पांच दिन का महापर्व है “दीपावली” ये है पौराणिक महत्व…

दीपावली पर पूजन का शुभ लग्न और मुहूर्त

रायपुर। “दीपावली” का अर्थ है दीपों की पंक्ति, यह एक ऐसा महापर्व है, जो पांच दिनों तक मनाया जाने वाला तथा अलग अलग पर्वो से युक्त है। आज महानगरों में भले ही लक्ष्मी पूजन ही मुख्य पर्व हो गया है लेकिन गाँव-कस्बो में आज भी पांचों दिन को महापर्व के रूप में मनाते है। इस महापर्व का आरम्भ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी ( धनतेरस ) से होता है। जो 5 दिन तक कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक लगातार मनाया जाता है। महामाया मंदिर के पुजारी पंडित मनोज शुक्ल ने इस महापर्व पर शोधपरख जानकारियां देश टीवी के साथ साझा करते हुए बताया कि ” दीपावली का शाब्दिक अर्थ में दीपो की अवली अर्थात पंक्ति। ” कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि को यह पर्व मनाया जाता है।

                   विष्णु पुराण की कथा के अनुसार समुद्र मन्थन में आज के दिन ही 14 रत्नों में सर्वश्रेष्ठ लक्ष्मी जी का आविर्भाव हुआ था। तब से आज तक इस दिन लक्ष्मी पूजन की परम्परा चली आ रही है। इस दिन शाम के समय अधिक से अधिक संख्या में दीपक जलाकर माँ महालक्ष्मी जी के साथ माँ सरस्वती व गणेश जी की षोडशोपचार पूजा किया जाता है। पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि व्यापारी वर्ग इस दिन बही खाता कलम दवात आदि की भी पूजा करते है। पूजन के बाद श्रद्धा पूर्वक माता पिता व बड़े बुजुर्ग को भेंट देकर चरण छूकर प्रणाम करके आशीर्वाद लेना चाहिए। दो पर्व आगे व दो पर्व पीछे लिये हुए दीपावली का त्यौहार भारतीय संस्कृति का सबसे अधिक गरिमामय पर्व है, जिसे देश के हर भाग में ही नही बल्कि विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है।

                              पंडित शुक्ला ने कहा कि दीपावली के प्रचलन के सम्बन्ध में अनेकानेक कथाओं का वर्णन है लेकिन जनमानस के अनुसार इस पर्व को भगवान राम – सीता व लक्ष्मण जी के 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या आने की ख़ुशी के उत्सव के रूप में मनाते है। भारत की प्राचीन सभ्यता मोहन जोदड़ो-हड़प्पा की संस्कृति के अवशेषो में भी दीपो का प्रमाण मिला है। भारतीय इतिहास के पन्नों पर इस दिन के कुछ अन्य प्रसङ्ग भी जुड़े हुए है। जिससे दीपावली सभी धर्मो का त्यौहार बन गया है।

1. एक दिन पहले ही भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया तो आज के दिन गोकुल वासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थी।

2. धर्मराज युधिष्ठिर ने इसी दिन राजसुय यज्ञ किया , सो रात्रि में दीपमाला की गयी थी।

3. सम्राट अशोक का दिग्विजय अभियान इसी दिन आरम्भ करने के अवसर पर दीपदान किया गया था।

4. सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक इसी दिन हुआ था इसलिये दीप जलाकर खुशियां मनाई गयी थी।

5. जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को इसी दिन निर्वाण प्राप्त हुआ था। मोक्ष जाने से पहले महावीर स्वामी ने आधी रात को आखिरी बार उपदेश दिया था। मोक्ष के बाद जैन धर्मावलम्बियों ने दीपक जलाकर रौशनी की थी।

6. सिक्ख धर्म के छठवें गुरु हरगोविन्द सिंह जी अपने 52 राजाओं को मुगल शासक जहाँगीर की कैद ( ग्वालियर किले ) से छुड़ाकर हरमंदर साहिब अमृतसर पहुँचे थे। तथा इसी दिन स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास भी हुआ था । इसी ख़ुशी में सिक्खों ने दीप मालायें बनाई थी तब से यह समुदाय इस पर्व को मनाते आ रहे है।

7. आइने अकबरी के अनुसार सम्राट अकबर दीपावली के दिन दौलत खाने के सामने सबसे ऊँचे स्तम्भ पर बड़ा सा आकाश दीप लटकाते थे।

8. शाह आलम द्वितीय के शासनकाल में जश्न-ए-चिराग का त्यौहार इतने व्यापक पैमाने पर मनाया जाता था कि तेल कम पड़ जाता था । पूरा महल दीपो से रोशन किया जाता था।

9. सम्राट जहाँगीर व बहादुर शाह जफर भी दीपावली को धूमधाम से मनाते थे।

10. बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान गौतम बुद्ध के स्वागत में उनके अनुयायियों ने इस दिन लाखों दीपक जलाए थे। आज भी बौद्ध इसी दिन अपने स्तूपो पर दीप जलाते है।

11. आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द ने भी दीपावली के दिन ही शरीर को त्याग कर निर्वाण पाया था तब से इनके अनुयायी भी इस दिन दीप जलाते है।

