मकर संक्राति : गदर्भ वाहन पर विराजमान, जानें किसे क्या करना है दान…

15 जनवरी को देशभर में मनाई जाएगी मकर संक्रांति

रायपुर। सूर्य के धनु राशि से निकल कर मकर राशि में प्रवेश करने पर हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार दक्षिणायन को नकारात्मकता और उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। मकर संक्राति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना का विशेष महत्त्व होता है।

महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में 14 जनवरी 2020 को मध्य रात्रि 2:06 सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा। एक राशि से दूसरे राशि में प्रवेश और सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने की पूरी प्रक्रिया को ही मकर संक्रांति कहा जाता है। इस साल संक्रांति का पुण्य काल को 15 जनवरी को दिनभर मनाया जाएगा। संक्रांति पर्व में स्नान दान का बहुत अधिक महत्व बताया गया है।

                                    वायु पुराण, विष्णु धर्मसूत्र, बंग गर्ग, गालव गौतम, बुद्ध वशिष्ठ, आदि ऋषि मुनियों के अनुसार…

“विवाह, व्रत, संक्रांति, प्रतिष्ठा, ऋतू, जन्मसू।
तथोपरागपातादौ स्नाने दाने निशा शुभ।”

इसका मतलब है विवाह, व्रत, संक्रांति, प्रतिष्ठा, ऋतु, स्नान, संतान, जन्म तथा सूर्य और चंद्र ग्रहण आदि के निमित्त रात्रि आदि का विचार ना करके किसी भी समय स्नान करना चाहिए।

गदर्भ की सवारी है संक्रांति की –
पंडित मनोज शुक्ला ने बताया कि 14 जनवरी को संक्रांति ‘गर्दभ’ पर सवार होकर आ रही है। संक्रांति का उपवाहन मेष है। संक्रांति गर्दभ पर सवार होकर पीला वस्त्र धारण किये हुए , कांसे के पात्र में पकवान का भक्षण करते हुए , पश्चिम दिशा की ओर जाएगी। शस्त्र के रूप में डंडा लिये हुए रहेंगे।
14 जनवरी को मध्य रात्रि 2:06 बजे सूर्य देव धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य का राशि परिवर्तन सूर्यास्त के बाद होगा। इसके चलते पुण्यकाल 15 जनवरी को सुबह श्रेष्ठ रहेगा।

राशि अनुसार क्या करें दान
1. मेष- जल में पीले पुष्प, हल्दी, तिल मिलाकर अर्घ्य दें। तिल-गुड़ का दान दें। उच्च पद की प्राप्ति होगी।

2. वृषभ- जल में सफेद चंदन, दुग्ध, श्वेत पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। बड़ी जवाबदारी मिलने तथा महत्वपूर्ण योजनाएं प्रारंभ होने के योग बनेगें।

3. मिथुन- जल में तिल, दूर्वा तथा पुष्प मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गाय को हरा चारा दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दें। ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी।

4. कर्क- जल में दुग्ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चावल-मिश्री-तिल का दान दें। कलह-संघर्ष, व्यवधानों पर विराम लगेगा।

5. सिंह- जल में कुमकुम तथा रक्त पुष्प, तिल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। तिल, गुड़, गेहूं, सोना दान दें। किसी बड़ी उपलब्धि की प्राप्ति होगी।

6. कन्या- जल में तिल, दूर्वा, पुष्प डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। मूंग की दाल की खिचड़ी दान दें। गाय को चारा दें। शुभ समाचार मिलेगा।

7. तुला- सफेद चंदन, दुग्‍ध, चावल, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चावल का दान दें। व्यवसाय में बाहरी संबंधों से लाभ तथा शत्रु अनुकूल होंगे।

8. वृश्चिक- जल में कुमकुम, रक्तपुष्प तथा तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गुड़ का दान दें। विदेशी कार्यों से लाभ तथा विदेश यात्रा होगी।

9. धनु- जल में हल्दी, केसर, पीले पुष्प तथा मिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। चहुंओर विजय होगी।

10. मकर- जल में काले-नीले पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। गरीब-अपंगों को भोजन दान दें। अधिकार प्राप्ति होगी।

11. कुंभ- जल में नीले-काले पुष्प, काले उड़द, सरसों का तेल-तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। तेल-तिल का दान दें। विरोधी परास्त होंगे। भेंट मिलेगी।

12. मीन- हल्दी, केसर, पीत पुष्प, तिल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। सरसों, केसर का दान दें। सम्मान, यश बढ़ेगा।