बस्तर की जेलों में बंद आदिवासी जल्द होंगे रिहा,सीएम भूपेश का आश्वासन

सीएम भूपेश से मिला मंत्री कवासी के साथ प्रतिनिधि मंडल

रायपुर | बस्तर से आदिवासी नेताओं का एक दल गुरुवार को प्रदेश के मुखिया से मिलने मुख्यमंत्री निवास पहुंचा था। जहाँ उद्योग मंत्री कवासी लखमा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की। बस्तर से आए प्रतिनिधिमंडल में विधायक देवती कर्मा, विक्रम मंडावी, चंदन कश्यप, सोनी सोरी और समाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया सहित सरपंच और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की और बस्तर संभाग के जेलों में बंद आदिवासियों को जल्द से जल्द रिहा कराने पर चर्चा की।

                                               उल्लेखनीय है कि विधानसभ चुनाव 2018 के पहले विपक्ष में रहते कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में बस्तर के जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने की बात की थी। वहीँ कांग्रेस ने सत्ता में आते ही आदिवासियों के रिहाई के लिए एक पटनायक कमेटी का गठन किया है। कमेटी में आदिवासी नेताओं के अलावा सुप्रीम कोर्ट के सदस्यों को शामिल किया गया है और उनकी निगरानी में कमेटी के कार्यों की समीक्षा की जा रही है। हालाँकि प्रदेश हुए चुनाव के कारण कमिटी ने अब तक रिपोर्ट सौप नहीं पाया है।

बस्तर के ग्रामीण हुए लामबंद
इधर पिछले महिने दंतेवाडत्रा चुनाव से पहले पूर्व बस्तर की जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए बड़े स्तर पर पालनार गांव में आंदोलन की शुरूआत की थी। आम आदमी पार्टी के नेता और समाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी की अगुवाई में हजारों ग्रामीण और सरपंचों ने दंतेवाड़ा में आंदोलन भी किया था। आदिवासियों के आंदोलन की आवाज बुलंद होता देख कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने इनसे कहा था कि वे अब सिधे सीएम से इस सबंध मे बात कर रास्ता निकालेंगे। यही कारण है कि सीएम हाउस में इन आदिवासियों को लेकर मंत्री खुद ही पहुंचे थे।

दो चरणों में होगी रिहाई
आदिवासियों के रिहाई के लिए बनाई गई कमेटी और डीजीपी सहित संबंधित अधिकारियों की बैठक की गई है। अवैध शराब कारोबार के नाम पर बस्तर के जेलो में बंद लगभग 300 आदिवासियों को रिहा किया जाएगा। उद्योग मंत्री लखमा ने बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने के बाद नक्सल के नाम पर बंद निर्दोष आदिवासियों को दो चरणों में रिहा किया जाएगा। इसमें कम धारा के तहत जेल बंद आदिवासियों को पहले उसके बाद बड़ी धाराओं के तहत बंद आदिवासियों को रिहा किया जाना है। मंत्री लखमा ने निर्दोष आदिवासियों को जेल में बंद किये जाने का ठीकरा पूर्ववर्ती सरकार यानी रमन सरकार पर फोड़ा है। कवासी का आरोप है की शराब कारोबारियों के साथ ही जंगल में लकड़ी काटने गए निर्दोष लोगो पर चाबुक चलाया गया और उन्हें बिना कारण जेलों में ठूंस दिया गया। जिसके चलते आज भी ये आदिवासी परिवार अपने परिजनों की वापसी का बात जोह रहे हैं। अब सीएम भूपेश बघेल ने इस और संज्ञान लिया है निर्दोष आदिवासी जल्द ही जेलों से रिहा होकर घर लौटेंगे।

भाजपा का भूपेश सरकार पर आरोप
बेगुनाह बंदी आदिवासियों को जेल से जल्द रिहा कराने वाले बात पर भाजपा के प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने का सीधे तौर पर कहना है कि यदि सरकार को लगता है कि आदिवासी बेगुनाह है तो उन्हें जल्द से जल्द रिहा कर देना चाहिए। उपासने ने यहां तक कहा कि यह पूरा मामला कोर्ट में लंबित है ऐसे में लगता है कि सरकार और जिम्मेदार मंत्री को कोर्ट पर भी भरोसा नहीं है,इसलिए इस तरह के अनर्गल आरोप पिछले सरकार पर लगातार देती आ रही है। रमन सरकार ने आदिवासियों को अवैध नक्सली करार कभी नहीं दिया। आज की सरकार नक्सलियों को बढ़ावा दे रही है। अब कांग्रेस राज में नक्सली खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता वर्तमान सरकार के छलावे को जान चुकी है। जो कमिटी सरकार ने बनाई है वो 10 महीनो में भी अपनी रिपोर्ट का नहीं सौंप सका।