12. वेदांत के प्रचारक स्वामी रामतीर्थ जी इसी दिन धरा पर अवतरित हुए थे और इसी दिन शरीर का त्याग भी किये थे।

लाई (खील )और बताशे की परम्परा:-
लक्ष्मी पूजन में लाई-बताशे का भोग लगाया जाता है। वैदिक काल में यह नये फसल का त्यौहार था । क्योंकि शरदकाल में नये फसल की कटाई हो जाती है। पश्चात नये धान्य की खील का भोग लगाने की परम्परा कायम हो गयी ।

पटाखे फोड़ना :-
प्राचीन समय की थाली व छाज पीट कर लक्ष्मी की बहन दरिद्रता को भगाने की परम्परा आज विकसित व आधुनिक होकर पटाखे का रूप धारण कर लिया ।

अजब गजब रीति-रिवाज
विविधताओं से भरे भारत देश के अलग अलग प्रान्तों में दीपावली मनाने के अनोखे रीति रिवाज व परम्पराएँ भी है।

0 उत्तराखण्ड में थाउजनजाति के लोग अपने मृत पूर्वजो के साथ दीपावली मनाते है।
0 राजस्थान में बिल्ली की, मेहमानों की तरह स्वागत सत्कार और सेवा करके दीपावली मनाया जाता है।

0 गुजरात में नमक को साक्षात लक्ष्मी जी का प्रतीक मानकर इस दिन खरीदी बिक्री किया जाता है।

0 आंध्रप्रदेश में घर के बाहर मचान बनाकर ऊपर में दीप जलाकर घर व बाहर रौशनी की जाती है।

0 केरल में इस दिन को भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाते है।

0 गोवा में दीपावली के दिन नारियल के पेड़ पर चढ़कर दीप जलाने का रिवाज है।

0 कोंकण इलाके में इस दिन आधी रात के समय पुरे गाँव वाले गाँव से बाहर सामूहिक रूप से इस पर्व को मनाते है।

0 झारखण्ड के कुछ इलाको में दीपावली के दिन रात को घर के दरवाजे बन्द नही किये जाते।

0 अरुणाचल प्रदेश में दीपावली के पूर्व रात को गाँव नगर के सब लोग खुले मैदान में जुआ खेलते है।

0 महाराष्ट्र में दीपावली के दिन यम देव तथा राजा बलि की सामूहिक रूप से पूजा अर्चना करते है।

0 पश्चिम बंगाल में इस दिन माँ काली की पूजा का हर घर में विशेष महत्त्व है।

0 छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में दीपावली को सुरहोती के नाम से जाना जाता है।

विश्व में दीपावली :-

दीपावली पर्व , वैश्विक संस्कृति का समन्वयक है । क्योकि इस पर्व को पुरे विश्व में भिन्न भिन्न रूपो में बड़े श्रद्धा और उमंग के साथ मनाया जाता है।

0 पड़ोसी देश नेपाल में दीपावली बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
0 तिब्बत में चांदी की थाली में दीप सजाकर बौद्धों की देवी तारा की पूजा अर्चना की जाती है।
0 कोरिया में भी तिब्बत जैसी परम्परा का निर्वहन किया जाता है।
0 श्रीलंका में हाथियों को सजाकर जुलुस निकाला जाता है। और चीनी मिटटी के खिलौनों की प्रदर्शनी लगाई जाती है
0 म्यांमार ( बर्मा ) में दीपोत्सव को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाता है।
0 इंग्लैंड में गार्ड फारस डे के नाम से दीपोत्सव मनाया जाता है तथा खूब आतिशबाजी की जाती है।
0 थाईलैंड में दीपोत्सव पर्व लाभ क्रायोंग के नाम से मनाया जाता है।
0 चीन व जापान में दीपावली को लालटेन का त्यौहार के नाम से मनाया जाता है।
0 मिस्र व यूनान के मन्दिरों में मिट्टी व धातु के दीपक प्रज्वलित करने के साक्ष्य प्राप्त है।
0 सूडान में माँ लक्ष्मी जी को धान उत्पन्न करने वाली देवी के रूप में माना जाता है।
0 ग्रीस में सामाजिक सम्पन्नता की देवी के रूप में “री” की उपासना का प्रचलन है।
0 अमेरिका में दीपावली मनाने की परम्परा की शुरुआत जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने व्हाइट हाउस से किया था। अब इसे भव्यता के साथ सार्वजनिक रूप से उत्साह पूर्वक मनाया जाता है।
इनके आलावा आस्ट्रेलिया, मेलबर्न, न्यूजीलैंड, मलेशिया,बाली लीप, इंडोनेशिया आदि देशों में भी दीपावली को बड़े ही उत्साह पूर्वक धूमधाम से मनाया जाता है।

दीपावली पूजन मुहूर्त

0 लाभ सुबह 9:00 बजे से 10.30 तक
0 अमृत सुबह 10.30 बजे से 12:00 बजे तक
0 शुभ दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक
0 शुभ शाम 6:00 बजे से 7:30 तक
0 अमृत रात्रि 7.30 बजे से 8.39 तक
0 वृषभ लग्न शाम 6:36 से रात्रि 8:35 तक
0 मिथुन लग्न रात्रि 8:35 से 10:48 तक
0 सिंह लग्न रात्रि 1.02 से रात्रि 3:13 तक