बारूदी सुरंग पर नक्सली बिछा रहे “जानवरों का मांस”


रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने आईईडी और बारूदी सुरंग को सुरक्षा बालों से बचाने के लिए नया तरीका धुंध निकाला है। नक्सली अब आईडी और बारूदी सुरंग के ऊपर जानवरों का मांस लगा रहे हैं, जिसकी बदबू से सुरक्षा बलों के स्निफर डॉग्स भटक जाएं।
दरअसल लगातार हुई घटनाओं के बाद बस्तर में रोजाना पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान अपने स्निफर डॉग्स के जरिए आईईडी और बारूदी सुरंग की तलाश में हैं। कई मौकों में उन्हें सफ़लता भी मिलती है, इससे नक्सलियों के अरमानों पर पानी फिर जाता है। यही नहीं इसके चलते नक्सलियों का विस्फोटक सामग्री का जखीरा भी घटते जा रहा है। हालांकि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने नक्सलियों के इस तरकीब का भी तोड़ निकाल लिया है। वे सधे हुए कदमों से जंगल के भीतर अपने कदम बढ़ा रहे हैं। पहले की तरह आईईडी अब भी निकल रही हैं, लेकिन सुरक्षा बलों के जवान और स्निफर डॉग्स कहीं ज्यादा सजग हो गए हैं। बस्तर रेंज के डीआईजी के मुताबिक नक्सलियों के इस नुस्खे की तोड़ सुरक्षा बलों ने ढूंढ निकाली है। उनके मुताबिक सुरक्षा बलों की सक्रियता और चाक चौकस चहलकदमी से नक्सलियों के पास मौजूद विस्फोटक सामग्री काफी घट गयी है। लिहाज़ा बस्तर में पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों ने नक्सलियों की बदली हुई रणनीति और कवायद पर अपनी पूरी निगाह गड़ा दी है। अब सुरक्षा बलों के जवान पहले से कहीं ज्यादा सतर्क और चाक चौकस हो गए हैं। स्निफर डॉग्स ही नहीं बल्कि जवानों के कदम बेहद सधे हुए हैं, जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए उन्होंने बदली हुई रणनीति के तहत खुद को भी ढाल लिया है।

आदमी ही नहीं जानवर भी मार रहे नक्सली
बस्तर में जंगल के भीतर नक्सलियों ने अब मूकबधिर जानवरों को भी मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है। जंगल के कई हिस्सों में जंगली जानवरों से लेकर घर में पाले जाने वाले मवेशियों के सड़े गले शव सुरक्षा बलों को अक्सर जगह-जगह दिखाई देने लगे हैं। आमतौर पर इसके पहले ग्रामीण अपने मवेशियों के शवों को जमीन में दफन कर दिया करते थे, लेकिन अब नक्सली और उनके सहयोगी सूचना मिलते ही पालतू जानवरों के शवों को अपने साथ ले जा रहे हैं। फिर उस शव से मांस निकाल कर उसे छोटी बड़ी आईईडी में लेप कर दिया जाता है।

पारम्परिक तीर से ज़्यादा घटक रैम्बो
नक्सलियों ने रैम्बो ऐरो और पारंपरिक तीर को और घातक बनाने का काम भी किया है। उन्होंने अब उसमें पटाखों में इस्तेमाल होने वाली बारूद को तीर के सामने के हिस्से में लगाना शुरू कर दिया है। इसे जला कर छोड़ा गया तीर आतिशबाजी की तरह आवाज करता है। मुठभेड़ स्थल में इससे होने वाली आवाज और धुएं से पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान कुछ देर के लिए अचंभित हो जाते हैं। उन्हें एक साथ छोड़े गए तीर से किसी बड़े विस्फोट का आभास होता है। इसके पहले तक वे औद्योगिक उपयोग में आने वाले विस्फोटकों का उपयोग करते थे।

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