एंबुलेंस टू डोरस्टेप्स के लिए फिर छाए आईएएस अवनीश शरण

मशहूर वेब साईट "द बेटर इंडिया" ने टॉप टेन की सूची में किया शामिल

रायपुर। काफी लंबे समय तक मेडिकल इमरजेंसी के समय में नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचना भी इस जिले में पहाड़ चढ़ने जैसा हुआ करता था। सूबे के कबीरधाम जिले में बैगा और गोंड आदिवासी समुदायों के लिए ये किसी एक चुनौती से कम नहीं था। इस इलाकें की भौगोलिक बाधाओं ने इसे और भी मुश्किल बना दिया और कई दफ़े तो सरकार की एंबुलेंस गंभीर स्तिथियों में उन गांवों तक पहुंच भी नहीं पति थी जब उन्हें सबसे ज़्यादा जरुरत होती थी। इसके इतर इन जनजातियों के सामने स्वास्थ्य सेवाओं और निजी वाहनों की क़ीमत चुकाने की क्षमता भी नहीं थी, ये समस्याएं मानों इन समुदायों के लिए लगभग असंभव सी हो चली थीं।


साल अप्रैल 2018 में IAS अवनीश शरण ने कबीरधाम में बतौर जिला कलेक्टर अपनी जिम्मेदारी सम्हाली और इस दिशा में एक महत्वपूर्ण काम शुरू किया। शरण ने इन क्षेत्रों के लिए “साथी एक्सप्रेस” शुरू की। ये एक बाइक एम्बुलेंस की श्रृंखला है, जिससे उक्त क्षत्रों में रहने वाले लोगों के खर्च में 90 प्रतिशत की कटौती की है और जिले में अब तक 4,868 से अधिक लोगों को त्वरित अस्पताल तक पहुंचने में सफलता पाई है। और इस काम के लिए आज अवनीश शरण एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। देश की नामचीन वेबसाईट ने 10 ऐसे अफसरों के नाम चुने है जिन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ हट कर काम किया है। उनके इन प्रयासों से साल 2019 में उन्हें ये मुकाम हासिल हुआ है।

रोजगार भी दे रही “साथी एक्सप्रेस”
ये सेवाएं स्थानीय लोगों को आजीविका भी प्रदान करती हैं क्योंकि स्थानीय ग्रामीणों को ही इस बाइक एम्बुलेंस को चलाने के लिए नियुक्त किया जाता है। स्थानीय होने की वज़ह से ये ड्राइवर आपात स्थिति के दौरान सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने के लिए सबसे तेज़ और सबसे छोटा रास्ते का इस्तमाल भी कास लेते है।

फ्री ऑफ़ कॉस्ट मिलती है सुविधा
इस एम्बुलेंस का इस्तमाल गाँव में आशा कार्यकर्ता से संपर्क करके किया जा सकता है। फ्री-ऑफ-कॉस्ट मोटरबाइक एम्बुलेंस कॉल के बाद लाभार्थी के घर तक पहुँचती है, इसलिए उन्हें निजी वाहनों के लिए भुगतान करने की लागत वहन नहीं करनी होगी। एम्बुलेंस में लाभार्थी एक परिचर (आमतौर पर रिश्तेदार), आशा कार्यकर्ता और ड्राइवर होते है। एम्बुलेंस प्राथमिक चिकित्सा आपूर्ति और सुरक्षात्मक हेलमेट से भी सुसज्जित है और रोगी को उपचार के लिए निकटतम स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाती है। इलाज करने के बाद रोगी को उसी एम्बुलेंस में ही उनके घर तक भी ले जाया जाता है।