विशेष: महानदी किनारे बसे 40 गाँव जल संकट की ओर

रेत तस्करों के कारण इन दिनों समोदा बैराज भी सूखा, कोडार पर भी असर

रजिंदर खनूजा, महासमुंद| रेत तस्करों के कारण महासमुंद जिले में महानदी के किनारे बसे 40 गाँव जल संकट की ओर बढ़ रहे हैं| फसल पानी के लिये तरसने लगे हैं| इन दिनों लबालब भरा रहने वाला समोदा बैराज भी सूख गया है| बैराज के सूखने से भू-जल स्तर में भी भारी गिरावट आई है। दरअसल रेत तस्कर पानी भरने नहीं दे रहे हैं| नदी से निकाल रेत का भण्डारण जारी है|

जिला मुख्यालय महासमुंद के समीप रेत तस्कर खुले आम खदानों से रेत निकाल कर उसे स्टोर कर रहे हैं।जिससे जिले में भीषण गर्मी के दिनों में भी लबालब भरा रहने वाला समोदा बैराज इस बार सूख गया है। यह बैराज गर्मी की वजह से नहीं, बल्कि रेत माफियाओं द्वारा बैराज में पानी भरने ही नहीं देने के कारण हुआ है । जो पानी भरा था उसे भी करीब डेढ़ महीने पहले छोड़ दिया गया। इसकी भरी कीमत  महानदी के दोनों ओर के करीब 40 गाँव को चुकानी पड़ रही है|

 महानदी किनारे बसे 40 गाँव रेत तस्करों के कारण जल संकट की ओर
समोदा बैराज

ग्रामीणों की मानें तो रेत तस्करों की उक्त करतूत से क्षेत्र के सैकड़ों बोर बैठ गए हैं।जिन नलकूपों से आम जनता की प्यास बुझती थी वह अब हवा उगल रहे हैं। अनेक निस्तारी तालाबों सूख चुके है।हालात देख कर अब किसान भी खून के आंसू रो रहे हैं।आम जनता पीने और निस्तारी पानी के लिए परेशान है।

ग्रामीणों ने बताया कि समोदा बैराज में जलभराव के कारण जिन रेत घाटों में पानी भरे होने से रेत का उत्खनन नहीं हो पाता था या बहुत मुश्किल से होता था। उन रेत घाटों से अब धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है।जिससे यह साफ  है  कि समोदा बैराज के खाली होने का फायदा केवल रेत तस्करों को मिल रहा है। यही कारण है क्षेत्र के लोग कह रहे हैं कि रेत माफियों को फायदा पहुंचाने के लिए ही समोदा बैराज का पानी खाली कर दिया गया।

महासमुंद और रायपुर जिले की सीमा रेखा पर बहती महानदी अपने पानी से जहां रायपुर जिले के हजारों एकड़ खेतों की फसलों को सींचती है।वहीं महासमुंद जिले में अपने तट से 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले करीब 30 से 40 गांवों में भू-जल स्तर को उच्च स्तर पर बनाए रखती है।

महानदी पर बने निसदा और समोदा बैराज में होने वाले विपुल जलभराव के कारण नदी के दोनों किनारों के करीब 60 गांवों में भीषण गर्मी के दिनों में भी ट्यूबवेल भरपूर पानी देते रहे हैं। लेकिन इस बार स्थिति उलट हो गई है।

समोदा बैराज जो गर्मी में भी लबालब भरा रहता था आज उसका पानी तलहटी में सिमट गया है। क्योंकि इस बार बैराज के गेटों को लगातार खुला रखा गया और पानी को नदी में बह जाने दिया गया।ऐसा क्यों किया गया ? इसका कोई जवाब किसी के पास नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उक्त बैराज में कहीं कोई काम भी नहीं चल रहा है। न ही कोई बड़ा कार्य प्रस्तावित है। जिसके लिए बैराज को खाली रखने की जरूरत पड़े।

 जलस्तर नीचे गया

दूसरी ओर बैराज के खाली होने से महानदी के दोनों ओर भू-जल स्तर अचानक गिर गया है। सैकड़ों ट्यूबवेल बैठ गए हैं, पानी निकलना बंद हो गया है और जो ट्यूबवेल चल रहे हैं, उनमें भी पानी की धार पतली हो गई है। यानी वे कभी भी बंद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में हजारों एकड़ रकबे में लगी धान की रबी फसल सूख कर मरने की कगार पर है।

 महानदी किनारे बसे 40 गाँव रेत तस्करों के कारण जल संकट की ओर
पानी के अभाव में खेतों में पड़ी दरार

deshtv ने कई दिनों तक फील्ड में पहुंचकर अछोला, अछोली,गढ़सिवनी, बोरिंग, जोबा, नयापारा, अछरीडीह, बड़गांव, बिरकोनी, घोड़ारी, खट्टी, कांपा, बेलटुकरी आदि गांवों के आम लोगों व किसानों से बात की, अनेक किसानों के खेतों में जाकर उनके बंद हो चुके बोर और पानी के अभाव में मरती फसलों को करीब से देखा।

रबी सीजन की खेती ट्यूबवेलों के भरोसे ही हो पाती है। पानी के अभाव में खेतों में पड़ी दरारों और सूखती, पीली पड़ती फसलों को देखकर किसान आंसू बहा रहे हैं। पानी के बिना फसल की तबाही तो तय है, गांवों में पीने के पानी के लिए भी परेशानी होने लगी है। पेयजल के लिए स्थापित अनेक सार्वजनिक हैंडपंप, नलकूप और निजी घरेलू बोर भी इस बार ठप हो गए हैं।

