कोरिया के सरकारी हेचरी में बर्ड फ्लू, 1किमी दायरे तक के मुर्गे-मुर्गी चूजे अंडे दफन

हेचरी से लगे इलाके का डोर-टू-डोर सर्वे कर निगरानी

बैकुंठपुर। कोरिया जिलामुख्यालय स्थित शासकीय कुटकुट पालन प्रक्षेत्र में एवीयन इंनफ्लूएन्जा उदभेद (बर्ड फ्लू) की पुष्टि भोपाल स्थित बर्ड फ्लू परीक्षण प्रयोगशाला राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग परीक्षण संस्थान ने किया है, जिसके बाद पशु विभाग ने जांच रिपोर्ट मिलते ही 12 घंटे के अंदर 27 सौ मुर्गे मुर्गिया, 12000 चूजे और 30 हजार अंडों को डिस्पोज कर दिया है, वहीं 1 किमी के अंदर सर्वे कर 450 मुर्गे मुर्गियों को 50 प्रतिशत की कीमत देकर खरीद कर डिस्पोज कर दिया।
इस संबंध में पशु विभाग के उप संचालक डॉ बघेल का कहना है कि वायरस कैसे आया यह पता लगाना बेहद कठिन है, फिलहाल इसके रोकथाम के उपाय जारी है, सभी पक्षियों, अंडे और चूजों को डिस्पोज कर दिया गया है। ये बीमारी इंसान से इंसान में सीधे नहीं जाती है, जो डिस्पोज के काम में लगे थे उन्हें टैमीफ्लू नामक दवाई दी गई है। जहां कलेक्टर ने आमजन से अपील की है कि एहतियात के तौर पर मुर्गी, अण्डा एवं बतख खाने से बचें। वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेचरी से लगे क्षेत्र का डोर-टू-डोर सर्वे कर व्यक्तियों में संक्रमण की निगरानी की जा रही है।

जानकारी के अनुसार बीते 7 दिसंबर से हेचरी में लगातार मुर्गियों के मरने की बात सामने आ रही थी, ऐसा पहला मौका था कि इतनी बड़ी मात्रा में मुर्गे-मुर्गियों की लगातार मौतों को देखते हुए प्रशासन ने इसके कई स्थानों पर सेंपल भेजे, भोपाल के बर्ड फ्लू परीक्षण प्रयोगशाला राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग परीक्षण संस्थान से आई रिपोर्ट में एवीयन इंनफ्लूएन्जा उदभेद होने की बात सामने आई है। जिसके बाद कलेक्टर ने हेचरी में रखे मुर्गे, मुर्गियों, अंडे, चूजे सहित दानों को डिस्पोज करने के निर्देश दिया।
वही मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की एक टीम कोरिया पहुंची और पूरी हेचरी को इंफेक्शन से बचाने के कार्य में जुट हुई है। दूसरी ओर कलेक्टर के निर्देश पर 1 किमी की परिधि में सर्वे का कार्य किया गया, जिसमें 800 मुर्गे मुर्गियां पाई गई, दिनभर में 450 मुर्गे मुर्गियों को विभाग ने मुआवजा देकर ले लिया, बचे को लेना जारी है।

