जुर्माने का आदेश दिया और समाज ने नहीं उठाई उसकी अर्थी

बेटे-बेटी ने किया था अंतर्जातीय विवाह, नहीं दिया था भोज

जशपुर। सामाजिक कुरीतियों, बुराइयों को लेकर भारत के इतिहास में कई आंदोलन हुए, कई कानून बने, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका क्रियान्वयन और समझ विकसित होना आज भी एक चुनौती बन गया है। लंबे अरसे से जशपुर जिले में खुद को भूखे रखकर, अपने परिवार की जरूरतों के खर्च में कटौती कर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में बिताने वाले छत राम चौहान के जीवन का अवसान कुछ इस तरह होगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। दो दिन पहले सड़क दुर्घटना में सीआर चौहान की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने उनके अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक ग्राम कचंदा ले जाने का निर्णय लिया। जब कानूनी औपचारिकता पूरी कर रोता, बिलखता परिवार अपने पैतृक ग्राम पार्थिव शरीर लेकर पहुंचता तो 21 वीं सदी के चौहान समाज का वह रूप सामने आया, जिससे एक बार फिर राजा राम मोहन राय जैसे सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने वाले महापुरूषों के अवतरण की आवश्यकता महसूस हुई।

क्या है मामला
प्रदेश के जांजगीर चाम्पा जिले में कचंदा के चौहान समाज का अमानवीय चेहरा सामने आया है।घर में अंतिम संस्कार के लिए रखे पार्थिव शरीर और परिवार में फैले मातम के बीच कथित समाज के ठेकेदारों ने अमानवीयता का परिचय देते हुए अंतिम संस्कार करने के एवज में एक परिवार को 30 हजार के अर्थदंड से दंडित कर दिया।घर में पसरे मातम को देखते हुए परिवार ने इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता व्यक्त की।पीड़ित परिवार ने हाथ जोड़कर अर्थदंड घटाकर 5 हजार देने की बात कही जिसे समाज के जिम्मेदार लोगों ने अस्वीकार कर अर्थी उठाने से मना कर दिया।जिसके बाद अखिल विश्व गायत्री परिवार के कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार को संबल प्रदान करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अंतिम संस्कार किया।

यह है कहानी
जांजगीर चाँपा जिले के मालखरौदा से लगे कचंदा गांव में लखनलाल चौहान अपने परिवार के साथ रहते हैं।श्री चौहान के बड़े बेटे सीआर चौहान जशपुर उद्यान विभाग में शासकीय कर्मचारी के रुप में कृषि विस्तार अधिकारी पद पर पदस्थ रहे।बीते 17 नवंबर को सड़क दुर्घटना में सीआर चौहान की मौत हो गई जिन्हें अंतिम संस्कार के लिए 18 नवंबर को रात्रि 8 बजे उनके गृहग्राम कचंदा लाया गया।यहां कुछ सामाजिक कारणों से उनके समाज के लोगों ने उनका अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।एक ओर घर के लोग सजी अर्थी के उठने का इंतजार कर रहे थे वहीं दूसरी ओर पितरलाल चौहान के घर में चौहान समाज के उपाध्यक्ष राधे,रामलाल,पितरलाल, श्रवण,रवि,दुर्गाप्रसाद व अन्य की उपस्थिति में सामाजिक बैठक किया जा रहा था जिसमें शलखनलाल चौहान व उनके छोटे बेटे दिलहरण चौहान को कटघरे में रखकर उन्हें दंडित किया जा रहा था।

समाज ने इसलिए किया दंडित
चौहान समाज के उक्त सामाजिक बैठक में कथित समाज के ठेकेदारों ने लखनलाल के परिवार की गलती बताई कि उनके बेटे-बेटी ने अंतर्जातीय विवाह किया है।जिसके लिए उन्होंने समाज के लोगों को आमंत्रण निमंत्रण नहीं दिया।जिसको लेकर समाज के लोग उनके परिवार के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकते।

