इस बार की समाधि में आखिरकार गई जान…

पांच बार पहले भी समाधि ले चुका था युवक

रायपुर। समाधि साधना के जूनून ने आखिर इस युवक की जान ले ली। पांच दिनों तक समाधि लेने के बाद जब उसे निकाला गया तो जान नहीं थी। घटना महासमुंद जिले के गांव पचरी की है। जहां जिला प्रशासन ने आत्महत्या रोकने नवजीवन कार्यक्रम चला रखा है। महासमुंद जिले में आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों से चिंतित जिला प्रशासन ने 10 जून 2019 को राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत नवाचार करते हुए नवजीवन कार्यक्रम प्रारंभ किया है।

इस संबंध में एसपी जितेन्द्र शुक्ला का कहना था कि उन्होंने युवक को इस तरह का कदम उठाने से रोका था लेकिन वह जिद पर था। चूंकि मामला आस्था से भी जुड़ा था इसलिए ग्रामीणों को समझाया भी गया था कि ऐसा करने से रोंके। सख्ती बरतने से माहैल खराब हो सकता था और निकाय चुनाव भी थे जिसके कारण सख्ती नहीं बरती गई। वे खुद कल गांव जाएंगे। कार्रवाई करेंगे लेकिन यह भी ध्यान रखेंगे कि तनाव पैदा न हो और न ही माहौल बिगड़े।


बताया जाता है चमन नामक यह युवक पांच साल से इस तरह की समाधि ले रहा था। पहली बार 2015 में 24 घंटे की समाधि ली। इसके बाद 48 घंटा, फिर 72 घंटा, चौथे साल 96 घंटा की समाधि ली थी। चार बार बेहोशी की हालत में गड्ढे से जिंदा बच निकला, पर पांचवी बार 108 घंटे की समाधि पर चार फुट गहरे गड्ढे में जा बैठा, फिर वापस जिंदा नहीं लौटा।

वायरल हो रहा है वीडियों
समाधि लेने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल भी हो रहा है। जिसके अनुसार 16 दिसंबर की सुबह आठ बजे समाधि लगाया था। पांच दिन बाद 20 दिसंबर की दोपहर जब उसे समाधि से बाहर निकाला तो बेहोश था। उसे अस्पताल में ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि चमनदास जोशी नामक इस 30 वर्षीय युवक ने जब वर्ष-2015 में पहली बार समाधि ले रहा था पुलिस ने मौके पर जाकर इसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। उसने आस्था से जोड़ते हुए बाबा गुरूघासीदास की प्रेरणा बताकर इसे धार्मिक रंग दे दिया।

साल 2015 में पहली दफा ली थी समाधि
18 दिसंबर 2015 को जब पहली बार समाधि लिया तो 24 घंटे बाद बेहोशी की हालत में सकुशल निकल आया। तब दो से तीन फुट गहरे गड्ढे में समाधि ली थी। अगले साल 18 दिसंबर 2016 को गड्ढे की गहराई बढ़ाने के साथ ही समय भी बढ़ा दी। 48 घंटे की समाधि लिया। फिर 18 दिसंबर 2017 को 72 घंटा, 18 दिसंबर 2018 को 96 घंटे की समाधि ली। इस बार करीब सौ घंटे बाद 20 दिसंबर को दोपहर 12 बजे जब समाधि से बाहर निकाला गया तो शरीर अकड़ गया था। सांसें थम गई थीं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। जहां उसके भक्तों ने उसी समाधि वाले गड्ढे में दफना कर अंतिम संस्कार किया। ग्रामीणों के मुताबिक चमन ने शादी नहीं की थी। वह अकेला रहता था। बीते कुछ वर्षों से सतनाम संदेश का प्रवर्तक के रूप में तप, साधना करते रहता था। इससे उनके कुछ भक्त भी बन गए थे। घर के पास ही स्थित निजी खलिहान में वह समाधि लगाता था।