कैसे पता चला बीमारी है
7 दिसंबर 2019 को हेचरी में अचानक 70-75 मुर्गे-मुर्गियों की मौत हो गयी। जिसके बाद हेचरी से सप्लाई बंद कर दी गई।
8 दिसंबर 2019 को विभाग ने इसका सेंपल लेकर एक कर्मचारी को मप्र के जबलपुर स्थित वेटनरी लैब भेजा। जांच में सीआरडी नामक रोग का नाम सामने आया और वहां उसे मुर्गियों के बचाव के लिए दवाईयां भी बताई गई, परन्तु किसी भी तरह का लाभ नहीं हुआ।
12 दिसंबर 2019 को स्थिति नहीं संभलने के बाद देश के सबसे बडे इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यट में एक कर्मचारी के साथ सेंपल भेजा गया, जहां से बैक्टिरीयल इंफेक्शन की बात सामने आई, और बचाव के लिए दवाईयां भी बताई गयी, 2-3 दिन दवाईयों से कोई फर्क नहीं पड़ा। जिसकी जानकारी राज्य सरकार को दी गई।
15 दिसंबर को मामले की जानकारी राज्य के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद दुर्ग से वेटनरी के प्रोफेसर को कोरिया भेजा गया।
17 दिसंबर 2019 को दुर्ग स्थित वेटनरी संस्थान के 4 सदस्यों की टीम ने हेचरी पहुंचकर जांच की और इसके सेंपल भोपाल स्थित बर्ड फ्लू परीक्षण प्रयोगशाला राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग परीक्षण संस्थान भेजने को कहा। विभाग का एक कर्मचारी भोपाल पहुंचा, जिसकी रिपोर्ट राज्य शासन और जिला प्रशासन द्वारा को 24 दिसंबर 2019 को पहुंची।
24 दिसंबर 2019 को रैपिड रिस्पांड टीम (आरआरटी) बनाई गयी इसके अलावा राज्य सरकार के निर्देश पर इसके जानकारों की टीम भी मौके पर पहुंची, किसी भी आवाजाही पर रोक लगा दी गई। सुबह 4 बजकर 15 मिनट तक 2700 मुर्गे मुर्गियां, 12000 चूजे और 30000 अंडों के साथ 40 क्विंटल दानों को नष्ट कर दिया गया।

विभागीय लापरवाही
जिलामुख्यालय स्थित शासकीय हेचरी में बीते 15 वर्षों से लगातार कुटकुट पालन जारी है, इसका दायरा लगातार बढाया जाता रहा, परन्तु नियमों का पालन कभी नहीं किया, हेचरी में कुटकुट पालन में कभी भी किसी भी प्रकार ठहराव नहीं किया गया, जबकि बीच बीच में साल भर का ठहराव जरूरी है, वहीं हेचरी में हर कहीं गंदगी फैली रहती है, बीच शहर में होने के कारण आसपास इससे निकलने वाली दुर्गंघ दूर दूर तक फैली रहती है। इसके अलावा अब तक इसे एक निजी व्यक्ति के स्वामित्व के रूप में देखा गया है। बताया जाता है कि जब बीमारी फैलने की बात सामने आई तो यहां निजी तौर पर पलने वाले आधा दर्जन गाय भैसों को यहां से हटाया गया। यही कारण था कि इस तरफ कोई देखने नहीं जाता था।

शहर से हटाए जाने की मांग
बैकुंठपुर शहर के बीचों बीच स्थित हेचरी को हटाए जाने की लागातार मांग होती रही है, बावजूद इसके हेचरी का सतत विस्तार किया गया, हेचरी के चारों ओर घनी बस्ती हे, ऐसे में स्वाईन फ्लू या बर्ड फ्लू फैल जाती है, तो कई लोग इसके चपेट में आ सकते हँ। आसपास के लोगों को कहना है कि प्रशासन शहर के मध्य जिला अस्पताल को स्थानांरित करने के बजाय हेचरी को यहां से हटाए और हेचरी के स्थान पर विशाल अस्पताल बनाए।

नहीं है जांच की सुविधा
कोरिया जिले में बर्ड फ्लू की जांच की सुविधा नहीं है, सरकारी लैबों में तो इसकी जांच की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है, वहीं निजी लैब संचालक भी इससे अंजान है। निजी लैब के सिनीयर पैथौलॉजिस्ट राजेश जायसवाल की मानें तो यहां के साथ इसकी जांच की सुविधा राज्य में कहीं और हो ऐसा अभी तक पता नहीं चला है। ऐसे में यदि कोई इस बीमारी से ग्रसित होता भी है तो उसका पता कैसे चलेगा ये किसी को पता नहीं है। दूसरी ओर प्रशासन स्वास्थ्य विभाग से बीमारी को लेकर सर्वे भी करा रहा है, सर्वे में सर्दी ,खांसी बुखार का पता लगाया जा रहा है, परन्तु बर्ड फ्लू ही है ये कैसे पता चलेगा इसका जवाब विभाग के पास भी नहीं है।