कोरिया घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में एक साथ तीन टाइगर

आवाजाही काफी कम होने से वन्यजीव अभय घूम रहे

चंद्रकांत पारगीर, बैकुंठपुर। कोरिया जिला स्थित गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान (टाइगर रिजर्व) में लॉक डाउन का यहां के वन्य जीवों पर बड़ा असर पड़ा है, इन दिनों ना सिर्फ नए वन्य जीव मेहमानों ने पार्क का लुत्फ उठाया है, बल्कि तीन तीन टाइगर एक साथ घूमते देखे गए है। जबकि टाइगर के एक साथ देखा जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है।

इस संबंध में पार्क के संचालक श्री आओ का कहना है कि लॉक डाउन मे जानवरों को आने जाने वाले वाहनों की आवाज कम सुनाई दी और लोगो के आवागमन भी काफी कम हुआ है जिससे वे अपने आप को बेहद खुला महसूस कर रहे है।

कोरिया जिले के गुरू घासीदास पार्क में लॉक डाउन से वन्य प्राणियों में इंसानी भय थोड़ा कम होता नजर आया है, पार्क के अधिकारियों की माने तो कई तरह के जानवर स्वच्छंद विचरण करते पाए गए है तो कई कैमरों में ट्रेप हुए है।

इन दिनों पार्क में चारों ओर हरियाली लहलहा रही है। जो वन्य जीवों को आकर्षित करती है। इूसरी ओर लॉक डाउन की शांति के कारण वन्य जीव बाहर निकल कर घूमते नजर आ रहे है। इस समय कई प्रकार के वन्य प्राणी का संजय पार्क और तमोर पिंगला से आते है और चले जाते है।

एक साथ तीन टाइगर के पदचिन्ह

टाइगर रिजर्व घोषित होने के बाद यहां रहने वाले टाइगरों पर पार्क का अमला बेहद बारिक नजर रख रहा है। ऐसे में लॉक डाउन के दौरान एक साथ पार्क के अमले को तीन तीन टाइगर के एक साथ फूटमार्क देखने को मिले, चूंकि टाइगर का अपना क्षेत्र होता है और एक साथ बेहद कम मौके मिलते है जबकि एक साथ होकर साथ चले। परन्तु एक साथ तीन तीन टाइगर के फूटमार्क मिलने से पार्क के अधिकारी भी हैरान है।  ऐसे सभी टाइगर पार्क के सोनहत रेंज में देखे गए।

दूसरी बार पहुंचा गौर

गुरू घासीदास राष्ट्रीय उद्यान में दूसरी बार गौर कैमरे में टैªप हुआ है। इस बार 9 मई को दो तीन बार अलग अलग स्थानों पर कैमरे ने उसकी गतिविधियों को पकड़ा, पार्क के अधिकारियों की माने तो इसके पूर्व लॉक डाउन के पहले भी एक गौर इस क्षेत्र में देखा गया था, एक दो दिन जंगल में घूम कर वह यहां से रवाना हो गया, जिसके बाद दुबारा 9 मई को उसे कैमरों ने ट्रेप किया। बताया यह भी जाता है कि इस बार उक्त गौर का बाघ ने पीछा भी किया, परन्तु वो भागने में कामयाब हो गया।

5 मीटर की दूरी से देखा और चला गया

तीन चार दिन पूर्व टाइगर पर नजर रख रहा अमला जब मेड्रा जंगल की ओर लौट रहा था, बाइक मे सवार पार्क के कर्मचारियों के 5 मीटर की दूरी पर टाइगर खड़ा दिखा, ठीक सामने टाइगर देख कर्मचारियों की सांसे अटक गई, टाइगर ने उन्हे देखा, कुछ क्षण रूका और फिर अपने रास्ते चला गया। जिसके बाद कर्मचारियों की जान में जान आई।

अधिकारियों की माने तो अब यहां निवासरत टाइगर धीरे धीरे वो यहां के आबोहवा में घुलमिल गए है, दूसरा उनके लिए यहां पर्याप्त मात्रा में भोजन है जिसके कारण वो यहां बेहद आजाद होकर विचरण कर रहे है।