राजनांदगाव:कलाकार मां ने कलाकार बेटे को इस तरह दी अंतिम विदाई

ऐखर का भरोसा चोला माटी के हे राम...

राजनांदगाव | हर मां की चाहत होती है कि उसका बेटा उसे कंधा दे उसकी अंतिम इच्छा पूरी करे। लेकिन जवान बेटे की मौत और उसकी अंतिम इच्छा पूरी करती मां को देख हर कोई रो पड़ा। हबीब तनवीर के नया थियेटर में नाटक चरणदास चोर में नायक रहे दीपक तिवारी की पत्नी पूनम तिवारी ने अपने बेटे को चोला माटी के हे राम –लोकगीत गाकर अंतिम विदाई दी। मां ने भी इस नाटक में भूमिका निभाई थी।

मिली जानकारी के मुताबिक सिहावा के पास चंदैनी गोंदा नामक छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम में सूरज तिवारी ने भाग लिया था। कुछ दिन से उसकी तबियत खराब थी। बताया जाता है कि भिलाई के एक अस्पताल में जांच करने के बाद चिकित्सकों ने ऑपरेशन करने की सलाह दी थी।                   परिजनों ने बताया कि पिता दीपक तिवारी और उनका कुनबा आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। राजनांदगांव के ममता नगर में निवासरत यह लोक कलाकार परिवार अरसे से आर्थिक समस्या से घिरा हुआ है। बेटे के असामायिक निधन ने परिवार को हिलाकर रख दिया है। सूरज एक अच्छे तबला वादक होने के साथ-साथ लोक संगीत का गहन जानकार था। इस बीच रंगकर्मी परिवार में हुई घटना के बाद आम लोगों ने राज्य सरकार से परिवार को आर्थिक संकट से उबारने की मांग की है। लोक कलाकारों की बदतर हालत से मौजूदा रंगकर्मियों ने भी भविष्य को लेकर चिंता जताई है।
उल्लेखनीय है कि हबीब तनवीर की बिटिया नगीना ने फिल्म पीपली लाइव में ‘चोला माटी के हे राम’ के लिए अपनी आवाज दी है। सोशल मीडिया पर वायरल इस अंतिम विदाई पर कई प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रंगकर्मी, पत्रकार, लेखक, केवल कृष्ण ने लिखा है- ये फिल्मी परदा नहीं है, न ही थियेटर है यह जिंदगी के हाथों कलाकारों का अलंकरण है। यहां जो मंच है, वह रंगमंच नहीं, जीवन है। पूनम जिसके लिए गा रहीं हैं वह एक लाश है। यह लाश उनके बडे़ बेटे की है।

अजीत साहनी लिखते हैं- ये दृश्य हृदय को झिंझोड़ने वाला है , ये असल मंच है , ये ही परीक्षा है एक रंगकर्मी की , एक गंभीर इंसान की , जो पूरी दुनिया से मुहब्बत करता है , उसी के लिए जीता है , उसी के लिए मरता है , इस मां को मेरे हज़ारों सलाम , इस गीत में रुदन है , इस गीत में जीवन भी है और मौत की सच्चाई भी । हम इस गीत के समक्ष बौने हुए , और मजबूती भी देता है साथी पूनम दी आपका गीत , मेरे आंसू नहीं थम रहे , स्तब्ध हूँ ।

पत्रकार उत्तरा बिदानी ने लिखा है- बचपन में पूनम दी ने बाबू को लोरी गाकर सुलाती थी। आज बेटा गहरी नींद में है। मां लोरी गा रही है। जीवन की अथाह वेदनाओं के भीतर उपजी लोरी। …दी को मालूम है कि बाबू अब उनकी आवाज सुनकर नहीं उठने वाला है। …शायद इसीलिए वह जोर से गा रही है। काश दी की आवाज सुनकर बाबू उठ जाते…।

अवधेश कुमार झा ने लिखा है- इस माँ की जीवटता को नमन ।