफ्त नल कनेक्शन देकर शुद्ध पेयजल प्रदाय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत अब तक राज्य के ग्रामीण अंचल में निवासरत परिवारों के घरों में नल के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति के लिए 7162 योजनाओं के लिए 3499 करोड़ रूपए की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है, जिससे पूरा होने से 8.85 लाख घरों में जलापूर्ति के लिए नल कनेक्शन मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के कई गांव और इलाके ऐसे हैं, जहां पानी में फ्लोराइड, आयरन आदि की समस्या विद्यमान है। ऐसे इलाके और गांवों के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए गु्रप वाटर स्कीम तैयार की गई है। जिसके जरिए नदी अथवा डेम से पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि 18 गु्रप वाटर स्कीम की स्वीकृति मिली है। इन योजनाओं में गिरौदपुरी धाम के लिए 62.23 करोड़ रूपए तथा सुपेबेड़ा के लिए 10.34 करोड़ रूपए लागत की गु्रप वाटर स्कीम स्वीकृत की गई है, जिसका काम बहुत जल्द शुरू होगा। उन्होंने पेयजल की शुद्धता के परीक्षण के लिए राज्य के सभी जिलों में जल प्रयोगशालाओं की स्थापना की भी जानकारी दी।

मुख्यमंत्री बघेल ने जिलों के जल जीवन मिशन के हितग्राहियों से रू-ब-रू चर्चा की।