कांकेर का ये गांव विकास से कोसो दूर, राज्य सरकारो ने बिना विकास लूटी वाहवाही

20 सालों से मिल रहा केवल आश्वासन

तामेश्वर सिन्हा,कांकेर | छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण को 20 साल हो चुके हैं, तब से अब तक कांग्रेस और भाजपा ने सत्ता संभाली। सभी ने विकास का दावा तो किया। साथ ही इस दौरान बीजेपी सरकार हो या वर्तमान की कांग्रेस सरकार सभी ने विकास के नाम पर खूब वाहवाही लूटी। लेकिन इन दावों की हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

बुनियादी सुविधाओं से दूर ग्रामीण
छत्तीसगढ़ का एक आदिवासी बाहुल्य गांव ,जो 12 सालों से एक अदद पुल के अभाव में बुनियादी सुविधाओं से दूर है। उत्तर बस्तर कांकेर विकासखंड के ग्राम पंचायत मांदरी में आज भी ग्रामीण लकड़ी की पुलिया से होकर आवागमन करने के लिए मजबूर हैं। जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर मांदरी के आश्रित ग्राम साल्हेभाट से किरगापाटी के बीच झुरा नाला में पुल न होने से किरगापाटी के ग्रामीण बांस की अस्थाई पुलिया बनाकर आवागमन करते है। ग्रामीण एक अदद पुल के निर्माण के लिए 12 सालों से सरकार से गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं।

यह इलाका कांकेर जिला मुख्यालय से महज 12 किमी दूर स्थित है। उसके बाद भी ग्रामीण कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हम राशन सामान लेने तीन किमी दूर ग्राम मांदरी तक का सफर तय करते हैं। यहां पर राशन दुकान न होने से हमें हर माह छह किमी सिर्फ अनाज लेने जाना पड़ता है। पुलिया निर्माण और राशन दुकान के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से, जनदर्शन, लोक सुराज के साथ-साथ जनसमस्या निवारण शिविर में भी आवेदन किया मगर आज तक हमारी मांग पूरी नहीं हो पाई।

बांस बल्ली पर ये पुलिया
मांदरी के ग्राम प्रधान दशरथ कुरेटी बताते है झुरा नाला के उस पर मांदरी पंचायत अन्तर्गरत 2 गांव आते है जिनका सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन दुकान मांदरी में है मांदरी आने उन्हें 3 किमी सफर तय करना पड़ता है लेकिन पुल नही होने के कारण उन्हें 8 से 9 किमी दूसरे रास्ते से आना पड़ता है। बरसात के 4 महीने तो पुल के आभाव में रास्ता बंद हो जाता है।

साल्हेभाठ के एक ग्रामीण कहते है गर्भवती माताओं को बहुत दिक्कत का सामाना करना पड़ता है 108 या महतारी एक्सप्रेस पुल नही होने से दूसरे रास्ते से आना पड़ता है नही तो पुल तक लाया जाता है फिर गाड़ी में बैठाया जाता है।

उप सरपंच का कहना है हम लोग 12 साल से एक पुल के लिए इंताजर कर रहे है लेकिन साल बीतते गए और हमारी समस्या वही की वही है। गांव में कोई बीमार पड़ जाए,स्कूली बच्चे,राशन लेने सभी के लिए तकलीफे उठाना पड़ रहा है।

बहरहाल ग्रामीणों की व्यथा से साफ है कि सरकार कोई भी हो सभी नेता कुंभकर्णीय नींद में ही सोये हुए है। सरकार द्वारा किए गए विकास कार्य केवल कागजों में ही सिमट कर रह गया है। अब इन ग्रामीणों को भूपेश सरकार से आस है कि ये सरकार इनके दर्द को समझेगी और इस गांव का विकास होगा। अब आस मे ग्रामीण केवल अच्छे समय का इंतजार कर रहे है।

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