महासमुंद निकाय चुनाव : भाजपा का प्रदर्शन लोकसभा की तरह

लोगों का कांग्रेस से मोहभंग, कार्यशैली पर सवालिया निशान

पिथौरा। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नगरीय निकाय चुनाव में इस बार जिले की 5 नगर पंचायतों एवम एक नगर पालिका में कांग्रेस मात्र एक नगर पंचायत में ही स्पस्ट बहुमत हासिल कर पाई है।मात्र एक वर्ष में ही खासकर शहरी मतदाताओं का कांग्रेस से मोह भंग होना सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है।ज्ञात हो कि विगत चुनाव में पिथौरा,बागबाहरा एवम तुमगांव नगर पंचायत में कांग्रेस के अध्यक्ष थे।
स्थानीय निकाय में 21 दिसम्बर को मतदान के बाद 24 दिसम्बर को मतगणना में सत्तारूढ़ कांग्रेस को जिले भर से पिथौरा को छोड़कर लगातार झटके का अनुभव होता रहा।कांग्रेस के दिग्गज भी साधारण निर्दलियों के सामने भी धराशायी होते दिखाई देने लगे। महासमुंद नगर पालिका में कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष पद के प्रत्याशी जो लगातार अपने वार्ड से चुनाव जीतते आये हैं।वे भी चुनाव हार गए।यहां के कुल 30 वार्डों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी और 14 सीटें हासिल कर अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे निकल गयी।माना जा रहा है कि यहां पूर्व विधायक डॉ विमल चोपड़ा के पुनः भाजपा प्रवेश के कारण कांग्रेस का नगर पालिका अध्यक्ष बनने का मंशा धरी की धरी रह गयी।इस पंचायत में भाजपा का अध्यक्ष बनना तय है।यहां भाजपा को 14, कांग्रेस को 0‌ छज का को 2 एवम 01 सीट पर आप ने भी जीत दर्ज कर जिले में अपना खाता खोला है।इसके अलावा 5 सीट निर्दलियों के हाथ गयी है।

नगर पंचायतों के परिणाम देखने से लगता है कि स्थानीय चुनाव में आम लोग पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी को मतदान करते हैं।जिले की 5 नगर पंचायतों में कुल 75 पार्षदों के पद हैं। इनमें से 23 निर्दलियों ने फतह हासिल की है।इतने ही वार्डों में कांग्रेस ने भी जीत दर्ज की है जबकि 29 वार्डों में भाजपा ने कब्जा किया है। इसमें सराईपाली एवम तुमगांव नगर पंचायत में भाजपा को स्पस्ट बहुमत मिल गया है।जिससे यहां भाजपा के अध्यक्ष बनने का रास्ता साफ हो गया है।दोनों ही पंचायतों के चुनाव के बाद मतगणना में भाजपा को 9 कांग्रेस को 03 एवम निर्दलियों को 3 वार्ड में जीत मिली है।

बागबाहरा में इस बार कांग्रेस का जादू नहीं चला।यहां अध्यक्ष निर्दलीय ही तय करेंगे।यहां भाजपा कुल 6 वार्डों में जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है।इसके बावजूद भाजपा को अपना अध्यक्ष बनाने के लिए कम से कम 2 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन आवश्यक होगा।यहाँ कांग्रेस को मात्र 04 एवम निर्दलियों को 5 वार्डों में जीत मिली है।इसी तरह बसना नगर पंचायत में कुल 15 में से 6 सीट नीलांचल समिति ने जीती है।भाजपा को मात्र 3 वार्ड एवम 05 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी जीते है।एक वार्ड निर्दलीय के हाथ में है।

पिथौरा में करारी हार, प्रस्तावक तक नहीं
पिथौरा में कांग्रेस 8 सीट जीत कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी है।यहां कांग्रेस से ही अध्यक्ष बनना तय है।यहाँ के 15 वार्डों में 08 कांग्रेस एवम 5 निर्दलियों ने अपने वार्डों में जीत हासिल की है।इसके अलावा 05 निर्दलीय जीत गए है। जबकि भाजपा ने यहाँ सबसे शर्मनाक प्रदर्शन किया और मात्र 2 वार्डों में ही संतोष करना पड़ा। भाजपा इस पंचायत में चाहकर भी अपना प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए खड़ा नहीं कर सकती क्योंकि इस पंचायत में भाजपा के पास प्रस्तावक एवम समर्थक भी नहीं है।

जिले में लगातार बदल रहे हालात
महासमुंद जिले में लगातार राजनीतिक हालात बदलते रहते हैं। वर्ष 2018 के विधान सभा चुनाव में मतदाताओं ने कांग्रेस को सर आंखों पर बैठाया और जिले की चारों सीट को कांग्रेस की झोली में डाल दिए।इसके 5 माह बाद ही हुए लोकसभा चुनावों में मतदाताओं ने कांग्रेस से जिले की 4 में से तीन सीट छीन ली और मात्र खल्लारी सीट पर ही कांग्रेस बढ़त बना पाई।अब स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा ने लोकसभा की तरह हो अपना प्रदर्शन किया।