HC : रायपुर निगम के अफसर नहीं बता पाए कि कचरा कहां फेंक रहे

हाईकोर्ट ने पखवाड़े भर में मांगा जवाब

बिलासपुर|सरोना और भिलाई के बीच रायपुर नगर निगम द्वारा डम्प किये जा रहे कचरे के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।हाईकोर्ट में निगम के अधिकारी यह नहीं बता पाये कि कचरा कहां फेंका जा रहा है।  इसका जवाब देने के लिए हाईकोर्ट ने दो सप्ताह का समय दिया है।

सरोना के नागरिकों ने रायपुर नगर निगम द्वारा उनके कस्बे के पास खाली जमीन पर कचर डम्प किये जाने के खिलाफ जनहित याचिका दायर कर रखी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे न केवल राहगीरों को धूल, बदबू, धुएं का सामना करना पड़ रहा है बल्कि सरोनावासियों का भी जीना दूभर हो गया है। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस पी.आर. रामचंद्र मेनन व जस्टिस पी.पी.साहू की डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। नगर निगम रायपुर के अधिकारियों की ओर से दिये गये जवाब में यह नहीं बताया गया था कि कचरा कहां पर फेंका जा रहा है। इसका जवाब कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सरकार भी जवाब नहीं दे पाई
वहीं गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश देने के शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन करने के मामले में केन्द्र और राज्य शासन ने हाईकोर्ट में जवाब पेश नहीं किया। हाईकोर्ट ने चार सप्ताह बाद मामले को सुनवाई के लिए रखने कहा है, जिसके पहले शासन को जवाब देने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट में सी. भगवंत राव ने अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर रखी है। इसमें कहा गया है कि शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन करते हुए प्रदेश के निजी स्कूल निर्धन वर्ग के छात्र-छात्राओं को 15 फीसदी सीटों पर प्रवेश नहीं दे रहे हैं। साथ ही निम्न आय वर्ग के ऐसे लोग जिनकी आमदनी तीन लाख रुपये से कम हैं,चाहे वे शासकीय सेवक ही क्यों न हों, उनके बच्चों को भी प्रवेश दिये जाने का प्रावधान है। इस नियम का भी पालन स्कूलों में नही किया जा रहा है।

हाईकोर्ट में बच्चों ने भी उपस्थित होकर बताया कि उन्हें पात्र होते हुए भी निजी स्कूलों ने प्रवेश देने से मना कर दिया। इसे लेकर चीफ जस्टिस पी.आर. रामचंद्र मेनन और जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से जवाब देने के लिए और समय देने का आग्रह किया था।