दस साल बाद मदनवाड़ा नक्सली हमले की जाँच के लिए बनी कमेटी

12 जुलाई 2009 में राजनांदगांव में शहीद हुए थे 29 पुलिसकर्मी

रायपुर। प्रदेश के अब तक के सबसे बड़े नक्सल हमले में से एक की फाइल सरकार फिर खोल रही है। मदनवाड़ा इलाके में हुए नक्सली हमले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक जांच आयोग का गठन किया है। तक़रीबन 10 साल बीतने के बाद मदनवाड़ा में हुए नक्सली तांडव की जांच के लिए ये आयोग बनाया गया है। राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में 12 जुलाई 2009 में माओवादियों ने बड़ा नरसंहार किया था। इस हमले में नांदगांव के तत्कालीन एसपी विनोद कुमार चौबे सहित कुल 29 पुलिसकर्मियों को वीरगति मिली थी। प्रदेश का यह पहला ऐसा मामला था जिसमें बड़ी संख्या में एसपी रैंक के अधिकारी समेत बड़ी संख्या में नरसंहार हुआ था। इस हमलें को तक़रीबन 10 साल से ज़्यादा समय गुजर जाने के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच के लिए एक आयोग का गठन किया है। इस आयोग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज न्यायमूर्ति शंभू नाथ श्रीवास्तव को अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा अन्य सदस्यों को भी इस जांच आयोग में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह जांच कमेटी अगले 6 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। गौरतलब है कि न्यायमूर्ति श्रीवास्तव छत्तीसगढ़ के लोकायुक्त भी रह चुके है।

इन बिंदुओं पर होगी जाँच
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक यह जांच आयोग घटना को घटित होने से बचाए जाना, सुरक्षा की निर्धारित प्रक्रियाओं और निर्देशों का पालन, किन परिस्थितियों में एसपी और अन्य सुरक्षा बलों को उस अभियान में भेजा गया, एसपी और जवानों के एंबुश में फसने पर क्या अतिरिक्त बल उपलब्ध कराया गया, मुठभेड़ में माओवादियों के नुकसान उनके मरने और घायल होने की जांच, सुरक्षा बल के जवानों कि किन परिस्थितियों में घायल हुए, घटना से पहले और उसके दौरान और उसके बाद के मुद्दे जो उस हमले से संबंधित हो और राज्य पुलिस केंद्रीय पुलिस के बीच समुचित समन्वय था कि नहीं, ऐसे तमाम बिंदुओं पर यह आयोग जांच कर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।