आदिवासी अस्मिता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में जुटेंगे देशभर के शोधार्थी

आदिवासी समाज की दशा और दिशा पर देंगे व्याख्यान

रायपुर | राजधानी रायपुर में 27, 28 एवं 29 दिसंबर को आदिवासी अस्मिता: कल, आज और कल विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय “आदिवासी अस्मिता : कल, आज और कल” है। जिसमे आदिवासी संस्कृति, कला, शिक्षा, साहित्य, विस्थापन, समस्या एवं निदान पर केंद्रित विषयों पर परिचर्चा होगी। समकालीन व वर्तमान साहित्यकारों, समाजशास्त्री, मानवशास्त्री, इतिहासकार लेखक, कवि, आलोचक एवं शोधकर्ताओं के लिए यह आमंत्रण के साथ-ही-साथ सहभागी बनने का अवसर है।

शोध पत्र का होगा वाचन
आयोजन समिति के सचिव डॉ नरेश कुमार साहू ने बताया कि तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से 120 से अधिक शोधार्थी, प्रोफेसर एवं आदिवासी मामलों के जानकार शोध पत्र का वाचन करेंगे। इसमें सहभागिता लेने के लिए शोध पत्र/आलेख वाचन के लिए निर्धारित प्रारूप में परिचय के साथ ही शोध पत्र आलेख के समिति द्वारा चयनित होने पर व्याख्यान देंगे ।

तीन दिवसीय संगोष्ठी
कार्यक्रम का शुभारम्भ 27 दिसम्बर से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक तीन दिवसीय संगोष्ठी राजधानी सिविल लाइन स्थित नवीन विश्राम गृह के कॉन्फ्रेंस हॉल में रखा गया है। प्रतिदिन संगोष्ठी में तीन सत्र आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक सत्र में लगभग 15 शोधार्थी चयनित विषय पर व्याख्यान देंगे। राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन गोंडवाना स्वदेश मासिक पत्रिका द्वारा किया जा रहा है। आयोजन समिति के संयोजक रमेश सिेंह ठाकुर, सदस्य डा.उदयभान चौहान, डा.नरेश कुमार साहू, जितेन्द्र सोनकर, दीनानाथ यादव, नीलिमा बंजारे, अर्चना, संतोष बंजारे, हेमंत जोशी, लक्ष्मीनारायण कुंभकार है।