पंचांग में उल्लेखित है कोरोना महामारी,साल 2020 में महामारी का होना तय था

ज्योतिषाचार्यों ने की पंचांग की पुष्टि

रायपुर / बैकुंठपुर | कोरोना जैसी महामारी से पूरा विश्व दहल उठा है। इसकी शुरूआत तो चीन से हुई लेकिन अमेरिका जैसे विकसित देश भी इसकी चपेट से बच नही पाया। ऐसी महामारी का संकट विश्व में होना तय था। ये हम नही भारतीय सनातन धर्म के पंचांग में उल्लेखित माना जा रहा है। हिन्दु धर्म में तिथी और मुहूर्त के साथ कई त्यौहारों और दिवस देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है। जो एक साल पहले ही दे दिया जाता है,जिसे देखकर पंडित इसकी जानकारी देते है।

सतानत धर्म में पंचांग का महत्व
सतानत धर्म में हर कार्य, चाहे विवाह हो या कोई भी महत्वपूर्ण दिवस, चाहे व्यक्ति को नया कार्य करने के लिए मुहूर्त देखना हो तो प्राय हर पंडित के पास उपलब्ध पंचाग से जानकारी लिया जाता है। हलांकि आज के सोशल मीडिया के जमाने में कुछ लोग इसे नहीं भी मानते है। फिर भी वार त्यौहार इसी के आधार पर तय होते है, यहां तक कि सूर्य और चंद्रमा किस समय निकलेगा पंचांग में खगोलीय दृष्टिकोण एकदम सटीक अंकित रहता है।

पंचाग की विश्वसनीयता
अब सवाल ये खडा हो रहा है कि क्या पंचाग में लिखी हर बात सही होती है। कई बार इसके विपरित भी देखा गया है। आज पुरे विश्व में फैली कोरोना महामारी का प्रकोप भी पंचांग में उल्लेखित है। हालाकि पंचांग में महामारी का नाम दर्शाया नही गया है, लेकिन ये जरूर लिखा है कि ये महामारी प्रलयकारी सिद्ध होगा। और वैसे ही हो भी रहा है। अब तक पुरे विश्व में कारोना महामारी से लगभग 2 लाख लोगों की मौत हो गई है। वहीँ आज से 100 वर्ष पहले भी वर्ष 1912 में स्पेनिश फ्लू से विश्व के 3 से 4 करोड लोगो को अपनी जान से हाथ धोना पडा था। जो अब तक के इतिहास मे सबसे अधिक है।

पंचांग में कोरोना महामारी
कोरेाना महामारी से भारत भी अछूता नही है। भारत मे भी दिनो दिन इसका असर बढ़ता ही दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ी बात ये है कि काशी शहर को भगवान शिव के त्रिषुल पर बसा माना जाता है और यह भी माना जाता रहा है कि कभी भी काशी मे कोई भी महामारी नही फैलेगी। लेकिन इस कोरोना महामारी ने काशी को भी नही छोड़ा। इस बार काशी की मान्यता को धता बताते हुए महामारी ने बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में भी अपना तांडव मचा रखा है। ऐसे में हम पंचांग में उल्लेखित महामारी की माने तो ये कारोना को ही इंगित करता नजर आ रहा है। रायपुर से प्रकाशित श्रीदेव पंचांग में महामारी से विनाश होना लिखित है। पंचांग में विश्व पटल के नक्षत्र को दर्शाया गया है।

ज्योतिषाचार्यों का तथ्य
रायपुर महामाया मंदिर के पुजारी पं मनोज शुक्ला ने बताया कि पंचांग में महामारी से विनाश स्पष्ट रूप से उल्लेखित तो नही है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र की गतिविधि होने से जनस्वास्थ्य को भारी नुकसान होना बताया गया है। जिसे कोरोना महामारी के रूप में माना जा रहा है। वही उन्होने यह भी कहा कि पंचांग मे ये भी लिखा है कि कोरोना महामारी से निपटने के बाद भारत का स्थान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च रहेगा। यानि दूसरे देशों में भारत की पूछ परख बढ़ेगी। दूसरे देश भारत से स्वास्थ्यगत सलाह भी लेंगे।

वहीं कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर स्थित प्रेमाबाग मंदिर के पुजारी देवदत्त त्रिपाठी की माने तो काशी का पंचाग काफी लोक प्रिय और सटिक खगोलिय और सनातन धर्म की तिथियां प्रदर्शित करता आया है। काशी के पंचाग में चैत्र मास के विषय में लिखा हुआ है कि चैत्रकृष्णाचतुर्थ्य वृष्टि युगवास्तदा दुर्भिक्षमादिशेत।। वहीं चैत्र मास के 13 मार्च 2020 को चतुर्थया थी, इस माह में 12 मार्च से बेमौसम बारिश जारी थी, जो आगे 19 मार्च तक जारी रही। पंचाग में पूर्व से ही बताया गया है कि 13 मार्च के दिन बारिश होगी। पहली बार मार्च के महिने में बेमौसम बारिश और ओला वृष्टि से जनमानस भी परेशान रहा और किसान सबसे ज्यादा परेशान रहे है। ऐसे में प्रेमाबाग मंदिर के पुजारी पंडित देवदत्त त्रिपाठी ने अपना पंचाग खोलकर बताया तौ हैरानी की बात सामने आई। पंचाग में बारिश होने के स्पष्ट संकेत लिखा हुआ है। पंचांग के अनुसार 25 मार्च के पूर्व पंचाग में इस बात का उल्लेख है कि चैत्र मास की चतुर्थया पर पानी गिरेगा, इसके बाद युग बदलेगा और बडा आकाल या महामारी आएगी। उन्होने पंचाग में उल्लेखित संस्कृत के श्लोक को भी बताया। उनका कहना है कि ऐसा हर 100 वर्ष में एक बार होता ही है। यानि महामारी का आना तय इस बार तय था।