बिना पंजीयन वाले छोटे किसान नहीं बेच पा रहे धान

परेशान किसान, बकरा-मुर्गा बेचकर चला रहे काम

बैकुंठपुर । धान खरीदी को लेकर प्रशासन की सख्ती से बिना पंजीयन वाले किसान बेहद परेशान है, जिले के 75 प्रतिशत किसान ऐसे है जिनके पास सीमित भूमि होने के कारण धान का विक्रय नहीं करते। ये राजस्व विभाग के आंकडे बता रहे है। जिसमें जिले भर के खातेदारों के आंकड़े और पंजीयन से आसानी से लगाया जा सकता है। दूसरी ओर आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान अब धान की मिसाई, ढोवाई के लिए अपने बकरा-मुर्गा बेच कर काम चला रहे है।
इस संबंध में डीएमओ अमित कुमार का कहना है कि किसानों को पंजीयन के लिए ढाई महीने का समय दिया गया, बावजूद किसानों ने पंजीयन नहीं कराया, इसमें क्या कर सकते है, हमारा उद्देश्य सिर्फ अवैध धान की रोकथाम है, अगले वर्ष ज्यादा से ज्यादा पंजीयन हो इसके लिए प्रयास किए जाएगे।
जानकारी के अनुसार कोरिया जिले में समर्थन मूल्य पर धान का विक्रय करने वाले की संख्या काफी कम है, राजस्व विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले के पांचों तहसील क्षेत्रों में भूमि के खातों की संख्या 1 लाख 12 हजार 8 है, जबकि सिर्फ पंजीकृत किसानों की संख्या में 19 हजार 7 सौ 40 है। ऐसे मँ यदि शहरी क्षेत्रों के खातों की संख्या में अनुमानित 10 हजार आंकी जाए तो लगभग 80 हजार खाते ग्रामीण क्षेत्र में आते है। ये ऐसे किसान हैं जो ना तो सरकारी धान की कीमत का लाभ उठाते हैं और ना ही धान बोनस, फसल बीमा, ऋण और तमाम तरह के खाद बीज लेते है। राजस्व विभाग और जिला विपणन कार्यालय के आंकड़ों में भारी अंतर की वजह साफ है।

जिले के हर गांव के कुछ ही किसानों का पंजीयन हो पाते हैं और वो ही सारी योजनाओं का लाभ लेते है। ऐसे किसानों के लिए सरकार ने किसी भी तरह की कोई योजना नहीं बनाई है। किसानों की मानें तो सरकार को ऐसे किसानों के धान को खरीदने के लिए हाट बाजार में अलग से काउंटर लगाए जाना चाहिए, ताकि वो जरूरत की वस्तुएं धान बेचकर पूरा कर सके।

नहीं हुई है बोहनी
दो दिन पहले शुरू हुई धान खरीदी में 1 और 2 दिसंबर तक 22 समितियों मे से सिर्फ 7 समितियों में ही धान की खरीदी हो पाई है, जबकि 15 समितियों में बोहनी तक नहीं हुई है। अभी तक कुल 1365 क्विंटल धान की खरीदी हुई है। जबकि 3 दिसंबर को 185 कूपन जारी किए है जिसमें 8583 क्विंटल धान आने का अनुमान है। इधर, पहले से ताक लगाए मिलरों को जल्दी डीओ की डिमांड को लेकर अभी और इंतजार करना होगा। अब आधे पुराने और आधे नए बारदानों में खरीदी तय कर दी गई है, ऐसा हर किसान को अपने धान पुराने और नए बारदानो में भरना होगा। इसके अलावा कम्प्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मिल रही शिकायत और दो पर कार्यवाही के बाद जिला प्रशासन ने सभी 22 कम्प्यूटर ऑपरेटरों को इधर से उधर कर दिया है।

बेच दिए बकरा-मुर्गा
बैकुंठपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के ज्यादातर किसान अपना धान की मिसाई, ढोवाई में व्यस्त हैं। धान के काम में लगे लोगों शहरों में काम करने नहीं आ रहे है, कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंनें खेत से धान को घर लाने के लिए जो ढोवाई मजदूरें से करवाई, उसके एवज में उन्हें बकरा मुर्गा बेचना पड़ा। जो बकरा दो हजार में बिकता था उसे एक हजार, 8 सौ में बेच कर जैसे तैसे उनकी मजदूरी देना पड़ी, जबकि पहले वो धान के बेच कर मजदूरी दे दिया करते थे, परन्तु अब उनका धान कोई लेने को तैयार नहीं है।

नहीं है ग्रामीण क्षेत्रों में काम
नई सरकार आने के बाद ग्रामीण क्षेत्रो में काम को लेकर लोगों में काफी नाराजगी है। दरअसल, सरकार बनने के बाद सोशल मीडिया को छोड़ धरातल पर ऐसा कोई काम नहीं है जो सरकार ने किया है। इस वर्ष बारिश भी बहुत हुई जिसके कारण कोई काम नहीं खुले, मनरेगा में जो कुछ काम शुरू भी हुए तो उनमें जेसीबी का जमकर उपयोग हुआ, जिससे मजदूरों का हक मारा गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर देखी जा रही है।