राम वनगमन : बदलेगी “सीतामढी” की सूरत, पर्यटको की मिलेगी सुविधा

भूपेश सरकार के ऐलान के बाद तैयारी में जुटा जिला प्रशासन

बैकुंठपुर । कोरिया जिले के भरतपुर स्थित हरचोखा की सीतामढी को राज्य सरकार ने पर्यटन स्थल बनाने की घोषण कर दी है, जिसके बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, जिसमें कलेक्टर डोमन सिंह, पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के साथ कई अधिकारी मौके पर उपस्थित रहे। दरअसल, वनवास के दौरान रामसीता लक्ष्मण कोरिया से गुजरते हुए सुुरजपुर होकर रामगढ पहुंचे थे। राम वनगमन मार्ग पर आने वाला राज्य के पहले स्थान को राज्य सरकार ने पर्यटन के रूप मे विकसित करने का फैसला किया है, जिसके बाद एक बार फिर सीतामढी सुर्खियों में है। वहीं जिला प्रशासन इसके लिए कार्य योजना तैयार करने में जुटा है, ताकि जल्द से जल्द सरकार की घोषणा को मूर्त रूप दिया जा सके।

कोरिया जिले के भरतपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत हरचौका में मवई नदी जो कि छग व मप्र की सीमा को विभाजित करती है। नदी के तट पर ही चट्टानों को तरासकर गुफा बनाई गयी है जिसमें प्रत्येक दिशा में शिवलिंग है। बताया जाता है कि भगवान राम वनगमन के दौरान यहां पर कुछ दिनों के लिए रूके थे और उन्होने यहां स्थित शिवलिंग की पूजा अर्चना भी की। इसके अलावा मान्यता यह भी है महाभारत काल में पांडव भाईयों ने भी अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में आये थे। एक पुजारी द्वारा गुफा के पास ही मवई नदी के तट पर स्थित चट्टान से रेत को साफ कर विशालकाय पैर का पंजा शिला में दिखाते हुए बताते है कि यह भीम का पंजा है। परन्तु अब उसके उपर दीवार बना दी गई है, जबकि भीम का दूसरा पंजी मवई नदी के मप्र के तट पर स्थित है। उन्होने यह भी बताया कि अज्ञातवास के दौरान पांडव भरतपुर से लगे शहडोल जिले में रहे थे जहां उन्होने 365 तालाब बनाए, बताया जाता है कि भीम हर दिन एक तालाब खोदा करता था।

कोसिर है कोसल राज्य की राजधनी
भगवान राम के छत्तीसगढ़ में राजधानी बनाने का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में मिलता है इसके अनुसार भगवान राम द्वारा निर्मित कोसल राज्य की राजधानी कोसीर (कुशावती) है, जो छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सारंगगढ़ जनपद से महज 15 किलोमीटर दूर है., इस बात की पुष्टि छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान व राम वनगमन शोध संस्थान के संस्थापक स्व डॉ. मन्नूलाल यदु और रामराज्य अभियान के अध्यक्ष राधाकृष्ण गुप्ता ने की थी। उन्होने पूर्व में बताया कि कोसीर यानी कुशावती में कोसल राज्य की राजधानी के अवशेष के रूप में किला, खाई, नदी-बंदरगाह, कोसलेश्वरी मंदिर आदि विद्यमान हैं। बाद में भगवान राम ने अपने बेटे कुश को कोसल राज्य का राजपाठ सौंपा था। वहीं लव को अयोध्या का राज सौंपा था।

रामायण कालिन इतिहास के कई तथ्य किए उजागर
स्व डॉ. मन्नूलाल यदु एवं राधाकृष्ण गुप्ता ने बताया कि छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान के विगत 15 वर्षों के शोध कार्य से रामायणकालीन इतिहास की अनेक गुत्थियों को सुलझाने का भरपूर प्रयास किया। इससे रामकथा में दुनिया के समक्ष नए-नए तथ्य प्रकाश में आए, उन्होंने बताया था कि रामचंद्र के 14 वर्ष दंडकारण्य निवास के अंतर्गत 12 वर्ष की कथा अर्थात रामचंद्रजी के चित्रकूट से प्रस्थान कर पंचवटी तक पहुंचने तक की कथा का कोई प्रामाणिक इतिहास नहीं था, इसलिए चित्रकूट के लोग मानते हैं कि भगवान राम ने 12 वर्ष चित्रकूट में बिताए थे। दूसरी ओर, पंचवटी के लोग भी यही मानते हैं कि भगवान राम ने 12 वर्ष पंचवटी में निवास किया था। 12 वर्ष के इस अज्ञात इतिहास का प्रामाणिक विवरण छत्तीसगढ़ रामवनगमन शोध संस्थान ने छत्तीसगढ़ की रामायण में प्रस्तुत किया है तथा छत्तीसगढ़ में राम वनगमन मार्ग को भी नक्शे के द्वारा लोगों के समक्ष प्रस्तुत किया था। इस नक्शे के माध्यम से सारे दुनिया के लोगों को यह भलीभांति ज्ञात हो गया कि चित्रकूट के बाद भगवान राम मध्यप्रदेश के सतना, पन्ना, शहडोल-सीधी जिले से छत्तीसगढ़ पधारे थे वे छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से कोंटा तक की यात्रा में प्रभु रामचंद्र ने 12 वर्ष बिताए थे, कोरिया में हरचोखा मं सीमामढी में राम सीता, लक्ष्मण का रूकना, उसके बाद रावतसरई और सुरजपुर की सीमा में सीता चूल्हा नामक स्थान पर खाना पकाना, उसके आगे सीला लेखनी, लक्ष्मण टांका और फिर सरगुजा के मैनपाठ, लखनपुर रामगढ पहुंचने के तथ्य बताए थे। सरगुजा से जशपुर जिले के किलकिला, पत्थलगांव होते हुए रायगढ जिले के धरमजयगढ से खरसिया होते हुए डबना, हसौद, विर्रा, शिवरीनारायण, कसडोल होते हुए कांकेंर, सुकमा, कोंटा, तेलंगाना प्रदेश के भद्राचलम होते हुए गोदावरी के तट पर महर्षि अगस्त्य के आश्रम के पास पंचवटी में पर्णकुटी बनाकर निवास किए, इस नए इतिहास की जानकारी कानपुर की संस्था मानस संगम को प्राप्त हुई थी।

मिला था मानस संगम साहित्य सम्मान
रामकथा के इस नए इतिहास के शोधकर्ता स्व डॉ. मन्नूलाल यदु को दिसंबर 2012 में मानस संगम साहित्य सम्मान प्रदान किया था। वहीं राधाकृष्ण गुप्ता ने राम वनगमन मार्ग की प्रामाणिक जानकारी केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को दी थी।. इसके बाद भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के कोरिया से कोंटा तक ग्यारह सौ किलोमीटर सड़क मार्ग को राष्ट्रीय राम वनगमन मार्ग घोषित किया है। साहित्यकार और शोधकर्ता डॉ मन्नूलाल यदु का देहांत 24 मार्च 2017 को हो चुका है।

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