एक बार फिर मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ दाखिल टिड्डी दल का आक्रमण

राजनांदगांव और कवर्धा सीमा पर हजारों टिड्डियों का सफाया

प्रदीप मेश्राम, राजनांदगांव। मध्यप्रदेश के बालाघाट इलाके से टिड्डियों का दल एक बार फिर छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में दाखिल हो गया है। बालाघाट के किरनापुर क्षेत्र से उड़े टिड्डियों ने कवर्धा के खारा जंगल में डेरा जमा लिया है।

इधर राजनांदगांव-कवर्धा जिले के सीमा पर टिड्डियों के दल को नाकाम करते हुए दोनों जिलों की प्रशासनिक मशीनरी ने हजारों टिड्डियों का सफाया कर दिया है।

इधर दोनों जिलों ने कुछ समय के लिए राजनांदगांव के साल्हेवारा क्षेत्र में नजर आए टिड्डियों को खदेडऩे का अभियान शुरू किया। इसके बाद हजारों टिड्डियां खारा के जंगल में पहुंच गई।

लंबे समय से दोनों जिलों के सरहद पर टिड्डियों के हमले की आशंका के मद्देनजर वन और कृषि अमला संयुक्त रूप से नजर रखे हुए थे।

बताया जा रहा है कि मंगलवार रात तक टिड्डियां साल्हेवारा और खारा के आसपास पहुंच गई। सुबह होते ही टिड्डियों को मारने के लिए खास अभियान चलाया गया। कीटनाशक दवाईयों के छिड़काव के जरिये हजारों टिड्डियों को मार दिया गया है।

बताया जा रहा है कि टिड्डियों ने किसानों की फसलों को आंशिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। ऐसा इसलिए संभव हुआ, क्योंकि प्रशासन लगातार टिड्डियों की गतिविधियों को रोकने की दिशा में हाईअलर्ट था।

इस संबंध में कवर्धा डीएफओ दिलराज प्रभाकर ने कहा कि टिड्डियों को मारने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कृषि महकमे के साथ संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है।

उधर राजनांदगांव कृषि उप संचालक जीएस ध्रुव ने भी बताया कि खारा क्षेत्र में साझा कोशिशों के साथ टिड्डियों  को रोका जा रहा है। हालांकि अभी तक बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।

इस बीच टिड्डियों  का यह दल बालाघाट के किरनापुर के रास्ते साल्हेवारा सीमा पर पहुंचा। इसके बाद कवर्धा जिले के खारा में टिड्डियों  ने डेरा जमा लिया। टिड्डियों को दूर भगाने के साथ-साथ उनके सफाये के लिए जंगल के भीतर बड़े वाहन से स्प्रे किया जा रहा है।

बता दें कि इसके पहले 31 मई को मप्र की सरहद पार करते कोरिया जिले में पहली बार टिड्डियों का दल   देखा गया।  ये दल जवारीटोला और ग्राम पूंजी के बीच के जंगल में बड़ी मात्रा में इन्हें देख ग्रामीणों ने उन्हें आवाज करके भागने का प्रयास किया।

इसके पहले कलेक्टर के निर्देश पर कृषि और उद्यान विभाग पहले से टिड्डियों की आने को लेकर सजग था।  कीटनाशक छिड़काव के बाद यह दल वापिस मप्र लौट गया था।

ऐसे पनपती हैं टिड्डियां

टिड्डियों की भारी संख्या में पनपने का मुख्य कारण वैश्विक तापवृद्धि के चलते मौसम में आ रहा बदलाव है। विशेषज्ञों ने बताया कि एक मादा टिड्डी तीन बार तक अंडे दे सकती है और एक बार में 95-158 अंडे तक दे सकती हैं। टिड्डियों के एक वर्ग मीटर में एक हजार अंडे हो सकते हैं। इनका जीवनकाल तीन से पांच महीनों का होता है। नर टिड्डे का आकार 60-75 एमएम और मादा का 70-90 एमएम तक हो सकता है।

नमी वाले क्षेत्रों में खतरा सबसे ज्यादा

बताया जा रहा है कि खतरनाक माना जाना वाले रेगिस्तानी टिड्डे रेत में अंडे देते हैं, लेकिन जब ये अंडों को फोड़कर बाहर निकलते हैं, तो भोजन की तलाश में नमी वाली जगहों की तरफ बढ़ते हैं। इससे नमी वाले इलाकों में टिड्डियों का खतरा ज्यादा होता है।

उल्लेखनीय है कि 27 मई को ही देश टीवी ने छत्तीसगढ़ में टिड्डी आक्रमण की आशंका जताई थी। बहरहाल, टिड्डी आक्रमण का खतरा टला दिखाई नहीं दे रहा है। मानसून आ चुका है और बचे खुचे टिड्डी फिर पनपकर खतरा बन सकते हैं।

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