माँ बनने की हसरत, माता अंगारमोती के दरबार में लेटीं सैकड़ों महिलाएं

एक बार फिर दीवाली के बाद पहले शुक्रवार को अंगारमोती  मंदिर में महिलाएं अपनी मन्नत को जुटीं

धमतरी| इन्सान चाँद पर पहुँच चुका है, मंगल पर दुनिया बसने की सोच रहा है , पर अपनी आस्थाओं से जकड़ा, अंध विश्वासों में बंधकर वह सब कुछ करता जो उसकी मनोकामना पूरी करे| जो उसको लाभ पहुंचाए|

एक बार फिर हर बरस की तरह दीवाली के बाद पहले शुक्रवार को धमतरी के गंगरेल स्थित मां अंगारमोती  मंदिर में महिलाएं अपनी मन्नत को जुटीं| सैकड़ों महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए पेट के बल साष्टांग लेटकर बैगा का इंतजार करने लगीं|

उनकी अंगारमोती पर आस्था, और बैगा पर विश्वास कि जब वह उनकी पीठ पर अपने पैरों से गुजरेगा तो उसके घर पर भी एक दिन किलकारी गूंजेगी|

आज जब  संतान के लिये आधुनिकतम टेस्ट ट्यूब और आईवीएफ तकनीक है, ये अनूठी मान्यता हैरान कर देने वाली है|

छत्तीसगढ़ का  गंगरेल बांध जब नहीं बना था तब मां अंगारमोती  व इस इलाके की अधिष्ठात्री देवी थी| बांध बनने के बाद वे तमाम गांव डूबान में आ गये तो  अंगारमोती की गंगरेल के तट पर फिर से स्थापना कर दी गई|  जहां पूरे साल में एक दिन सबसे खास होता है|

दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को यहां भव्य मंडई लगता है| हजारों  लोग जुटते हैं| आदिवासी परंपराओ के साथ. पूजा-अर्चना की जाती है|

और इसी दिन औलाद की लालसा लिये महिलाएं आती है|  मंदिर के सामने हाथ में नारियल ,अगरबत्ती  लिये  बैगा का इंतजार करती हैं|

जब बैगाओं पर मां अंगारमोती सवार होती है, वे झूमते झूपते, ढोल नगाड़ो की गूंज के बीच पेट के बल दंडवत लेटी  महिलाओं के उपर से गुजरते हैं|

मान्यता है कि जिस भी महिला के उपर बैगा का पैर पड़ता है, उसे संतान के रूप में, मां अंगारमोती का आशीर्वाद मिलता है|  उनकी गोद हरी हो जाती है| उनके आंगन में भी किलकारी गूंजती है|

छत्तीसगढ़ में कई सिद्ध शक्ति मंदिर हैं  जहाँ भक्त जुटते हैं|