छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर रहा भिलाई और दुर्ग,दूसरे में रायपुर

दिवाली की पटाखों ने किया देश सहित छत्तीसगढ़ का वायु प्रदूषित

रायपुर | दीपावली का त्यौहार यूं तो हर्षोल्लास के साथ और बड़े ही धूमधाम से पूरे देश भर में मनाया गया। पटाखों की ताबड़तोड़ आवाज ने कुछ लोगों को जहां विचलित किया तो इससे आम जनता ने आनंद भी उठाया। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर गाइडलाइन को धता भी बताया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले ही साल ग्रीन पटाखे फोड़े जाने पर सहमति जताई थी। जो इस साल भी नियम यथावत थे। आतिशबाजी के लिए कुछ नियम शर्ते भी लागू की थी, जिसमें केवल कम प्रदूषण करने वाले पटाखे बेचने की अनुमति दी गई थी। यहां तक कि एक तय समय सीमा में तय किए गए क्षेत्र में ही इसे बेचे जाने का निर्देश भी दिया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार दीपावली की रात 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक ही पटाखे फोड़े जा सकते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की अवहेलना करते हुए पूरे देश में जमकर आतिशबाजी की गई। यहां तक की कानफोड़ू पटाखों ने लोगों को विचलित भी किया। इसी के साथ-साथ यदि देखा जाए तो एयर क्वालिटी इंडेक्स में प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है। पटाखों के चलते देशभर के अलग-अलग हिस्सों में वायु प्रदूषण देखा गया है।

दिल्ली की वायु में घुला प्रदुषण
ऐसे तो दीपावली का पर्व धनतेरस से लेकर भाई दूज तक यानी 5 दिनों का होता है। इन 5 दिनों में लगभग 10 हजार करोड़ के पटाखे मुख्यतः शिवकाशी के पटाखा बाजार से बिका है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि देश के सबसे बड़े पटाखा बाजार शिवकाशी से ही इतने पटाखे बिके हैं, तो पूरे देश भर में आतिशबाजी से हुए वायु प्रदूषण का क्या हाल हो सकता है। यदि हम देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां रात में पटाखे बैन होने के बावजूद भी बड़ी मात्रा में पटाखों के जलने से दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। यानी कि दिल्ली और एनसीआर की हवा काफी जहरीली हो चुकी है। AQI यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स में दिल्ली का आंकड़ा 306 पर पहुंच गया है, जो बेहद खराब स्तर का माना जाता है। इससे पूरा वातावरण बारूद की गंध से दूषित हो चुकी है और हवा में धूल के कण भी बढ़ गए हैं। इससे आसपास के रहने वालों को रात में सांस लेने तक की परेशानी भी हो रही है।

छत्तीसगढ़ में वायु प्रदूषण से अछूता नहीं
यही कमोबेश हालात छत्तीसगढ़ में भी सभी जिलों में दीपावली मैं जलाए गए पटाखों से वायु प्रदूषित होता नजर आया है। पटाखों के फूटने के बाद उठने वाले गुबार से आम इंसान ही नहीं बल्कि जीव जंतु को भी इससे काफी खतरा होता है। यह प्रदूषण इतनी खतरनाक स्तर पर पहुंच जाते हैं जिसमें लोगों को सांस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। छत्तीसगढ़ में एयर क्वालिटी इंडेक्स में वायु प्रदूषण का स्तर जिलेवार यदि देखा जाए तो सबसे ज्यादा असर भिलाई और दुर्ग जिले में रहा। यहां इसका स्तर 186 रहा। इसके ठीक बाद प्रदेश की राजधानी रायपुर में AQI 180 दिखाई दी। यानी कि पूरे छत्तीसगढ़ में भिलाई सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा और दूसरे स्थान पर रायपुर रहा। वहीं तीसरे स्थान की बात की जाए तो राजनादगांव में AQI 172 मापा गया है।

छत्तीसगढ़ के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों का AQI

      शहर                AQI

भिलाई               186
• दुर्ग                    186
• रायपुर               180
• राजनांदगांव       172
• महासमुंद           165
• रायगढ़              160
• भाटापारा           158
• धमतरी             155
• बिलासपुर          147
• कोरबा               142

कचरे से अटा पड़ा है शहर
5 दिनों तक चले दिवाली में पटाखों की बौछार तो ऐसे हुई जिससे पूरा बाजार तो सुना हो गया लेकिन आसपास के क्षेत्र में गंदगी का सैलाब बढ़ चुका है। रोड से लेकर गलियारों तक पटाखों के कचरे से अटा पड़ा हुआ है। इधर सफाई कर्मचारियों की छुट्टी होने के कारण माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों तक पूरे शहर का आलम कूड़े-कचरे के जैसा ही दिखेगा। जिसके लिए आम लोगों को खासी परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है।