गांवों के तालाब भी सूख गए हैं, जिससे निस्तारी का संकट भी छाने लगा है। जबकि अभी गर्मी की शुरुआत है ।आने वाले दिनों में पानी के लिए हाहाकार की स्थिति बन सकती है। समोदा बैराज का पानी खाली किए जाने से महानदी की दोनों ओर महासमुंद और रायपुर जिले के करीब 40 गांवों में भू-जल स्तर में भारी गिरावट, रबी फसल की बर्बादी के साथ ही पेयजल की किल्लत और निस्तारी के लिए पानी की कमी जैसी विकट स्थिति बन रही है।

 खुलेआम निकल रही रेत

महानदी की उक्त खदान से माफिया दिन-रात चौबीसों घंटे रेत निकाल रहे हैं। समोदा बैराज में उसकी क्षमता के अनुरूप 16 फीट तक जलभराव होता था, तब बैराज से बड़गांव, बरबसपुर, पारागांव रेत घाट तक नदी में पानी भरा होता था। अबकी बार बैराज खाली और नदी सूखी है, तो रेत की लूट मची है।

महानदी की छाती पर जेसीबी और चेन माउंटेन मशीनें दिन-रात धड़धड़ा रहीं हैं। बरबसपुर, बड़गांव, पारागांव में नियमों को ताक पर रखकर स्वीकृत स्थान से हटकर पूरी नदी में जहां पाए वहां रेत उत्खनन किया जा रहा है।

 महानदी किनारे बसे 40 गाँव रेत तस्करों के कारण जल संकट की ओर
रेत का अवैध भंडारण

महानदी के दोनों तटों की ओर से रेत की लूट मची है। रोज हजारों ट्रक रेत निकाली जा रही।मांग से कई गुना  अधिक रेत निकालकर जगह-जगह रेत का अवैध भंडारण भी किया जा रहा है।

देखें वीडियो महासमुंद जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर बिरकोनी, बरबसपुर, बड़गांव, घोड़ारी आदि गांवों में बेधड़क अवैध स्टॉक कर रेत के पहाड़ रचे जा रहे हैं।

क्षेत्र के लोगों का साफ कहना है कि रेत तस्करों को फायदा पहुंचाने लिए और उनके आकाओं के इशारे पर ही बैराज का पानी छोड़ा गया था। लेकिन नदी के सूख जाने से रेत माफिया बड़गांव, बरबसपुर और पारागांव से जिस तरह दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से रेत निकालने में लगे हैं, लाखों टन रेत का अवैध स्टाक कर रहे हैं उससे लगता हैं कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ जरूर है।

 बैराज के साथ ही कोडार नाला भी सूखा

ग्राम पंचायत अछोली निवासी चंद्रशेखर साहू का कहना है कि समोदा बैराज से इस साल पानी छोड़े जाने से गांव का जलस्तर नीचे चला गया है। बैराज में पानी भरा रहता था तो कोडार नाला में भी नयापारा, अछरीडीह और कांपा के जाते तक पानी भरा रहता था। इस कारण इन गांवों में भी भूजल स्तर गर्मी में भी बना रहता था।

लेकिन इस वर्ष गर्मी शुरू होने से पहले ही बहुत से बोर बंद हो गए हैं। गांव के हैडपम्प भी बंद हो गए है। केवल स्पॉट सोर्स बोर में पानी आ रहा, लेकिन वह भी कब बंद हो जाए भरोसा नहीं।

ग्राम पंचायत अछोला निवासी संतोष कुमार यादव ने बताया कि गांव के अधिकांश बोर का जलस्तर घटने से रबी फसल के लिए पानी की समस्या हो रही है। समोदा बैराज से इस साल पूरा पानी छोड़ दिया गया है, जिसके चलते पूरे इलाके का जलस्तर नीचे चला गया। 5 से 6 तालाबों से गांव वाले निस्तारी किया करते थे, लेकिन अब पूरा तालाब सूखा पड़ा है। करोड़ों की लागत वाली लिफ्ट एरिगेशन योजना भी ठप पड़ी है। गांव की सरहद पर इतना बड़ा डेम है, लेकिन गांव की जमीन प्यासी है|

 महानदी किनारे बसे 40 गाँव रेत तस्करों के कारण जल संकट की ओर
तालाब सूखा पड़ा

ग्राम पंचायत बिरकोनी के किसान तिलकराम निषाद ने बताया कि करीब एक लाख रुपए खर्च कर 10 एकड़ भूमि पर रबी फसल लगाई है। बोर ठप हो गए और पानी की कमी के कारण पूरी फसल मर रही है। फसल की दशा देखी नहीं जाती, इसलिए खेत जाना ही छोड़ दिया है। खाना पीना नहीं सुहा रहा। गांव में करीब 40 बोर बंद हो गए हैं, जो गर्मी के दिनों में भी चलते थे। किसान रो रहे हैं, बस रेत वालों का मजा है। उन्हीं को फायदा पहुंचाने के लिए ही समोदा बैराज का पानी छोड़ दिया गया है।

 पानी छोड़ने का कोई विशेष कारण नहीं : सीई

निसदा-समोदा व्यपवर्तन योजना के सीई श्री नागरिया ने इस सम्बंध में कहा कि समोदा बैराज में गेट आदि से संबंधित बस रूटिंग के कार्य कराए गए हैं, इसके अलावा कोई बड़ा काम नहीं है। फिलहाल कोई बड़ा काम प्रस्तावित नहीं है। पानी छोड़ने का कोई विशेष कारण नहीं है। यह बात सही है कि डायवर्सन के कारण दोनों साइड के गांवों में वाटर लेबल बहुत अच्छा रहता है और ट्यूबवेल चलाकर किसान फसल लेते हैं। बारिश में डेम फिर से भर जाएगा। राजिम मेला के लिए नदी में पानी दिए जाने के बाद समोदा बैराज में भी कुछ जल भराव हुआ है।