चोरी-छिपे कोरिया में खप रहा मध्यप्रदेश का धान

इस रास्ते से धान ही नहीं पहुंच रहा गांजा-शराब भी

बैकुंठपुर। कोरिया जिले से लगी मध्यप्रदेश की सीमा पर प्रशासन ने तीन चेकपोस्ट लगाकर कड़ी नजर रखने के दावे कर रहा है, परन्तु प्रशासन को ठेंगा दिखाते ऐसे कई गुप्त रास्ते है जहां से ना सिर्फ इस समय मप्र का धान आ रहा है बल्कि पूरे वर्ष इसमें गांजा और शराब से लेकर कई जरूरत के सामने की आवाजाही खुलेआम होती है, ये ऐसे रास्ते है जो चुनावी आचार संहिता से भी बचे रहते है, जहां से आसानी से एक राज्य का सामान दूसरे राज्य में बड़ी आसानी से आता जाता रहता है। धान खरीदी के नोडल अधिकारी ने इस गुप्त रास्तों की इस संवाददाता से बारीकी से जानकारी ली । उन्होंने ने बी हैरानी जताई और कहा कि वे इन रास्तों पर कड़ी नजर रखेंगे।
जानकारी के अनुसार धान खरीदी को लेकर राज्य भर में जबरदस्त छापेमारी जारी है, कोरिया जिला प्रशासन भी हर हाल में अवैध धान खरीदी ना हो इसके लिए कमर कस कर तैयार है बड़ी मात्रा में धान की धरपकड़ भी कई गयी है। वहीं जिले के दूरस्थ क्षेत्र भरतपुर की सीमा से लगे ऐसे कई रास्ते है जहां से आसानी से धान यहां खप रहा है। जबकि प्रशासन चांटी, हरचोखा और घोरधडा चेकपोस्ट लगा रखे हैं। इसके अलावा कई ऐसे गुप्त रास्ते है जो प्रशासन की नजर से कोसों दूर है। इन रास्तों से बड़ी मात्रा में अवैध गांजे पड़ोसी राज्य से शराब और धान के हर सीजन में धान यहां लाया जाता है। ग्रामीणों की माने तो मप्र का धान धीरे-धीरे उनके द्वारा गांवों में बनाए दलालों के यहां भडारण करते जाते है और फिर उसे आसानी से समितियों में खपा देते हैं इसके लिए वो ऐसे किसानों का पंजीयन करवाते हैं जो काफी कम मात्रा में धान की खेती करते हैं। जंगल के बीच बने रास्तों को व्यापारी जेसीबी से सड़क तैयार कर लेते हैं और इन पर रात दिन टैक्टर दौड़ते हैं। ग्रामीणों की माने में ये सिर्फ धान तो बेचते ही है, खाद और समिति में मिलने वाले बीज भी बड़ी आसानी से लेकर जाते है।

मप्र के बनसुकली का धान खपने की खबर
माडीसरई मुख्यमार्ग से देवगढ़ के आगे एक कच्चा रास्ता जंगल की ओर कटता है जो जंगलों के बीच ग्राम पंचायत उदकी के बैरजाली पारा पहुंचता है, यहां से बनास नदी पार कर मप्र का वनसुकली कस्बा आसानी से पहुंचा जा सकता है, हाल के दिनों में तीन चार बार ही धान से भरे ट्रैक्टर पहुंच पाए हैं। बनास नदी पर धान के छत्तीसगढ़ पहुंचने के ताजा सबूत मिले हैं। रास्ते भर धान गिरा हुआ पाया गया है। ग्रामीण बताते है कि बनसुकली के व्यापारी भोले भाले ग्रामीणों का बकायदा पंजीयन करवाते है, और इस सीजन में फट्टा लगाकर किसानों को धान 10रू से 14 रू प्रति किलों कीमत का खरीदते है और उसे बड़ी आसानी से छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केन्द्रों में बेच देते है। ऐसा कई वर्षो से जारी है।

मवई नदी पर कई रास्ते
हरचोखा स्थित मवई नदी राज्यों की सीमा को बांटती है, यहां एक अंतर्राज्यीय चेकपोस्ट है, जहां 24 घंटे पुलिस और कोटवार तैनात है, परन्तु उससे थोड़ा आगे तीन रास्ते हैं, जहां से मप्र का धान ब़डे आराम से माडीसरई तक पहुंचाया जाता है। घुघरी और हरचोखा के बीच एक रास्ता और सीतामढ़ी के हरचोखा बस्ती से निकलने वाला एक रास्ता और एक रास्ता नरईटोला से होकर सीधा माडीसरई तक पहुंचता है। इन सभी रास्तों पर प्रशासन ने किसी भी प्रकार की चौकसी नहीं रख रखी है।

मप्र के जैतपुर से आ रहा है धान
भरतपुर के कंजिया में मप्र के जैतपुर का धान भी पहुंचता है, बहरासी से कुंवारपुर और फिर पहाड पार का जैती से सीधा कंजिया पहुंचा जा सकता है। जैती से मप्र का जैतपुर मात्र एक किमी है, वहीं उदकी स्थित बनास नदी से एक रास्ता पडौली की ओर जाता है, जिससे भी ब़डी आसानी से सबकुछ मप्र का असानी से पहुंच जाता है। फिलहाल अभी कुछ दिन पहले ही धान की खरीदी शुरू हुई है, प्रशासन की नजर इन रास्तों पर अभी तक नहीं पड़ी है, यदि समय रहते प्रशासन ने इन रास्तों पर चौकसी नहीं बढ़ाई तो मप्र का धान आसानी से छत्तीसगढ़ में खपने के लिए तैयार बैठा है।