सारकेगुड़ा मामला : सदन में बोले मंत्री लखमा, तत्कालीन CM और HM पर हो कार्यवाही

सारकेगुड़ा मुठभेड़ की रिपोर्ट पर सरकार और विपक्ष के बीच दिखी तल्खी

रायपुर। शीतकालीन सत्र में विधानसभा में आज सोमवार को सारकेगुडा मामलें की न्यायिक जांच रिपोर्ट सदन के पटल पर रखा गया। जिसके बाद सदन में विपक्ष के सभी सदस्यों ने सारकेगुड़ा फर्जी मुठभेड़ की रिपोर्ट मीडिया में पहले से ही प्रकाशित होने के चलते विशेषाधिकार हनन बताया। विपक्ष ने सदन में इस मसले पर जमकर हंगामा किया।
गौरतलब है कि 2012 में सारकेगुड़ा में 17 लोगो को नक्सली बताकर एनकाउंटर कर दिया गया था। जिसे तत्कालीन विपक्ष के विधायक और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने फर्जी मुठभेड़ बता कर इसकी जाँच की मांग की थी। उनकी मांग पर तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने न्यायिक जांच आयोग बिठाई, लेकिन रिपोर्ट अब जाकर आई है।

सत्ता परिवर्तन के बाद सदन में न्यायिक जांच की रिपोर्ट सौंपी गई। जिसमें ये आयोग ने ये टिपण्णी की है कि उक्त घटना में मारे गए लोग नक्सली नहीं थे।इस मसले पर बस्तर के तेजतर्रार नेता और आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने मीडिया से कहा कि मीडिया में कैसे प्रकाशित हुआ इसकी जानकारी नहीं लेकिन न्यायिक जांच की रिपोर्ट में सारकेगुड़ा मामला फर्जी होना बताया गया है। मंत्री लखमा ने कहा कि हम सरकार से मांग करते हैं कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और तत्कालीन गृहमंत्री पर कड़ी कार्यवाही की जाए। जिससे पीड़ित परिवारों को राहत मिले। मंत्री लखमा ने सदन में इस मामले पर विपक्ष द्वारा हंगामा करने को अनुचित ठहराया।

विशेषाधिकार का हुआ हनन-कौशिक
इधर सदन में विपक्ष के द्वारा विशेषाधिकार हनन के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया गया। नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि सदन में रखे जाने के पहले मामला प्रकाश में आना ये सदन के विशेषाधिकार हनन है। इस पर चर्चा करवाना था, साथ ही कहा कि जो तथ्य आये है उसकी छानबीन के बाद दोषियों पर करवाई हो। रमन सिंह का बचाव करते हुए कौशिक ने कहा कि मामले की तह तक जाने आयोग गठित की गई थी, जिसकी आज रिपोर्ट आई है।