जंगली जानवरों को आखिर शहरों–बस्तियों में क्यों दाखिल होना पड़ रहा ?

रजिंदर खनूजा| महासमुन्द इलाके  में इन दिनों जंगली जानवरों के शहरों–बस्तियों में दाखिल होने, और हमले, उनके ग्रामो में घुसकर फसल चौपट करने सहित वन्य प्राणियों के शिकार एवम दुर्घटना से होने वाली मौतें लगातार सुर्खियों में है।जिन प्राणियों को जंगल में आराम से गुजर बसर करना चाहिए आखिर उन्हें शहर की ओर क्यों भागना पड़ा रहा है। इन वन्य प्राणियों को अपना हिंसक रूप क्यों दिखाना पड़ रहा है ? इस पर शासन एवम सम्बंधित विभाग को विचार करना चाहिए परन्तु घटना के बाद उसका मुआवजा दे कर ही मामले कि इतिश्री कर रहे हैं|

अभी कोरोना संकट के बाद से लगातार वन्य प्राणियों की ख़बरें सुर्खियों में है।इन सुर्खियों को देखे तो अकेले सिरपुर क्षेत्र में ही एक हाथी के हमले से मौत की घटना मिलाकर हाथियों द्वारा फसल नुकसान के दर्जन भर से अधिक मामले घटित हुये है।

वनो का सबसे सुंदर प्राणी तेंदुआ के हमले की जानकारी अक्सर मिलती थी परन्तु अब तेंदुआ के शिकार एवम दुर्घटना में मौत की ख़बरें सुर्खियों में है। विगत दो माह में जिले के पिथौरा वन क्षेत्र में एक तेंदुआ की दुर्घटना से मौत एवम बागबाहरा क्षेत्र में दो तेन्दुवों की शिकार से मौत की घटनाएं वन विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

बलोदा बाजार के कोठारी जंगल में मृत मिले तेंदुए की लड़ाई से हुई थी मौत
महासमुंद जिले से सटे बलोदा बाजार जिले के बलोदा बाजार वन मंडल के कोठारी वन परिक्षेत्र में एक तेंदुआ मृत पाया गया था

हिंसक वन्य प्राणियों का हमला

क्षेत्र में हिंसक वन्य प्राणी भालू एवम हाथियों के लगातार हमले हो रहे है।वन्य प्राणियों के हमलों के मामले में सबसे आगे बलौदाबाजार जिला है।इस जिले के बार, देबपुर , कोठारी , सोनाखान सहित वन क्षेत्रों में प्रतिदिन वन्य प्राणी ग्रामो में पहुच रहे है।

वैसे तो प्रतिवर्ष वन्य प्राणी गर्मी के मौसम में पानी की तलाश करते ग्राम के मुहाने तक पहुँच ही जाते थे परन्तु इस वर्ष इनकी संख्या में खासी वृद्धि दर्ज की गई है।इस वर्ष देबपुर वन क्षेत्र में बायसन का हमला करना भी अपने आप मे एक आश्चर्य है।क्योंकि आमतौर पर बायसन हमला नहीं करते।

देवपुर के जंगल से वन्य प्राणियों के मांस शहरों में भेजे जा रहे
फाइल फोटो

देवपुर क्षेत्र बना मांस विक्रय मंडी

पूरे प्रदेश में वर्तमान में सबसे चर्चित बलौदाबाजार वन मंडल का देवपुर वन परिक्षेत्र बताया जा रहा है।इस परिक्षेत्र के कोई आधा दर्जन वन ग्राम एवम सोनाखान ,बारनवापारा वन क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक ग्राम के आदतन शिकारी अब खुलेआम शिकार करने के साथ अब इन वन्य प्राणियों के मांस का व्यवसाय भी करने लगे है। खासकर जंगली सुअर एवम चीतल साम्हर का मांस प्रदेश के बड़े शहरों के शौकीनों तक पहुँच रहा है। ग्रामीणों की मानें तो क्षेत्र के 3 से चार परिक्षेत्र में नए रेंजर आये है उसके बाद भी शिकार की घटनाओं में  वृद्धि हुई है|

शासन-प्रशासन दोनों उदासीन

जंगल की घटनाओं पर गौर करें तो है यह साफ है कि वन्य प्राणियों की हो रही मौतों एवम वन्य प्राणियों द्वारा किये जा रहे हमलों की जानकारी के बाद भी इनकी सुरक्षा एवम इन प्राणियों से जान माल की सुरक्षा के कोई उपाय होते नहीं दिख रहे| वन्य प्राणियों के मारे जाने पर उन्हें जलाने एवम वन्य प्राणियों से नुकसान का मुआवजा देने को ही शासन-प्रशासन अपना दायित्व मान रहा है|

किशनपुर में करंट से मादा हाथी की मौत की घटना चर्चा में रही है

जंगलों में जगह-जगह करंटयुक्त फंदा

इधर सूत्र बताते हैं कि महासमुन्द जिला एवम बलौदाबाजार जिले के अधिकांश क्षेत्रो में करंट प्रवाहित लोहे की तार का फंदा बना कर जंगल में लगाये गए है। (देखें विडियो) इन खतरनाक तार करंट दे जंगली सुअर  और साम्हर जैसे प्राणी को फंसाने के लिए लगाए गए है परन्तु इनमें अक्सर बायसन , भालू एवम हाथी जैसे विशालकाय प्राणी भी फंस कर मारे जाते हैं। बावजूद इसके वन अधिकारी एवम जिम्मेदार लोग इन तारो में शिकार फंसने के इन्तजार करते दिखते है। विभाग को इसकी जानकारी तभी होती है जब इसमें फंस कर कोई निर्दोष वन्य प्राणी मारा जाता है।