झोला छाप डाक्टर सामान्य बुखार में दे रहे हाई डोज इंटीबायोटिक इंजेक्शन

सड़क किनारे मिलीं सेप्ट्रीजोन एंड टेजोबेक्टम फिनेसिफ टी 1.125 जी की खाली सैकड़ों शीशियाँ

रजिंदर खनूजा, पिथौरा| प्रदेश भर में झोला छाप डाक्टर किस तरह इलाज कर मरीजों की जान खतरे में डाल रहे हैं इसका एक नमूना महासमुन्द जिले के सरायपाली इलाके में देखने में सामने आया | जिस इंजेक्शन को सिर्फ सर्जन गंभीर मरीजों को इस्तेमाल करते है उसे ये झोला छाप बेहिसाब सामान्य बुखार के मरीजों को लगा रहे हैं| सरायपाली बीएमओ डॉ अमृत रोहेल्डर के मुताबिक उक्त इंजेक्शन को स्वास्थ्य केन्द्र में भी उसे नहीं लगा सकते| मेकाहारा, सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों को ही इस्तेमाल का अधिकार है|

दरअसल, महासमुन्द जिले के सरायपाली तहसील से लगभग 15 किमी दूर ग्राम बिजातीपाली के एक कच्चे मार्ग में बड़े अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए उपयोग किए जाने वाले हाई डोज एंटीबायोटिक इंजेक्शन की खाली शीशी सैकड़ों की संख्या में सड़क के किनारे कूड़ेदान में देखी गई|

ग्रामीणों के अनुसार हाल ही में बिजातीपाली ग्राम पंचायत मार्ग पर एक पीपल के पेड़ के नीचे काफी मात्रा में हाई डोज इंटीबायोटिक इंजेक्शन सेप्ट्रीजोन एंड टेजोबेक्टम फिनेसिफ टी 1.125 जी, की खाली शीशी देखी गई|

जब स्वास्थ्य विभाग से इस इंजेक्शन के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि यह हाई डोज इंजेक्शन का उपयोग सरायपाली अंचल में नहीं होता| उक्त इंजेक्शन का उपयोग मेकाहारा या सुपर स्पेशलिस्ट अस्पतालों में गंभीर मरीजों के लिए किया जाता है|

उक्त इंजेक्शन से गुर्दा, लीवर फेल होने एवं शरीर के कई हिस्सों में भी साईड इफेक्ट होने का खतरा रहता है| यहाँ तक कि मरीजों की जान भी जा सकती है| ग्रामीणों ने क्षेत्र के एक निजी चिकित्सक के द्वारा उक्त शीशी फेंकने की बात कही गई|

जब उस चिकित्सक की जानकारी ली गई तो उसका क्लिनिक सील था, लेकिन उसके द्वारा क्लिनिक के बाहर ही मरीजों का इलाज किया जा रहा था|

रमेश पटेल नाम के उक्त चिकित्सक ने बताया कि इस इंजेक्शन का उपयोग उस क्षेत्र के सभी निजी चिकित्सक करते हैं और विशेष रूप से टायफाइड, बुखार व घाव सुखाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है|

उन्होंने अपनी डिग्री बीईएमएस बताया और कहा कि यह इंजेक्शन लगाना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है, इसके बावजूद लगाते हैं|     बिजातीपाली के कच्चे मार्ग पर बड़ी मात्रा में इंजेक्शन की खाली शीशी फेंकने की बात पर उन्होंने कहा कि बहुत दिनों से फेंक रहे हैं और उस क्षेत्र के सभी डॉक्टर वहाँ पर ही फेंकते हैं|  क्लिनिक सील होने के बारे में बताया कि दो माह पूर्व कोरोना पॉजिटीव मरीज का इलाज किया गया था, इसलिए सील है|

 

सोशल मिडिया पर भी ख़बरें

अभी कुछ दिन पहले ही मेडिकल कचरा रास्ते पर फेंके जाने को लेकर  सरायपाली अर्जुनदा निवासी पेशे से वकील विनय भोई ने भी फेसबुक पर फोटो पोस्ट कर नाराजगी जताई थी| ये दवाएं संभवत किसी अस्पताल द्वारा फेंका जाना लग रहा था | इस इलाके में कई निजी अस्पताल और क्लिनिक भी हैं| बता दें कि मेडिकल कचरा निपटान का यह तरीका जुर्म है|

 

जाँच उपरांत होगी कार्यवाही – बीएमओ   

इस संबंध में बीएमओ डॉ अमृत रोहेल्डर  ने  कहा कि उक्त इंजेक्शन को बड़े अस्पतालों जैसे मेकाहारा, सुपर स्पेशलिस्ट को ही लगाने का अधिकार है| सरायपाली स्वास्थ्य केन्द्र में भी उसे नहीं लगा सकते| केदुवां के बिजातीपाली में इस तरह के इंजेक्शन की खाली शीशी मिलना गंभीर विषय है| इसकी जाँच करवायी जायेगी और उक्त शीशीयों को जब्ती के लिए भी स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देशित किया गया है| वह इंजेक्शन किस मेडिकल स्टोर से लिया जाता था, इसकी भी जाँच होगी| उक्त इंजेक्शन बेचने के लिए रिकार्ड रखन पड़ता है और ड्रग इंस्पेक्टर इसकी जाँच करते हैं| सामान्य सर्दी, खाँसी, बुखार में यह इंजेक्शन नहीं लगा सकते| मौके पर जाकर निरीक्षण व जाँच करने के उपरांत जिस डॉक्टर के द्वारा यह इंजेक्शन लगाया गया है, उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

 

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