गांधी के विचारों पर स्वावलंबी बने नई पीढ़ी…

गाँधी जी के 150 वीं वर्षगांठ पर आयोजित हो रहे हैं कार्यक्रम

धमतरी। महात्मा गाँधी के 150 वीं वर्षगाँठ को विश्वस्तर पर मनाया जा रहा है। जिसमें विभिन्न संस्थाओं के द्वारा गांधी जी के जीवन दर्शन को आम लोगों के बीच पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन भी छत्तीसगढ़ के स्कूलों में जाकर छात्र-छात्राओं, शिक्षकों के बीच पहुंचकर गांधी जी के जीवन दर्शन और विचार को रख रहा है ताकि आज के युवाओं को गांधी दर्शन की जानकारी मिल सके। धमतरी जिले में भी कई शैक्षणिक संस्थाओं में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से गांधी जी के सौ पोस्टरों का प्रदर्शनी, गांधी के जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाने का सिलसिला जारी है।

                         धमतरी के कुरुद और मगरलोड विकासखंडों में एक कार्यशाला आयेजित की गई। कुरुद और मगरलोड में हो रहे इन कार्यशाला तकरीबन एक हजार छात्र-छात्राएं और सौ से अधिक शिक्षक शामिल हुए। जहां कुम्हारों, मशरूम उत्पादक, बांस के कारीगर, चित्रकार और साइकल मेकनिक के काम को व्यवहारिक तौर पर कारिगरों ने दिखाया। कार्यशाला में कुम्हार के द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला दिखाई गई। साथ ही बच्चों को यह बताया गया कि यह काम कैसे होता है, मिट्टी कहाँ से, कौनसी मिट्टी और कैसे लाया जाता है इसकी भी जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चो और शिक्षकों ने भी खुद ऐसे कार्य को करके देखा और इस तरह के कार्य को सिखने की कोशिश की। दूसरी ओर मशरूम उत्पादक ने छात्र-छात्राओं को मशरूम उत्पादन की पुरी जानकारी दी। गाँधी जी के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन भी फाउंडेशन के साथियों द्वारा कार्यशाला में किया गया। इस कार्यशाला में पहुंचे छात्र अभिशेख साहू ने कहा की कार्यशाला से बहुत कुछ सीखने को मिला। अभिषेक का कहना है कि कारीगरों का काम आसान नही होता उसक लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। उनक कार्यो को देखकर इन छात्रों को बहुत कुछ सिखने मिला।

रोचक है कार्यशाला
कुरुद की शिक्षिका मरियम शेख को यह कार्यशाला काफी रोचक लगी। शिक्षिका ने कहा कि कार्यशाला मे दी गई जानकारी को खुद सिखकर बच्चों के साथ समाज के लोगों को सिखाने मे सार्थक होगा। वहीं शिक्षक भावेश कुमार चंद्रवंशी अपने छात्र-छात्राओं को लेकर कार्यशाला में पहंचे। बच्चों के साथ शिक्षक ने भी कार्यशाला में कौशल विकास की जानकरी ली ताकि आगे चलकर बच्चों को इसकी जानकारी दे सके। उनका कहना है कि कारिगरों को काम करते देख इन बच्चों को भी स्वावलंबी बनने की उत्सुकता जागृत होती है। इस दौरान बच्चों की जिज्ञासा का जवाब भी प्रशिक्षको ने दिया।

आज और मूलयवान है गाँधी विचार
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जिला प्रमुख नवनीत बेदार ने कहा की आज हम जिस दौर में जी रहे हैं उस समय गांधी जी के मूल्य और विचार की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। इसलिए हम उनके विचारों को जन जन तक और खासकर नई पीढ़ियों तक यह बात पहुंचाना चाहते हैं। बेदार की माने तो गांधी जी के तीन मूल मंत्र बुरा मत देखो,बुरा मत बोलो और बुरा मत सुनों इस अवधारना को जन जन तक पुहंचाना ही मुख्य मकसद है। ग्राम स्वराज को पाने के लिए आज के नई पीढ़ी को गांधी के विचारों अपने भीतर समाहित करना होगा तभी हम सब गांधी बन पाएंगे।