पिथौरा इलाके से एक बार फिर दलालों के चंगुल में फंसे मजदूरों का पलायन शुरू

छोटे छोटे गुट बना कर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, भाटापारा सहित अन्य रेलवे स्टेशनों तक पहुंचा रहे

रजिंदर खनूजा, पिथौरा| छत्तीसगढ़ के रायपुर संभाग के महासमुंद जिले के पिथौरा इलाके से एक बार फिर दलालों के चंगुल में फंसे हजारो की संख्या में मजदूरों  का पलायन शुरु हो गया है ।अन्य प्रांतों के ईंट भट्ठों में काम करने के लिए ले जाने वाले भट्ठा दलाल एक बार फिर पूरे उत्साह से खुलेआम उक्त अवैध कार्य को अंजाम देने जुटे है। इन ठेकेदारों की उच्च स्तर की पहुँच के चलते स्थानीय अफसर  कार्यवाही करने से बचते दिखाई देते है।

यहाँ कोरोना इफेक्ट नहीं 
इस वर्ष कोरोना इफेक्ट के कारण प्रायः सभी निजी,धार्मिक एवम शासकीय कार्यो में बाधा देखी जा रही है।परन्तु मजदूरों को प्रताड़ित कर उनसे हामी भरवा कर भट्ठा तक पहुचाने वाले दलालों को कोरोना तक रोक नहीं  पा रहा है और वे लगातार मजदूरों को छोटे छोटे गुट बना कर रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, भाटापारा सहित अन्य रेलवे स्टेशनों तक पहुचा कर उन्हें उत्तर प्रदेश एवम जम्मू सहित अन्य प्रांतों के ईंट भट्ठों की ओर जाने वाली ट्रेनो में भर कर भेज रहे है।

 मजबूरी की मजदूरी करते मजदूर
उत्तरप्रदेश जा रहे भयभीत मजदूरों  के एक परिवार ने  बताया कि वे नगर के बार चौक स्थित एक भट्ठा दलाल का 10 हजार लग रहे है।अब तक  वर्ष के ब्याज के साथ उनकी देनदारी करीब 30 हजार हो गयी है।इसलिए उसे सपरिवार भट्ठा जाना ही पड़ेगा। नहीं गए तो उन्हें मारपीट करने के बाद जबर्दस्ती ले जाया जाएगा।इसलिए वे मार खाने से बचने के लिए चुपचाप चले जाते है।

इस परिवार की मानें तो ये परिवार 2 वर्ष पूर्व पुलिस थाना भी गया था परन्तु वहां भी उनकी सुनवाई होने की बजाय उनकी और पिटाई कर दी गयी इसके बाद से वे अपनी नियति समझ कर भट्ठा दलालों के अनुसार ही जाते और आते हैं|

पुलिस, दलालों को सौंप देती है  

कथित तौर पर अपनी मर्जी से अन्यंत्र कमाने खाने जाने की बात करने वाले मजदूरों  की अलग ही व्यथा है।अपनी दर्दनाक व्यथा सुनाते हुए भट्ठा जा रहे एक मजदूर की मानें तो  कि वे पहली बार ही अपनी मर्जी से भट्ठा गए थे उसके बाद उन्हें जबरन ले जाया जाता है।

यदि वे साहस जुटा कर पुलिस थाना पहुँच  भी जाये तो वहां भी दलालों पर कार्यवाही करने की बजाय उन्ही पर कार्यवाही करने की धमकी देकर भट्ठा दलालों को सौंप दिया जाता है।

दलालों की ऊंची पहुच के कारण मजदूर किसी भी हालत में पुलिस से अपनी शिकायत नही करना चाहये।  और  वे दलालों के चंगुल में ही प्रताड़ित होते  रहते  है।

1000 की दर में फिफ्टी-फिफ्टी
मजदूरों को  भेजने दलाली का कार्य कर छोड़ चुके कुछ जानकारों ने नाम प्रकाशित नहीं  करने की शर्त पर बताया कि उत्तरप्रदेश के इंट भट्ठा मालिको द्वारा प्रति हजार ईंट की दर 1000 रुपये तय है।परन्तु भट्ठा दलाल इधर से पलायन करवा कर ले गए मजदूरो को मात्र 550 रुपये की दर से ही भुगतान करवाते है।

एक मजदूर ने तो यह भी बताया कि उन्हें 550 की दर से काम करवा कर 500 की दर से ही भुगतान का हिसाब किया गया।परन्तु उन्हें वहां बोलने का कोई अधिकार नही है लिहाजा जो मिला वे उतने में ही  घर वापस आ गए।परन्तु घर आने पर उन्हें पता चलता है कि भट्ठा दलाल द्वारा दी गयी अग्रिम का हिसाब बाकी है।और दलाल द्वारा दिये गए 10 हजार ब्याज़ सहित बढ़कर अब 30 हजार पहुच चुके है।लिहाजा अब ये मजदूर दलाल को 30 हजार वापस नही कर पायेगा और अगले साल फिर से भट्ठा जाने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री से अपील
क्षेत्र के अत्यंत प्रताड़ित मजदूर अब पुलिस के सामने अपनी व्यथा नही सुनना चाहते।इन मजदूरों  की शिकायत है कि वे पलायन करने के बाद एवम 24 में से 18 घण्टे मजदूरी करने के बाद भी बमुश्किल दो वक्त की रोटी का ही जुगाड़ कर पाते है और लगातार भारी कर्ज में रहते है। परन्तु उन्हें भट्ठा तक लेजाने वाले दलालो के प्रतिवर्ष करोड़ो लागत के मकान खड़े हो रहे है।इसके बावजूद इन दलालों पर ना तो शासन प्रशासन उंगली उठाती और ना ही आयकर वाले ही कोई कार्यवाही करते हैं  कि आखिर भट्ठा दलालों के पास इतनी अथाह संपत्ति कमाने के स्त्रोत क्या है।ऐसे कौन से स्त्रोत है जिनसे करोड़ो कमाने के बाद भी आयकर भी जमा नहीं  करना पड़ता। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को इस ओर ध्यान देकर कार्यवाही करानी चाहिए|

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