अनूठी शादी : सीमा खान बनी हरमीत सिंह की पत्नी, रज़ामंद दोनों परिवार

बेघर बच्ची को बेटी की तरह पाला फिर उसकी मर्ज़ी से की शादी

रजिंदर खनूजा, पिथौरा। देश की धड़कन दिल्ली में जहां दंगे हो रहे हैं, धर्म विशेष को निशाना बनाया जा रहा है, ऐसे में छत्तीसगढ़ के पिथौरा कस्बे में हुई यह खबर आज के समाज के लिए मिसाल है। दरअसल यहां एक मुस्लिम परिवार में पली-बढ़ी युवती की शादी एक सिख परिवार से हुई। इसमें दोनों परिवार के परिजनों समेत पिथौरा के सभी वर्गों के लोग नवविवाहित को आशीर्वाद देने पहुंचे। रविवार को पिथोरा में सामाजिक बन्धनों को दरकिनार करते हुए एक मुस्लिम परिवार में पली लाडली सीमा नगर के सिक्ख युवक हरमीत के साथ वैवाहिक बन्धन में बंध गए। इसके लिए दोनों परिवार उत्साहित थे। विवाह में पूरे नगरवासियो ने पूरी तरह सहयोग किया।

बेटी के लिए अच्छे वर की तलाश थी, नुरजहाँ
सीमा की माँ नूरजहां खान ने इस प्रतिनिधि के सामने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उन्होंने सीमा को 7 वर्ष की उम्र में गोंद पुत्री बना कर अपनाया था। चूंकि यह लड़की किस धर्म की थी उस समय पता नही था। लिहाज हिन्दू एवम मुस्लिम धर्म मे चलने वाला प्रचलित नाम सीमा ही इसका नाम रखा गया। समय के साथ जब सीमा बड़ी हुई तब उन्हें इसकी शादी की चिंता हुई।

इस बीच वे स्वयम मुम्बई में ही बस गयी। वहां भी नूरजहां ने सीमा को अपने साथ रखा और उसके लिए कोई अच्छा लड़का तलाशने लगी। कोई दो साल के बाद पिथोरा के उनके एक परिचित ने उन्हें फोन पर पिथोरा के गुरुदयाल सिंह सलूजा परिवार के एक दिव्यांग युवक हरमीत सिंह सलूजा के बारे में जानकारी दी। जानकारी मिलते ही नूरजहां स्वयम पिथौरा आयी और लड़के का काम आदत व्यवहार देख कर उससे सीमा को मिलवाया। सीमा एवम हरमीत ने एक दूसरे से बात की और दोनो के बीच शादी के लिए सहमति बन गयी। इसके बाद नूरजहां ने आपने परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी और विवाह की तिथि तय कर शादी भी कर दी गयी। इस शादी में ना किसी ने उन्हें मना किया और ना ही किसी ने कोई आपत्ति ही की।

धर्म कोई भी हो इंसान तो है…सुरेंद्र
दूसरी ओर हरमीत के चाचा ने इस प्रतिनिधि को बताया कि उनके परिवार ने इस शादी में धर्म को दरकिनार कर इंसानियत को महत्व दिया। इस विवाह में सिक्ख समाज का भरपूर सहयोग मिला है।

सिक्ख रीति रिवाज से हुई शादी
हरमीत एवम सीमा की शादी सिक्ख समाज के रीति रिवाज से सम्पन्न हुई।स्थानीय गुरुद्वारा में चार फेरो के साथ वे वैवाहिक बन्धन में बंध गए।सीमा की माँ नूरजहां ने बताया कि अब शादी के बाद वर वधु जिस धर्म को मानना चाहे इसके लिए वे स्वतन्त्र है।कार्यक्रम में सैकड़ो सिक्ख ,मुस्लिम सहित अन्य धर्म के लोग भी पूरे कार्यक्रम में उपस्थित रह कर वर वधु को आशीर्वाद दिया।

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