हाथियों ने बार अभ्यारण्य इलाके को बनाया ठिकाना

40 हाथियों का दल कर रहा विचरण

रजिंदर खनूजा, पिथौरा। बलौदा बाजार और महासमुंद जिले में लगातार विचरण कर रहे हाथियों ने बार क्षेत्र को ही अपना रहवास चुन लिया है।इन जिलों में पूर्व से ही 23 हाथी विचरण कर रहे थे।अब 17 हाथियों का एक और दल भी इस क्षेत्र में पहुच गया है।ये हाथी गरियाबंद जिले के जंगल भृमण कर लौट चुके है।

 मिली जानकारी के अनुसार बलौदा बाजार महासमुंद जिले में सक्रिय 23 हाथियों की संख्या अब 40 हो गयो है।ये हाथियों का दल स्थाई रहवास तलाशने के लिए महासमुंद के आसपास पहुचने लगे है। पहले से मौजूद 23 हाथी जहां बागबाहरा क्षेत्र में जमें है वहीं दूसरा दल सिरपुर क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं।

वन विभाग के मुताबिक 23 सदस्यीय वाले दल में कुल 19 हाथी विगत दिनों बागबाहरा क्षेत्र के चरौदाबांध के पास डेरा जमाए थे।

विगत शनिवार रात बलौदाबाजार जिले से करीब 17 सदस्यीय हाथियों का नया दल यहां पहुंचा था। विभाग के मुताबिक यह दल वर्तमान में कुकराडीह जंगल में डेरा जमाए हुए हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों के मूव्हमेंट पर नजर रखी है। हालांकि विभाग की मानें तो हाथियों ने किसी तरह की जनहानि नहीं की हैं।

इस संबंध में वन विभाग के एसडीओ एस आर नाविक ने बताया कि एक दल बागबाहरा और दूसरा सिरपुर के कुकराडीह जंगल में हैं।

किसान संकट में

महासमुंद एवम बलौदाबाजार सीमा क्षेत्र के किसानों के साथ ग्रामीणों की परेशानी अब और भी बढ़ गयी है।हाथियों की संख्या बढऩे से सबसे अधिक चिंता किसानों को है। सिरपुर के बाद बागबाहरा ब्लॉक के करीब दो दर्जन गांव में हाथियों द्वारा फसल को क्षति पहुंचाई जा चुकी है।

इधर, सिरपुर क्षेत्र में पहुंचे नए दल द्वारा भी फसल क्षति की खबर मिल रही है। ग्रामीणों में भी हाथियों की आमद की खबर ने चिंता बढ़ा दी है।

हाथी क्षेत्र बना महासमुंद जिला

जिसहिसाब से जिले में हाथियों की संख्या बढ़ती जा रही है उससे देखकर लगता है कि महासमुंद हाथियों का गढ़ बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में हाथियों का और नए दल ना पहुंच जाए इसकी चिंता लोगों को सता रही है।

वन विभाग बस खदेड़ रहा

हाथियों के रहवास की व्यवस्था कर हाथियों की समस्या का समाधान करने में वन विभाग पूरी तरह फ्लॉप हो चुका है।क्षेत्र में लगातार बढ़ रही हाथियो की संख्या से यह तो स्पस्ट है कि हाथी अब इस क्षेत्र को ही अपने रहवास के लिए उपयुक्त मांन रहे है।

लिहाजा विभाग को अब तक इस क्षेत्र में हाथियों के रहवास की व्यवस्था की ओर कदम बढ़ाने चाहिए थे।परंतु अब तक हाथियों को महासमुंद जिले से बलौदाबाजार जिला एवम बलौदाबाजार से पुनः महासमुंद जिले की ओर खदेड़ने की ही योजना अमल में लाता रहा है।जिससे आज भी हाथियों की समस्या एवम ग्रामीणों में दहशत जस की तस है।।

स्थानीय समाधान क्यों नहीं

वन विभाग के उच्च अधिकारी इनका समाधान नही कर पा रहे या करना नहीं चाहते? यह प्रश्न अब यक्ष प्रश्न बन चुका है। कोई दर्जन भर हाथियों से प्रारम्भ हाथियों की संख्या धीरे धीरे चार दर्जन के करीब पहुंच रही है।इसके बावजूद प्रदेश स्तर के अधिकारी मात्र इनके लोकेशन की जानकारी एवम इनसे नुकसान  का मुआवजा देने का काम ही कर रहे है। सिरपुर क्षेत्र की दहशत में जीवन जीने  मजबूर ग्रामीण बार-बार विभाग से पूछ रहे है कि आखिर कब उन्हें हाथी समस्या से मुक्ति मिल पाएगी,

बहुत हुए अजीब प्रयोग

वन विभाग द्वारा हाथियों को नियंत्रण करने की बजाय लगातार हाथियो को भगाने के कभी बुगबुगी लाइट लगाना तो कभी करंट से हाथी भगाने के अजीब करता रहा है।इन प्रयोगों में अफसरों ने शासन से भारी खर्च करवा कर काले हाथियों को सफेद हाथी बना दिया था।इसके बाद भी समस्या जस की तस है।