Exclusive : पिथौरा में फसल बचाने मचानों पर मुस्तैद है किसान

बायसन, सुअर और हाथियों पर रख रहे नजर

रजिंदर खनूजा, पिथौरा। कोरोना के कारण पूरा देश लाकडाउन है। गांव के मोहल्ले बंद हैं, खेतों को मजदूर नहीं मिल रहे पर किसान अपने फसल को बर्बाद कैसे होने दे। धान की फसल कुछ दिनों में तैयार होने लगेगी। अब तक सब्जी गेहूं, दलहन तिलहन पर कुदरत की मार के बाद कोरोना का असर झेल रहा किसान अब जंगली जानवरों के कहर से इसे बचाने में जुटा है। उसकी बची खुची उम्मीदें इसी फसल को सहेजकर रख पाने में है। लिहाजा मचानों पर वह मुस्तैद है।

रायपुर संभाग के महासमुंद एवम बलोदा बाजार जिले में लगातार हाथियों की आमद से अब क्षेत्र वासियो ने अपनी फसल की रक्षा के लिए मचान बना लिए है।ग्रामीण रात भर इसी मचान पर रह कर खेतो की देखरेख करते है।बांस एवम लकड़ियों से पेड़ो के मोटे तनो में बने मचान इस आधुनिक युग मे भी पुरातन समय की याद दिलाते है।

                नगर से कोई 16 किलोमीटर दूर व्ही आई पी विश्राम गृह के चंद कदम दूरी पर ही ग्रामीणों के खेतों के किनारे पेड़ो पर कोई 20 फ़ीट ऊंचे बने दर्जनों मचान पर अनायास ही राहगीरों की नजर चली जाती है। इस प्रतिनिधि ने जब देवपुर क्षेत्र का दौरा किया।देवपुर विश्राम गृह से मुख्यमार्ग एवम तेन्दुचुआ जाने के रास्ते मे हरे भरे रबी के धान लहराते खेतो के किनारे पेड़ों के ऊपर बड़े छोटे दर्जनों मचान दिखाई दिए।एक मचान में चढ़ रहे किसान परस राम बरिहा ने बताया कि वह एवम उसका पुत्र तेजराम राम में खाना खा कर कोई सात बजे मचान पर पहुच जाते हैं और रात भर आपने खेत की चौकीदारी करते हैं।

जंगली सुअर एवम बायसन से रक्षा
परस राम बरिहा ने बताया कि वे समीप के ग्राम तेन्दुचुआ में रहते है उसके कोई साढ़े चार एकड़ खेत है।वह समिति द्वारा कराए गए ट्यूबवेल में पर्याप्त पानी है लिहाजा यहां के अधिकांश किसान खरीफ के साथ रबी फसल भी लेते है।परन्तु जंगल का मुहाना होने के कारण अक्सर पानी एवम भोजन की तलाश में जंगल के हिंसक जानवर आकर खेतो की फसल नुकसान कर जाते है।

                       इनमे बायसन,एवम जंगली सुअर जैसे जानवरो को तो वे वापस जंगल भेज देते है परन्तु अब विगत 5 वर्षो से विशालकाय हाथी भी बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में आ रहे है उनके हमले से क्षेत्र में अनेक मौते भी हो चुकी है। लिहाजा यहां के किसान चिंतित थे।क्योंकि हाथी प्रतिदिन नही आते परन्तु कभी भी आ धमकते थे जिससे हमेशा जान का खतरा बना रहता था। इसलिए हाथी से बचने के लिए ही उन्होंने मचान बना कर उससे खेतो की निगरानी करना तय किया।

इस मचान के ऊपर खाने पीने की वस्तुओं सहित प्रकाश करने हेतु इमरजेंसी लाइट एवम मनोरंजन हेतु साउंड बॉक्स भी लगा दिया है।रात में जब कोई जानवर फसल खराब करता है तब उसे आवाज कर के भगा देते है।

हाथी जो करना हो वही करता है
अन्य जानवरों के अलावा हाथियों के आने से मचान में बैठने वाले खेत मालिकों ने बताया कि जब हाथी आते है।उन्हें देख कर वे मचान में ही दुबक जाते है।एवम बढ़ी धड़कन से उसके कारनामे देखते हुए उसके जाने की प्रतीक्षा करते है।क्योंकि वे हाथी को भगा नहीं सकते इसलिए उनके खेतें में पहुंचने वाले हाथी जो करना है कर के चले जाते है।

मोटी टहनी पर बनता है मचान
देवपुर क्षेत्र के दर्जनों किसानों के खेत किनारे बने मचान देख कर ये बात समझ में आयी कि किसान मचान का निर्माण पेड़ की एक मोटी टहनी के ऊपर बांस एवम बल्लियों को जोड़कर बनाते है।इस पर चढ़ने के लिए बाकायदा सीढिया भी बनाई गई है।किसानों के अनुसार यदि कभी हाथी गुस्से में भी हुआ तो वह मात्र पेड़ के साथ मचान तक पहुंचने बनाई गई सीढिया ही तोड़ सकता है।इसके बावजूद मचान सुरक्षित ही रहेगा।

हाथियों से बचने बनाते हैं मचान-ठाकुर
उक्त सम्बन्ध में कसडोल के वन एस डी ओ उदय सिंह ठाकुर ने बताया कि क्षेत्र के ग्रामीण आदिवासी परिवार अब साल में दुहरी फसल ले रहे है।परन्तु क्षेत्र में लगातार हाथियों की आमद के चलते ग्रामीणों ने उक्त देशी जुगाड़ से मचान बना कर अपने खेतों की रक्षा कर रहे है।वैसे हाथियों के आमद की खबर लगातार ग्रामीणों को दी जाती है जिससे वे सतर्क रहें।

वर्तमान में 9 हाथी अर्जुनी परिक्षेत्र में
हाथियों के वर्तमान में मिल रहे लोकेशन के अलावा कोई 9 हाथी अर्जुनी परिक्षेत्र के विरल जंगल मे विचरण कर जंगल मे ही अपना भोजन एवम पानी पी रहे है।कभी कभी ये हाथी खेतों की चलती ट्यूबवेल तक पानी पीने के कारण आ जाते है।ये सभी हाथी लगातार वर्ष भर इसी क्षेत्र में आना जाना करते रहते है।