ज्योर्तिलिंग के दर्शन करने साइकिल पर निकला ये भक्त…

हर रोज 100 किमी का तय करता है सफर, ढाई साल लगेंगे

बैकुंठपुर। देश के सभी 12 ज्योर्तिलिंग की यात्रा साइकिल पर, रोजाना 110 किमी. का सफर, ढाई साल में पूरा करने का लक्ष्य। ये हैं उप्र के अमरोहा जिल के बंद्दरायू से निकले पंडित शुभम शर्मा। 8 ज्योर्तिलिंग के दर्शन के बाद वे बैकुंठपुर होते हुए 9वे ज्योंर्तिलिंग बाबाधाम के लिए निकले तो रात यहां गुजारी और प्रेमाबाग मंदिर के दर्शन के बाद रवाना हुए। सड़क पर साइकिल सवार इस युवक से हर कोई बात करना चाह रहा था।, हर कोई उनकी इस यात्रा की कहानी जानने को उत्सुक दिखा। लोगों के आकर्षण और जिज्ञासा का विषय बने शुभम से हमने उनके इस सफर पर बात की। उन्होंने अपना मकसद और अनुभव हमारे साथ साझा किया।

पंडित शुभम शर्मा कहते हैं वे सायकिल से देश भर के 12 ज्योर्तिलिंग की यात्रा पर निकले हैं। इस यात्रा की रणनीति बनाने में उन्हें डेढ वर्ष लग गए। वे 13 मई को अमरोहा जिले से इस यात्रा पर निकले। सबसे पहले वे गुजरात गए जहां उन्हेंने पहले ज्योर्तिलिंग सोमनाथ के दर्शन किए, उसके बाद महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और फिर केदारनाथ के साथ अन्य ज्योर्तिलिंग के दर्शन करते हुए त्रियंबकेश्वर नासिक पहुंचे। नासिक से वो बाबा धाम जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस यात्रा को पूर्ण होने में उन्हें ढाई वर्ष लगेंगे, बाबाधाम वे 7 दिन में पहुंचेंगे। वहां से गुजरात जाएंगे, उसमें उन्हें पूरा एक महीना लगेगा। वे बताते हैं दिनभर लगभग 100. किमी की यात्रा के बाद वे जंगल पहाड़ मंदिर में विश्राम कर लेते हैं। बीते रात बैकुंठपुर पहुंचे फिर प्रेमाबाग स्थित शिवमंदिर का दर्शन किया। अब यहां से बाबा धाम का सफर।

जीपीएस से लैस है सायकल
जिस सायकल में 12 ज्योर्तिलिंग की यात्रा में पंडित शुभम शर्मा निकले है, उसमें उन्होंने जीपीएस लगा रखा है, ताकि उनकी लोकेशन घरवालों का पता रहे। इसके अलावा सायकल की मरम्मत का पूरा सामान के साथ हर जरूरत का सामान सायकल में साथ है। सायकल के आगे और पीछे यात्रा की जानकारी लिखी हुई है। सायकल में हर वो जरूरत की चीजें साथ हैं जो उन्हें यात्रा के दौरान काम आती है।

पर्यावरण और धार्मिक द्वेष से चिंतित
आत्मविश्वास से भरे श्री शर्मा कहते हैं वे नई पीढ़ी को संदेश देना चाहते हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रति सचेत रहने और धार्मिक-सांस्कृतिक एकता को बचाये रखने की जरूरत है। आज मौसम परिवर्तन से हर कोई चिंतित है। दिल्ली में ऑक्सिजन कैफे खोले गए है जो हमारे लिए शर्म की बात है, पेड़-पौधे बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य है। दूसरा हमारी संस्कृति की जानकारी लोगों को देना कि पहले हमारा देश क्या था, आज देश का क्या माहौल है। सभी धर्मों का सम्मान करना ये लोगों का बताना है।