बाजार में बिक नहीं रहा, सोसायटी खरीद नहीं रही, क्या होगा कर्ज का…

रकबा शून्य होने से परेशान हैं बैगा आदिवासी

बैकुंठपुर। कोरिया जिले में जारी धान खरीदी को लेकर किसान बेहद परेशान है, सबसे ज्यादा परेशानी भरतपुर सोनहत में देखी जा रही है, जहां बैगा आदिवासियों का रकबा शून्य कर दिया गया, जबकि इन किसानों ने धान भी उगाया है, पंजीयन भी करवाया है। इन किसानों की नाराजगी यह भी है कि सत्ताधारी दल के नेता खरीदी केन्द्रों में उनकी सुध लेने तक नहीं पहुंच रहे है। वहीं आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की तैयारी में है, पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष सुखवंती सिंह का कहना है कि किसानों के नाम पर आई सरकार उनका धान नहीं खरीदने के लिए कई हथकंडे अपना रही है, बैगा आदिवासियों का रकबा शून्य करके सरकार क्या बताना चाह रही है, जनता उन्हें आने वाले समय में सबक सिखाएगी। प्रभावित किसानों में रामप्रसाद अहिरवार आ गुठाई ग्राम हरचौक ग्राम माड़ी सरई लालबहादुर बैगा आ लालमणि बैगा ग्राम मेह दौली जिनका रकबा 5 एकड़ है और धान रकवा 0 है। इसी तरह कई अन्य किसानों के नाम भी सामने आ रहे हैं। इस संबंध में भरतपुर तहसीलदार मनमोहन सिंह ने बताया कि मुझे भी जैसे ही जानकारी मिली है मैंने पटवारी को उक्त किसान के घर भेजा है, मामले की जांच जारी है। देखिये क्या सामने आता है।

जानकारी के अनुसार कोरिया जिले की दूरस्थ तहसील भरतपुर की कंजिया, माडीसरई, जनकपुर और कोटाडोल धान खरीदी केन्द्रों में किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। इन केन्द्रों में पंजीकृत किसानों को रकबा शून्य कर दिया गया है, जब किसान टोकन लेने पहुंचते है तो उन्हें यह बताया जाता है कि आपका रकबा तो है ही नहीं है, ऐसे में किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे है। उन्हें अब लिए ऋण की चिंता सता रही है। इसके अलावा धोबाताल, बरेल, के किसान कंजिया जाते है उन्हें बैंरग वापस लौटा दिया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि सिर्फ रसूखदारों का धान खरीदा जा रहा है छोटे किसान दर बदर भटक रहे है। एक तो किसानों मौसम की मार से परेशान है, दूसरे सरकार उनका रकबा कम कर उनका धान लेने को तैयार नहीं है।

कर डाला शून्य रकबा
ग्राम पंचायत महदौली के बरछा ग्राम के निवासी रामशरण बैगा पिता जयकरण बैगा जब अपना टोकन लेने माडीसरई केन्द्र पहुंचे तो वहां कम्प्यूटर आपरेटर ने बताया कि उनका रकबा तो शून्य है, आप धान नहीं बेच सकते है, किसान रामशरण हैरान रह गए, उनके पास तीन खाते है, सभी में धान का उत्पादन हुआ है उन्होने ऋण भी ले रखा है, और खाद भी ले रखी है, ऐसे में उनका कर्जा कैसे खत्म होगा इसकी उन्हे चिंता सता रही है। उनका कहना है कि राजस्व के अधिकारी कर्मचारी कार्यालय में बैठे बैठे किसानों के रकबे मे छेडछाड कर रहे है।

टोकन की मारामारी
भरतपुर क्षेत्र के धान खरीदी केन्द्रों में टोकन की बडी मारामारी है, किसानों को 30 दिसंबर के बाद टोकन काटे जाने की बात कही गई है, समिति में जाने पर कम से कम 5 से 10 दिन का टोकन देने का कह भगा दिया जाता है। कभी मौसम का बहाना तो कभी समय का बहाना बनाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष जितना धान वा बेचते है उतना धान अब समिति लेना नहीं चाहती है, वो अपना धान कहां रखे, किसी और को वो बेच नहीं सकते है क्योंकि व्यापारी धान ले नहीं रहे है। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर होती जा रही है।

रेत खदानों के बाद धान केन्द्र
बीते एक साल से जिले के भरतपुर की नदियों से जमकर अवैघ रेत उत्खनन और परिवहन हुआ, इधर, 1 दिसंबर से धान खरीदी जारी है, परन्तु नेताओं को अवैध उत्खनन के समय भी ग्रामीणों ने कई बार फोन कर बुलाया, तब भी वो मौके पर नहीं पहुंचे, वहीं जारी धान खरीदी केन्द्रों पर भी नेता इसलिए नहीं पहुंच रहे है क्योंकि किसान बेहद परेशान है और तय है कि उनकी खरीखोटी सुनना पड़ेगी। यही कारण है कि नेता इधर उधर सोशल मीडिया में फोटो वायरल कर अपना भ्रमण बता रहे हैं।

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