छत्तीसगढ़ की कांति-भामेश्वरी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित

अदम्य साहस के लिए वीरता पुरस्कार-2019 से होंगी सम्मानित

रायपुर। भारतीय बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ की भामेश्वरी निर्मलकर और कांति सिंग को अदम्य साहस के लिए वीरता पुरस्कार-2019 से सम्मानित किया जाएगा। इन बच्चियों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद द्वारा अनुशंसा की गई थी। राजेंद्र निगम, प्रभारी एवं कार्यकारिणी सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य बाल कल्याण परिषद ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि धमतरी जिले की भामेश्वरी निर्मलकर और सरगुजा जिले की कांति सिंग ने अपनी सूझबूझ से न सिर्फ दूसरे की जान बचाई, बल्कि साहस का परिचय देकर अपने परिवार, राज्य और देश का नाम रौशन किया है।

धमतरी जिले के कानीडबरी गांव में रहने वाली 12 वर्षीया भामेश्वरी निर्मलकर पिता जगदीश निर्मलकर ने बहादुरी का परिचय देते हुए गांव की दो बालिकाओं को तालाब में डूबने से बचाया। घटना 17 अगस्त 2019 की है।। गांव की दो बालिकाएं सोनम और चांदनी स्कूल से छुट्टी होने के बाद गांव के तालाब में नहाने गई थीं। खेलते-खेलते वे दोनों अन्जाने में तालाब की गहराई में आगे बढ़ती गई और डूबने लगी। भामेश्वरी उस समय तालाब में कपड़ा धोने के लिए पहुंची थी। दोनों बच्चियों को तालाब में डूबते देखकर बिना इस बात की परवाह किए कि उसे तैरना तक नहीं आता है, उसने तालाब में छलांग लगा दी और किसी तरह वह दोनों लड़कियों को खींचकर बाहर ले आई। गांव की ही एक महिला की मदद से भामेश्वरी अचेत पड़ी उन बच्चियों की जान बचाने में सफल रही। घटना की जानकारी मिलने पर जिले के कलेक्टर ने राज्य वीरता पुरस्कार और राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए भामेश्वरी के नाम की अनुशंसा की। भारतीय बाल कल्याण परिषद, नई दिल्ली द्वारा भामे श्वरी को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित किए जाने पर पूरे गांव में खुशी का माहौल है।

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चयनित सरगुजा जिले के मोहनपुर गांव की रहने वाली 7 साल की बालिका कांति सिंग पिता विनोद सिंह ने अपनी जान की परवाह किये बगैर जंगली हाथियों के हमले से अपनी 3 साल की छोटी बहन की जान बचाई।

घटना 17 जुलाई, 2018की है। जंगली हाथियों के झुंड के अचानल गांव पहुंचने पर गांव वाले जान बचाने के लिए अपने घरों से निकल कर भागने लगे। हाथी खोराराम कंवर के घर को तोड़ते हुए उसकी बाड़ी तक पहुंच कर वहां मक्के की फसल को बर्बाद करने लगे। हाथियों के डर से पूरा परिवार बाहर भागने लगा, इस दौरान वे घर पर 3 साल की मासूम बच्ची को ले जाना भूल गए। बाद में उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, लेकिन किसी की हिम्मत घर वापस जाने की नहीं हो रही थी। ऐसे में कांति ने न आव देखा न ताव, बस घर की तरफ दौड़ लगा दी। कांति जंगली हाथियों के बगल से फुर्ती से निकलती हुई घर पहुंची और अपनी छोटी बहन को हाथियों की नजरों से बचते-बचाते उसे परिवार वालों तक पहुंचाने में सफल हो गई। कलेक्टर ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उसके नाम की अनुशंसा की। विदित हो कि पिछले वर्ष कांति को राज्य वीरता पुरस्कार 2018 से सम्मानित किया जा चुका है।

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