युवा महोत्सव : सुआ और पंथी से जमा रंग, राज्यगीत पर भी प्रस्तुति

युवतियों के समूह ने भी प्रस्तुत किया पंथी नृत्य

रायपुर। राज्य स्तरीय युवा महोत्सव के दूसरे दिन साईंस कालेज परिसर के तीनों मंच में लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति देखने को मिली। युवा कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में सुआ नृत्य और पंथी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। नृत्यों के साथ प्रस्तुत किए गए लोकगीतों में युवा कलाकारों ने छत्तीसगढ़ शासन की प्रमुख योजनाओं को बड़ी खूबसूरती के साथ पिरोया, जिसे दर्शकों की भरपूर सराहना मिली।
मुख्य मंच में 27 जिलों के लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुति हुई। लोकनृत्य में बालोद जिला ने नरवा, गरवा योजना को जोड़कर गौरा गौरी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। बलौदाबाजार-भाटापारा ने राज्यगीत आरपा पैरी की धाऱ़ पर अपनी प्रस्तुति दी। हाय डारा लोर गे है, जैसे छत्तीसगढ़ी गीतों में भी कई जिलों ने अपनी प्रस्तुति दी। बस्तर जिले के धुरवा डंड़ारी लोकनृत्य ने अपने जोश और उल्लासपूर्ण नृत्य से लोगों को मंत्रमुंग्ध कर दिया। ग्राम देवी की अनुमति ले पूस-माघ माह में यह नृत्य ग्राम देवी के प्रति धन्यवाद अर्पित करने के लिए किया जाता है।

इसी प्रकार मुख्य मंच के समीप दूसरे मंच में छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय नृत्य सुआ नृत्य की प्रतियोगिता हुई। सुआ नृत्य में प्रदेश के 18 जिलों के प्रतिभागियों ने ऐसी प्रस्तुति दी कि दर्शक भी स्वयं को भी सुआ नृत्य के ताल-लय में समाहित महसूस करने लगे। सुआ नृत्य में बालोद, बीजापुर जिले ने नवा छत्तीसगढ़, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की थीम पर मनमोहक प्रस्तुति दी। छत्तीसगढ़ के चार चिंहारी नरवा, गरवा, घुरवा और बारी में भी गीत सजा कर प्रतिभागियों ने सुआ नाच की प्रस्तुति दी। राजनांदगांव के सुआ नृत्य दल के वाद्ययंत्रों के संगीत ने मंच में समा बांधा।

ओपन मंच में छत्तीसगढ़ राज्य के जोश उत्साह से भरे पंथी नृत्य में 14 जिलों के प्रतिभागियों ने भाग लिया। मांदर की ताल, सामूहिक रूप से कलाकरों के पैरों की लय, कलाकरों के जोश, और उनके करतबों ने, पिरामिड बनाकर सलामी की प्रस्तुति ने दर्शकों को सहसा अपनी ओर आकर्षित किया। पंथी नृत्य में लड़कियों के समूह के जोशीले प्रदर्शन ने दर्शकों की भीड़ जुटाने में मुख्य भूमिका निभाई।