वन कानून संशोधन के खिलाफ आदिवासी समाज ने निकाली पदयात्रा

मैनपुर में भारतीय वन कानून में प्रस्तावित संशोधन के विरोध में आदिवासी

गरियाबंद। गरियाबंद जिले के तहसील मुख्यालय मैनपुर में भारतीय वन कानून में प्रस्तावित 2019 के संशोधन के विरोध में आदिवासी समाज द्वारा पदयात्रा शुरू की गई। समापन रैली-सभा गांधी मैदान गरियाबंद में हुई। पदयात्रा अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद द्वारा जिला पंचायत गरियाबंद सभापति लोकेश्वरी नेताम के नेतृत्व में प्रारंभ की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग गोंडवाना भवन में एकत्र होकर इष्टदेव, बूढ़ादेव की पूजा अर्चना कर मैनपुर से जिला मुख्यालय गरियाबंद 47 किलोमीटर पदयात्रा किए। पदयात्रा प्रारंभ करने के पूर्व सभा को संबोधित करते हुए सभापति लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि यह पदयात्रा 1927 के भारतीय वन कानून में प्रस्तावित 2019 के संशोधन के विरोध में शुरू की जा रही है, अब आदिवासी समाज अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा। शासन और संविधान द्वारा मिले अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी।


क्षेत्र के आदिवासी भुंजिया नेता टीकम नागवंशी ने कहा कि लगातार शासन प्रशासन द्वारा आदिवासियों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है, कभी टाईगर रिजर्व के नाम पर बेदखल किया जा रहा है तो कभी बड़े कॉरपोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए हमें परेशान किया जा रहा है। आज भी अभ्यारण्य क्षेत्र के आदिवासी ग्रामो में ग्रामीण सडक, बिजली, पानी, शिक्षा स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, जब टाईगर रिजर्व क्षेत्र में विकास की बात आती है तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की बात कहकर इन आदिवासी ग्रामो में विकास कार्यों को रोक दिया जाता है।

बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे
युवा आदिवासी नेता महेन्द्र नेताम ने कहा कि मैनपुर के लोग आजादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। क्षेत्र के प्रमुख सलफ जलाशय बांध का निर्माण कार्य लगभग 30 वर्ष पहले प्रारंभ हुआ था, जिसमें 70 प्रतिशत कार्य हो चुका है लेकिन बाकी कार्यों में वन विभाग द्वारा रोक लगा देने के कारण आज तक इस बांध का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते क्षेत्र के किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सलफ जलाशय बांध के लिए लगातार आंदोलन, प्रदर्शन क्षेत्र की जनता समय समय पर करती रही है लेकिन इस गंभीर समस्या के समाधान की ओर शासन प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

अब तक नहीं है बिजली-पानी
उदंती अभ्यारण्य क्षेत्र से पहुंचे पदुलोचन यादव ने बताया कि अब तक इस क्षेत्र के दर्जनों ग्रामों में बिजली नहीं है, लोगों को जमीन का पट्टा नहीं मिला है। गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं है, जिसके चलते हम लोग आंदोलन करने बाध्य हो रहे हैं। इस दौरान कार्यक्रम को कई आदिवासी नेताओं ने संबोधित किया और पारंपरिक हथियार तीर, धनुष, भाला लेकर पदयात्रा प्रारंभ किया। पदयात्रा का नेतृत्व जिला पंचायत सभापति लोकेश्वरी नेताम कर रही हैं।