माफी मांगी पर
स्थानीय लोगों के साथ पिता पुत्र ने समाज के लोगों से क्षमा प्रार्थना के साथ अंतिम संस्कार में जाने का निवेदन किया।जिसपर चौहान समाज के उपाध्यक्ष राधे व अन्य ने 30 हजार के अर्थदंड से उन्हें दंडित कर दिया।इसके एवज में केवल अंतिम संस्कार में शामिल होने की बात उन्होंने की और शर्त यह रखी कि यदि दंड भरा जाता है तो वे केवल अंतिम क्रिया में शामिल होंगें वहीं तीजनहावन, दशनहावन और ब्रह्मभोज में वे शामिल नहीं होंगे।जब महासमिति की बैठक में नया दंड स्वीकार कर समाज में शामिल होंगे उसके बाद ही उनके घर में वे खाना पानी ग्रहण करेंगे।

दिखी समाज की असंवेदनशीलता
चौहान समाज के बैठक के बीच हाथ जोड़कर पिता पुत्र नतमस्तक होते हुए अपने बड़े बेटे के अंतिम संस्कार के लिए समाज के लोगों से मान मनौव्वल करते रहे किसी ने उनकी एक नहीं सुनी।रुढ़िवादी परंपरा के साथ समाज के लोग अपनी 30 हजार की मांग पर अड़े रहे।समाज के लोगों से पीड़ित परिवार ने निवेदन किया कि दुःख की इस घड़ी में बीच का रास्ता निकालकर समाज के लोग उनका साथ दें।अपनी ओर से 5 हजार देने की बात परिवार के लोगों ने की जिसपर समाज के लोगों ने असहमति व्यक्त करते हुए अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।रविवार को शाम की घटना के बाद पूरे दिन का सफर तय कर परिजन सोमवार की रात कचंदा पंहुचे थे।यहां सामाजिक बैठक में भूतपूर्व सरपंच रमेश चंद्रा भी उपस्थित थे जिन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए समाज के लोगों को समझाने का प्रयास करते हुए अंतिम संस्कार की अपील की इसके बावजूद किसी ने उनकी एक नहीं सुनी।

अंततः गायत्री परिवार ने उठाई अर्थी
18 नवंबर रात्रि 11 बजे तक सामाजिक बैठक में समाज के तीखे बाणों से पस्त हो चुके पिता पुत्र को अंततः समाज के लोगों को कहना पड़ा कि उनकी शक्ति 30 हजार देने की नहीं है वे खुद के कंधों पर अंतिम संस्कार के लिए अपने बेटे को ले जाएंगे। उल्लेखनीय है कि मृतक सीआर चौहान की छवि सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में रही है जिन्होंने गायत्री परिवार के रचनात्मक कार्यक्रम में सक्रिय परिजन के रुप में कार्य किया है।लिहाजा बड़ी संख्या में गायत्री परिजन श्रद्धांजलि देने के लिए कल से उनके गांव कचंदा पंहुचे हुए थे।उक्त सामाजिक समस्या के सामने आने पर गायत्री परिजनों ने अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया।19 नवंबर को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ स्वर्गीय सीआर चौहान की अर्थी गायत्री परिजनों ने उठाई और गायत्री मंत्र के सस्वर उच्चारण के साथ उनकी अंतिम यात्रा निकालकर विधि विधान से उनका दाह संस्कार किया गया।

देश भर से हो रही निंदा
कचंदा में चौहान समाज के इस निर्णय की पूरे देश भर में निंदा हो रही है। छत्तीसगढ़ प्रदेश गाड़ा समाज के जांजगीर चाम्पा जिला सचिव वेदप्रकाश चौहान ने बताया कि समाज के लोगों का उक्त कृत्य बिल्कुल गलत है।शिक्षा से दूरी बनाए रखने के कारण ऐसी रूढ़िवादी सोच बनी हुई है।प्रदेश स्तर पर समाज के बीच ऐसी परंपरा को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।