कोरिया :खाडा जलाशय फूटा, कई एकड़ फसल बर्बाद, सिलफोटवा पर खतरा

गेटों को नहीं खोलना बांध के फूटने की बड़ी वजह बताई जा रही

चंद्रकांत पारगीर, बैकुंठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से लगा हुए खाडा जलाशय बांध आज सुबह फूट गया| पानी फसलों को बर्बाद करते हुए भांडी के सिलफोडवा जलाशय में भरने लगा, हालांकि इसके वेस्टवेयर से पानी की निकासी जारी रही| बांध के फूटने की खबर पर काफी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए, वहीं काफी लोग मछली पकडने में लगे रहे। जहाँ किसान अपनी खडी फसलों को बर्बाद होते देख रहे थे, वहीँ मौके पर पहुंचे जल संसाधन विभाग के अफसरों के पास इस नजारे को देखने के सिवा कोई चारा न था |

बांध फूटने की घटना के तुरंत बाद पर बैकुंठपुर की विधायक व संसदीय सचिव अंबिका सिंहदेव सामने आई और उन्होनें राज्य के जल संसाधन मंत्री को मामले की पूरी जानकारी दी| इसके अलावा जिला प्रशासन के अधिकारियों से चर्चा कर जल्द से जल्द किसानों की बर्बाद फसल का मूल्यांकन कर मुआवजा देने को कहा, इसके अलावा मामले में विभाग से हुई लापरवाही की जांच कर कार्यवाही के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ वो और हमारी पूरी सरकार खडी  है, उन्हें निराश नहीं किया जाएगा।

कोरिया जिले के बैकुंठपुर तहसील स्थित खाडा जलाशय बांध का बडा हिस्सा बीच में से फूट गया, जिसके बाद बांध में लबालब भरा पानी खाडा से निकलकर कई गांवों में लगी फसल चौपट करते हुए सिलफोटवा बांध में पानी भरने लगा, यहां का स्लूस गेट तक पूरा डूब चुका है। इस बांध के फूटने को लेकर ग्रामीणों में काफी दहशत व्याप्त है।

उधर, खाडा में बांध के फूटने की खबर आग की तरह ग्रामीण क्षेत्रो में फैल गई, जिसके बाद काफी संख्या में ग्रामीण बांध को देखने पहुंच गए, बैकुंठपुर से खाडा जाने वाले मार्ग की पुलिया के उपर से पानी बहने लगा। ग्रामीणों से बताया कि उन्होने पहली बार इस तरह बांध को टूटते हुए देखा है, इससे उनकी खडी फसल का बड़ा नुकसान हो गया है।

फूटने से बच जाता बांध
ग्रामीणों की माने तो बीेते 3 दिन से बांध के बीचोंबीच से पानी का रिसाव जारी था, इसकी जानकारी जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को ग्रामीणों ने दी भी थी, परन्तु विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं किया। वही इस बांध का वेस्ट वेयर जुलाई में ही शुरू हो गया था, बांध में पानी भरा होने के बाद भी विभाग के अधिकारियों ने इस ओर देखने की जरूरत नहीं समझी। जिसके कारण पानी का दबाव बढता गया और आज अंततः बांध बीच में से टूट गया। यदि 15 दिन पहले बांध के दोनों गेट खोल दिए गए होते तो बांध को बचाया जा सकता था।

दो बड़े गेट है बांध में
खाडा जलाशय में 2 बाय 2 के दो बडे गेट है, नियमानुसार बांध को फूटने से बचाने के लिए उसमें लगे गेटों को खोल दिया जाता है पर विभाग ने समय रहते खोलने की पहल नहीं की। बांध के टूटने की यह सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो पानी से भरे इस बांध के दोनों गेट खराब थे, उनपर बोरी में रेत डालकर उन्हें बंद कर दिया गया था।

ई एंड एम से नहीं करवाते काम
विभागीय सूत्रों की मानें तो बीते 8 साल से जल संसाधन विभाग ई एंड एम विभाग से गेटों की मरम्मत का कार्य नहीं करवा रहा है, दरअसल, जल संसाधन विभाग ईएंडएम विभाग के गेट को लेकर जानकार लोगों से बांधों के गेट नहीं बनवाते है। गेट रिपेयर का काम ना टेक्निकल इंजीनियरों के द्वारा किया जा रहा है। जिले भर के बांधों में लगे गेटों का यही हाल है।

सिलफोटवा का गेट खराब
खाडा बांध से बहकर पानी सिलफोटवा बांध में इकट्ठा हो रहा है, परन्तु इसके गेट का राड खराब होने के कारण इससे काफी कम मात्रा में पानी निकल रहा है, ऐसे में सिलेफोडवा बांध को कोई बड़े नुकसान का अंदेशा बन जाता है|

फूट सकते हैं कई बांध
बताया जा रहा है कि बैकुंठपुर तहसील का मुरमा बांध भी लीक कर रहा है, यह भी कभी भी फूट सकता है| वही खडगवां सलका बांध और बेैकुंठपुर का सिलफोटवा बांध के फूटने की आशंका जानकारों ने जताई है|

वही भरतपुर का तरतोरा बांध की मिट्टी भी कुछ माह पूर्व धंस चुकी है, यहां भी हाल बेहाल है| इसके अलावा महाराजपुर जलाशय का नाला क्लोजर की मिट्टी के धंस जाने के बाद वहां की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। कुछ एनिकट और बांध के फूटने और मिट्टी बहने की घटना बीते दो महीने में सामने आ चुकी है|

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