किसानों के धान पर सख्ती, इधर मिलरों पर मेहरबानी…

मिलरों के गोदामों में धान-चावल का भारी स्टाक, गड़बड़ी की आशंका

बैकुंठपुर। प्रदेश सरकार द्वारा धान खरीदी के लिए अब 1 सप्ताह से कम का समय बचा है, छापे पड़ रहे हैं धान जब्त हो रहा है पर मिलरों के चावल के स्टाक पर अफसरों की नजर नहीं है। आखिर यही धान चावल बनेगा मिलरों के हाथों और फिर यहीं गड़बड़ी की पूरी आशंका नजर आ रही है। जिस पर प्रशासन आंखें बंद किए हुए है। इधर, राज्य सरकार ने रकबा ज्यादा पाए जाने की दशा में अधिकारियों पर कार्यवाही करने की चेतावनी जारी की है, जिसके बाद बीते कुछ दिनों से धान के रकबा कम करने को लेकर प्रशासन एड़ी चोटी का जोर लगा रहा है। इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी गणेश राम कुर्रे का कहना है कि लगातार कार्यवाही की जा रही है। एसडीएम को निर्देशित किया गया है कि चावल और धान का अवैध भंडारण होने पर सख्त कार्यवाही की जाए।
इसके पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा व्यापारियों के गोदामों में छापामार कार्यवाही कर अवैध धान जब्ती की कार्यवाही की गई, परन्तु राईस मिलरों पर प्रशासन का प्रेम देखते ही बन रहा है। मिलर में गए अधिकारियों ने हजारों टन भरे चावल को दूर से देख अपनी आंखे बंद कर वापसी की राह पकड ली। जानकारी के अनुसार कोरिया जिला प्रशासन कोचियों पर कार्यवाही कर रहा है, बताया जा रहा है कि पूरी कार्यवाही किसानों और छोटे व्यापारियों में डर पैदा करने के लिए की जा रही है ताकि वो कम से कम धान बेच सके। इसके अलावा छोटे व्यापारियों पर थोडा चावल और धान की जब्ती कर वाहवाही लूटी जा रही है, जबकि राईस मिलरों को धान और चावल रखने भारी छूट दी गई है।
सूत्रों की मानें तो मनेन्द्रगढ से लेकर भरतपुर और खड़गवां के कई राईस मिलरों के पास उप्र का चावल बड़ी मात्रा में स्टाक है। जिले के अन्य तहसीलों में स्थित राईस मिलों को भी ऐसा ही हाल है। ऐसा नहीं है कि अधिकारी यहां पहुंचें नहीं है, जांच कर रहे अधिकारी मिलरों के गोदामों पर गए, परन्तु बिना कोई कार्यवाही किए लौट गए।

मिलरों के पास है बड़ी मात्रा में धान
सूत्र बताते है कि मिलरों के पास धान भी ब़डी मात्रा में है और चावल भी, बताया जाता है कि उप्र का चावल छत्तीसगढ़ के चावल से सस्ता है, उसे तत्काल डीओ प्राप्त करने के लिए बारदानों में पैक कर खपाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। क्योंकि यदि छत्तीसगढ़ के चावल को खरीदी के बाद मिलर उठाएंगे और फिर उसे चावल बनाकर एफसीआई को सौंपेगे जिसमें काफी देरी होगी, जिससे उनकी कमाई पर असर पडेगा, वहीं दोहरी कमाई के लिए पहले से इन मिलरों के गोदामों में पडे़ चावल को सरकारी बारदानों में पैक कर एफसीआई में देने का पूरा प्लान तैयार हो चुका है। इस प्लान में अधिकारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता है, यही कारण है कि बड़े मिलरों पर छापे की किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं की गई है, इसमे सबसे पहला नाम मनेन्द्रगढ़ का है।

मिलरों के पास पहले पहुंचा बारदाना
प्रशासन ने सभी समितियों में पहले से बारदाना उपलब्ध करा दिया है, परन्तु सूत्र बताते है कि कई समितियों से आधा बारदाना मिलरों के पास पहुंच चुका है, उसमें उप्र का चावल भरा जाने की तैयारी है, ताकि उनका डीओ फटाफट कटे जिसका उन्हें सीधे लाभ हो। इसकी पूरी तैयारी हो चुकी है। अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी है, परन्तु कार्यवाही सिर्फ छोटे व्यापारियों और किसानों पर जारी है। सूत्र बताते है कि कई मिलरों का दो-दो पंजीयन है, परन्तु एक ही राईस मिल का संचालन कर रहे है, दूसरा रखा हुआ पंजीयन का कागजों पर संचालित हो रहा है। जिसकी जांच प्रशासन करना ही नहीं चाहता है।

कम कर रहे है रकबा
किसानों की माने तो अधिकारियों द्वारा धान खरीदी के पूर्व कम्प्यूटर में धान के रकबा को बिना भौतिक जांच के कम किया जा रहा है। कम्प्यूटर में किसानों के धान के रकबा को कम करने की प्रकिया को कम्प्यूटर का साप्टवेयर ले रहा है लेकिन ऐसे कई किसान है जिनका खेती का रकबा बढा है। लेकिन ऐसे किसानों के धान का रकबा बढाने को लेकर कम्प्यूटर का साप्टवेयर नहीं ले रहा है जिससे कि ऐसे किसानों को घाटा होगा। इस बार प्रदेश सरकार द्वारा प्रति एकड़ धान खरीदी की मात्रा को तय कर दिया है। बीते वर्ष 2018-19 में 14059 किसानों ने 26276.22 रकबा के तहत धान बेचा था, जबकि चालू वर्ष 2019-20 में 19740 किसानों का 32622.33 रकबे के धान की खरीदी होना है। इस वर्ष 3975 नए किसानों ने पंजीयन करवाया है।

रकबे को लेकर बना हुआ है संशय
भूमि के बॅटवारे के बाद कई किसानों के धान का रकबा घटा है लेकिन इसकी जांच किये बिना ही रकबा कम्प्यूटर में कम कर दिया जा रहा है, जबकि जहां सिंचाई सुविधा व पानी की उपलब्धता है, वहां के किसानों का धान उत्पादन असुविधा वाले भूमि से अधिक है। इसके आंकलन करने को प्रभावी तरीका नहीं है सिर्फ भूमि के आधार पर रकबा किसानो का कम किया जा रहा है। जिस किसान के धान का रकबा बढ़ा उसे कम्प्यूटर साप्टवेयर के नहीं लेने से बढ़े हुए रकबा का उत्पादन दर्ज नहीं होने के कारण उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस बार जिल के हर क्षेत्र में धान का बम्पर उत्पादन हुआ है ऐसी स्थिति में भूमि की उपलब्धता के आधार पर रकबा कम करने का कोई ठोस पैमाना के ही रकबा कम करना किसानों के लिए नुकसान का सौदा साबित हो सकता है। एक स्थान पर बैठकर रकबा तय करने से किसानों की उत्पादित धान को पूरी तरह से खरीदी होगी इसे लेकर किसानों में संशय है।

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