लौट रहे मजदूरों से पुनः कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा

रजिंदर खनूजा, पिथौरा|अन्य प्रांतों से अपने घरों को लौट रहे मजदूरों से पुनः कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है| अभी आने की कम रफ्तार कुछ ही दिनों में तेज हो जाएगी | महासमुंद जिले भर से पलायन कर अन्य प्रांतों में काम करने गए मजदूर अब लौटने लगे हैं। शहर में बस से उतर कर छोटे साधनों से अपने घरों को लौट रहे मजदूरों के कारण एक बार पुनः कोरोना संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।

बगैर किसी लाइसेंस या सरकारी अनुमति के अन्य प्रांतों के इंट भट्ठों में कार्य करने गए मजदूर अब प्रतिदिन सीधे बसों से वापस लौट रहे है। हजारों की संख्या में पलायन किये मजदूर अभी एक दो बसों से प्रतिदिन लौट रहे है,परन्तु आगामी कुछ दिनों के भीतर ही प्रतिदिन दर्जनों बसों से मजदूर अपने घरों को पहुँचने।ऐसे हालात में मजदूरों को कोरेन्टीन सेंटर में रोक कर उनका कोविड टेस्ट करवाना एक चुनोती की तरह है। अभी की कम रफ्तार कुछ ही दिनों में तेज हो जाएगी उसके बाद प्रशासन के सामने अनलॉक हालात में स्थिति सम्भालना कठिन हो सकता है।

ग्रामों में कोरेन्टीन सेंटर–एसडीएम

इधर स्थानीय एस डी एम राकेश कुमार गोलछा ने बताया कि पलायन किये मजदूरों की वापसी के बाद उन्हें दो सप्ताह तक ग्राम के कोरेन्टीन सेंटर में रहना अनिवार्य है।इसकी मोनिटरिंग के लिए उन्होंने ग्राम स्तर पर एक समिति का गठन किया है।जो कि अपने ग्राम वालो को पहचान कर उन्हें सीधे ग्राम के अंदर किसी से मिलने से रोकेंगे और घर जाने के पूर्व दो सप्ताह कोरेन्टीन सेंटर में रहेंगे इस बीच उनका कोविड टेस्ट भी करवाया जाएगा।

बग़ैर अनुमति के गए,अब सही आंकड़ा भी नहीं

मजदूरों के पलायन के सम्बंध में बताया जाता है कि जिला श्रम विभाग के आंकड़ों से कई गुना अधिक मजदूरों ने पलायन किया था।मजदूरों के इस पलायन से मजदूर दलाल तो मालामाल हो गए परन्तु शासन के लिए इनकी सुरक्षित वापसी और संक्रमण से बचाव एवम उपचार एक सिरदर्द की तरह बन जाता है।

खुले आम बाजार घूम रहे

लौट रहे मजदूरों का अपने घरों के नजदीक कस्बाई नगरों में उतरना जारी है|   यहाँ ये मजदूर अपनी जरूरत की सामग्री खरीदने खुलेआम बाजार में लेनदेन कर रहे है।अब इस तरह के मामलों से बमुश्किल नियंत्रण में आया कोरोना के एक बार पुनः बढ़ने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता।

बहरहाल छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष भट्ठा दलालों पर प्रशासनीम कार्यवाही के बाद भी जिले भर के मजदूर आसानी से भट्ठा दलालों के द्वारा अन्य प्रांतों को पहुंचा दिए जाते हैं। यदि शासन प्रशासन वास्तव में दलालों के द्वारा मजदूरों के शोषण के लिए होने वाले पलायन को रोकना चाहता है तो वर्तमान में ग्रामो के कोरेन्टीन सेंटर में ही मजदूरों के बयान से पता लगाया जा सकता है कि किस दलाल द्वारा कितने मजदूरों का पलायन करवाया गया था।

इन आंकड़ों के बाद प्रशासन द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा सकती है।बहरहाल वर्तमान में लौट रहे मजदूर कोरोना की दूसरी घातक लहर से बचे एवम प्रभावितों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।

 

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