छत्तीसगढ़ : सड़क दुर्घटना में दम तोड़ गई 4959 जिंदगी

13772 सड़क दुर्घटनाओं में 4959 व्यक्त्यिों की गई जान

रायपुर। प्रदेश में लगातार सड़क हादसों को रोकने के लिए जन-जागरूखता और यातायात नियमों के पालन को लेकर जनता के बीच सरकारी अमला पहुँचता है। बावजूद उसके इन अभियानों का कुछ ख़ासा असर सूबे की जनता पर दिखाई नहीं पड़ रहा है। हालाँकि कुछ जिलों में सड़क हादसों में कमी आई है। लेकिन मौत का आकड़ा पिछली बार से कुछ सैकड़े में ही कम रहा। साल 2019 के सड़क हादसों पर अगर नज़र डाली जाए तो राज्य भर में कुल 13772 सड़क दुर्घटना हुई है। इन हादसों में 4959 व्यक्त्यिों की मृत्यु हुई है, वहीं 13369 व्यक्ति गंभीर घायल / घायल हुए है। हालाँकि साल 2018 के आंकड़ों की अपेक्षा साल 2019 में धमतरी, दुर्ग, कबीरधाम, मुंगेली, जांजगीर, सरगुजा, कांकेर, कोण्डागांव में सड़क दुर्घटना में होने वाली मृत्यु दर में कमी आई है। इसके ठीक उलट दीगर जिलों में सड़क दुर्घटना मृत्युदर में वृद्धि हुई है। छत्तीसगढ़ राज्य में प्रारंभिक आकड़ों के अनुसार दुर्घटनाओं में 0.7 प्रतिशत कमी दिखी है, लेकिन इन सड़क हादसों में 8 फीसदी तक मरने वालों की संख्या बढ़ी है। वहीं घायलों की संख्या में भी 5.1 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है। सूबे में साल 2019 में 150 नये ब्लैक स्पॉट भी यातायात विभाग ने चिन्हित किए है।

करोडो खर्च फिर भी बेअसर
यातायात में सुधार लाने के लिए प्रदेश भर में जन जागरूखता के नाम पर करोड़ो रुपए फूंके गए है। होर्डिंग, विज्ञापन, सोशल प्लेटफॉर्म में शार्ट फिल्म, पेज, ऑडियों क्लिप, नुक्कड़ नाटक जैसे तमाम तरह के उपाए का भरपूर इस्तमाल किया गया। इनके इस्तमाल में विभाग ने लाखों करोडो खर्च किए पर जनता के बीच सटीक सन्देश नहीं दे पाए।

2020 में इन मसलों पर होगा फ़ोकस
सहायक पुलिस महानिरीक्षक(यातायात) संजय शर्मा ने इस मामलें में चर्चा करते हुए कहा कि साल 2020 में सड़क दुर्घटनाओं में और कमी लाने हम कुछ ख़ास मसलों पर फ़ोकस होकर काम कर रहे है। उन्होंने बताया कि नवीन ग्रे / ब्लैक स्पॉट, सुधारात्मक उपाय, ओव्हर लोडिंग, स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर, जनजागरूकता अभियान, गुड सेमेरिटन, व्यावसायिक / आद्यौगिक क्षेत्रों में वाहन चालकों का स्वास्थ्य /नेत्र परीक्षण, सड़क सुरक्षा सामग्रियों का प्रबंध एवं उपयोग कर सड़क दुर्घटना में कमी लाने के प्रयास किए जाएंगे।