स्वाद नहीं आ रहा था, माँ-बेटी ने खा लिया जहर, माँ की मौत

बेटी सिम्स में जीवन और मौत से जूझ रही,मौके से बरामद सुसाइड नोट में पूरा व्योरा लिखा हुआ मिला

बिलासपुर| माँ-बेटी ने महज इसलिए जहर खा लिया क्योंकि स्वाद नहीं आ रहा था कमजोर महसूस कर रही थी| माँ की तो मौत हो गयी वही बेटी सिम्स में जीवन और मौत से जूझ रही है| घटना बिलासपुर शहर के सरकंडा के सोनगंगा कॉलोनी की है| मौके से बरामद सुसाइड नोट में पूरा व्योरा लिखा हुआ मिला|

कोरोना संक्रमण के इस दौर में अवसाद और हताशा के कई मामले सामने आये है जिसमें पीड़ित ने या फिर कोरोना  संक्रमण के शक में जान दे दी गई| स्वाद का न आना कोरोना के प्रमुख लक्षणों में से है|  इसी तरह का मामला शनिवार को न्यायधानी बिलासपुर में सामने आया|

मिली जानकारी के मुताबिक सरकंडा के सोनगंगा कॉलोनी में 60 साल की बुजुर्ग सकुन वर्मा नामक महिला अपनी 40 साल की बेटी के साथ किराये के मकान में रहती थी| उसका बेटा सचिन बाहर रहता है| महिला डेढ़ बरस पहले पति खो चुकी थी और उसके पेंशन से गुजारा करती थी|

शनिवार को उनके कुत्ते के लगातार भूकने की वजह से आसपास कम कर रहे लोगों का ध्यान गया| मकान मरम्मत कर रहे मजदूरों ने अपने ठेकेदार को यह बात बताई| उसने भी आवाज दिया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला| इसकी खबर पर मकान मालिक ने भी अपने किरायेदार को फ़ोन किया जवाब नहीं मिलने पर पुलिस को सुचना दी|

पुलिस के आने पर जब दरवाजा खोला गया तो माँ बेटी पड़े हुए थे| माँ की सांसे थम चुकी थी जबकि बेटी की सांसे चल रही थी|

दोनों को तत्काल सिम्स लाया गया। यहां डॉक्टरों ने सकुन को मृत घोषित कर दिया। श्वेता नाजुक हालत में थी ।

इधर सरकंडा पुलिस को मौके पर चूहा मारने वाला रोटेल नाम का पेस्ट का रेपर मिला। कमरे में स्टील का कप था। इसमें चूहामार घुला था। पास दो अलग-अलग पन्नों में सुसाइट नोट लिखे पड़े थे। दोनों श्वेता ने लिखा था।

पहले पत्र में स्वाद महसूस न होने ,खराश बने रहने और  स्वास्थ्य संबंधी तकलीफों से जिंदगी से पूरी तरह निराश और हताश होने और इससे निजात पाने जहर खाने का जिक्र किया गया है|

मकान मालिक संजय चक्रवर्ती  को किसी तरह से परेशान न किया जाने का जिक्र है।

साथ ही घर के सामान को लावारिस समझने  और लाश के लिए किसी भी रिश्तेदार या दावेदार को नहीं खोजने का जिक्र है| कुत्ते को भी जहर देने का जिक्र है|

दुसरे पत्र में मकान मालिक से किराये का हिसाब किताब करते संबोधित किया गया है | यह कदम उठाने के लिए माफ़ी भी मांगी गई है|