यह स्टापडेम है जनाब…..पानी रुकता नहीं बस…..

स्टापडेम निर्माण में हुई अनियमितता

बैकुंठपुर । यह तस्वीर है कोरिया के सोनहत ब्लाक के एक स्टापडेम की। मनरेगा के तहत इसके निर्माण में किस कदर अनियमितता बरती गई होगी साफ नजर आ रहा है। पानी यहां रुकता नहीं है लिहाजा ग्रामीण इसे रपता कहकर मजाक उड़ाते हैं। इस संबंध में जिला पंचायत की सीईओ तुलिका प्रजापति का कहना है कि निर्माण कार्य की जांच कराई जाएगी, कड़ी कार्यवाही होगी।

भ्रष्टाचार की भेंट चढा स्टापडेम
ये तस्वीर जो आप देख रहे हैं ये स्टापडेम की है, राशि स्टापडेम बनाने के लिए जारी की गई, परन्तु घटिया और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके इस स्टापडेम से अब इसके नीचे से पानी निकल रहा है, ग्रामीण इसे अब रपटा कह कर मजाक उडा रहे है, उन्हे दुख इस बात का है कि मनरेगा के तहत ठेकेदारों ने इसका निर्माण किया और पानी रूकने के लिए बजाय नीचे से निकल रहा है, यदि पानी रूकता तो वो खेती के काम आता है, अब ये किसी काम का नही रहा है।
कोरिया जिले में मनरेगा के तहत निर्माण कार्यो में जमकर लापरवाही और भ्रष्टाचार किया जा रहा है। फर्जी मस्टररोल के इस खेल में ठेकेदारों की पौ बारह है, जिले के सोनहत तहसील के बोढार ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत विक्रमपुर नाले पर स्टापडेम का निर्माण की राशि स्वीकृत की गई, लगभग 20 लाख रू
की लागत से इसका निर्माण शुरू हुआ।

ग्रामीण है नाराज
ग्रामीणों की मानें तो विक्रमपुर नाले पर इस स्टापडेम का निर्माण अप्रैल 2019 में पूर्ण हो गया, जून, जुलाई में गर्मी में स्टापडेम कई जगह दरारें आ गईं। इस कार्य में एक ठेकेदार ने काम करवाया, पानी को रोकने के लिए बनाया गया स्टापडेम से अब लगातार पानी बह रहा है, स्टापडेम जिंदा नाले पर बनाया गया। ग्रामीण बताते हैं कि निर्माण के समय ही बड़े बड़े बोल्डर से इसका जैसे तैसे निर्माण कराया गया, तब भी उन्होंने विरोध किया था, परन्तु किसी ने उनकी नहीं सुनी, अब स्टापडेम कई जगह से क्रेक भी हो चुका है। जिंदा नाले में जैसा पानी पहले जाता था, अब भी वैसा ही जा रहा है अंतर सिर्फ इतना है कि अब नव निर्मित स्टापडेम के नीचे से पानी जा रही है।

निर्माण कार्यो में हाल बेहाल
कोरिया का सोनहत विकासखंड निर्माण कार्यो में भ्रष्ट्राचार को लेकर बीते 10 महीनों से फिर सुर्खियों में है, मनरेगा के तहत कुंआ निर्माण में जमकर धांधली बरती गई है, सिर्फ एक ग्राम पंचायत ही नहीं वरन कई ग्राम पंचायतों में एक जैसा हाल है,। दूसरी ओर लाल ईट से हुए निर्माण कार्यो में रायल्टी की चोरी की जा रही है, जबकि फ्लाईऐश की ईट लगाने से रायल्टी में छूट मिलती है, लगाई जा रही लाल ईट के एवज मे रायल्टी नहीं काटी जा रही है। मनरेगा के तहत कार्यो में ठेकेदारी की जा रही है,राजनीतिक दबाव ऐसा है कि कोई भी अधिकारी किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने को तैयार नहीं है, वही ग्रामीण अब प्रधानमंत्री को शिकायत करने का मन बना रहे हैं।