बड़ी ख़बर : 24 घंटे ओपीडी के फैसले का डॉक्टरों ने किया बहिष्कार

छत्तीसगढ इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन ने बंद किया ईलाज

बैकुंठपुर। अपनी विभिन्न मामलों को लेकर चिकित्सकों ने अनिश्चितकालीन ओपीडी का बहिष्कार कर दिया। छत्तीसगढ इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन के बैनर तले जिले भर के चिकित्सकों ने सरकार के डबल शिफ्ट ओपीडी का विरोध किया है। जिला अस्पताल के सभी चिकित्सकों ने इस आशय की सूचना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन तथा बीएमओं को प्रेषित कर दी गयी। इस संबंध में छत्तीसगढ इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ इमरान का कहना है कि सरकार का रवैया ना सिर्फ चिकित्सकों बल्कि मरीजों के प्रति भी इस फैसले से गलत नजर आ रहा है। उन्होनें कहा कि अभी जनरल ओपीडी बंद की गई है, यदि सरकार हमारी नहीं सुनती है तो आपातकालिन ओपीडी पर भी ब्रेक लग सकता है। हमें मरीजों की चिंता है।

जानकारी के अनुसार बीते 6 जनवरी को छत्तीसगढ इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन का राज्य स्तरीय सम्मेलन रायपुर में आयोजित किया गया था जिसमें सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया कि सभी चिकित्साधिकारी 13 जनवरी से पूर्ण रूप से ओपीडी का बहिष्कार करेंगे यह बहिष्कार अनिश्चितकालीन होगा। छत्तीसगढ इन सर्विस डॉक्टर्स एसोसिएशन द्वारा लंबित मॉगों में डबल शिप्ट ओपीडी करने वाले आर्डर पर तब तक रोक लगाने की मॉग की गयी है जब तक की राज्य स्तर पर बहुतायत में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियुक्ति न कर लिया जाये। अधिकतम ड्यूटी सीमा का निर्धारण की मॉग अंतर्गत एक दिन में शिप्ट में अधिकतम 6 घंटे ही ड्यूटी लगाई जाये वह भी रात्रिकालीन को छोडकर। अवकाश की पात्रता की मॉग में अस्पताल में कार्य करने वाले सभी डॉक्टर्स पैरामेडिकल स्टॉप एवं स्वास्थ्य कर्मचारी को किसी भी अन्य सरकारी कर्मचारी की तरह अवकाश का लाभ दिया जाये। अवकाश के दिन रात्रिकालीन ड्यूटी करने वाले स्टॉप को अगले दिन की ऑफ के साथ साथ एक अतिरिक्त अवकाश दिये जाये। डॉक्टर्स, नर्स, वार्ड ब्वाय एवं अन्य पैरामेडिकल स्टाप एवं स्वास्थ्य कर्मियों को चौबिस घंटे सातों दिन अस्पताल में कार्य करते है लेकिन अस्पतालों में संपूर्ण अवधि में दवाईयॉ व अन्य सुविधाएॅ उपलब्ध नही रहती। नर्सिंग होम एक्ट के अनुसार एक दिन में एक शिप्ट मे प्रत्येक वार्ड या 20 मरीजां पर एक रेसिडेंट डॉक्टर, एक नर्स, एक वार्ड ब्वाय एवं एक स्वीपर का होना अनिवार्य है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों की जान भी निजी अस्पतालों के समतुल्य समझी जाये इसलिए निजी अस्पतालों के अनुसार कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये। चिकित्सा अधिकारियों की 794 पद जो कि ग्रामीण चिकित्सा सहायक के पदों के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में विलोपित किये गये है उन्हे पुनः सृजित किये जाये। गामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवा बढाने के लिए स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा में चिकित्साधिकारियों के लिए 50 प्रतिशत सीटों को आरक्षित किये जाये। चिकित्सा अधिकारियों, विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों को तत्काल पदोन्नति एवं समयमान वेतन दिये जाने की मॉग शामिल है।

ओपीडी बहिष्कार से मरीजों को हुई परेशानी
चिकित्सा अधिकारियों द्वारा अपनी विभिन्न मॉगों को लेकंर 13 जनवरी से ओपीडी का बहिष्कार कर दिये जाने से जिला अस्पताल में उपचार कराने पहुॅचने वाले मरीजों व उनके परिजनों को पहले ही दिन परेशान होना पडा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सकों की प्रस्तावित हडताल को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नही बनाई गयी थी। जिस कारण अस्पताल में ओपीडी खुलने के समय चिकित्सक कक्ष के बाहर मरीज लाईन लगाकर खडे हो गये थे औ चिकित्सक का इंतजार करते रहे लेकिन घंटों बाद भी चिकित्सक नही पहुॅचे। ऐसा हाल जिला चिकित्सालय का रहा। इसके अलावा ब्लाक मुख्यालयों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी बाह्य मरीजों को उपचार कराने के लिए परेशान होना पडा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था बनाये जाने की जरूरत है ताकि मरीजों केा इस दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना ना करना पडे।

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