भाई के साथ तीन बेटियों ने भी दिया मां को कांधा

समाज के सामने रखी नई मिसाल

पिथौरा। अब तक देखा जाता रहा है कि इकलौती कन्या संतान अपने माता-पिता की अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार करती है। लेकिन पिथौरा की इन बेटियों ने अपने भाई के होते हुए भी अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। समाज के सामने मिसाल पेश की कि वे तन-मन से कमजोर नहीं। समाज ने भी उनके इस फैसले को स्वीकार भी किया और भारी संख्या में इस अंतिम विदाई में शामिल हुए। ज्ञात हो कि मृतिका सामाजिक कार्यकर्ता थी। समाज के लिए समर्पित मृतिका ने अपनी बेटियों को भी बेटों की ही तरह पाला।

                               महासमुंद जिले के साहू समाज कौड़ियां परिक्षेत्र क्रमांक एक पिथोरा के ग्राम कौहाकुडा में शिक्षक दरस राम साहू की पत्नी सावित्री साहू का निधन हो गया। बेटी यामिनी, नंदनी, अंजलि व भाई किशन (कान्हा) ने कंधा देकर अपनी मां को अंतिम विदाई दी। बेटियों द्वारा अर्थी को कंधा देना क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा। ज्ञात हो कि सावित्री साहू पारिवारिक दायित्व निभाते हुए साहू समाज कौड़ियां की सक्रिय सदस्य, तहसील साहू संघ पिथोरा में संयुक्त सचिव व मां कर्मा महिला जागृति मंच की सक्रिय सदस्य रहकर समाज की सेवा कर रही थी।

सामाजिक बदलाव के संकेत-गंगा प्रसाद
छ ग प्रदेश साहू न्याय प्रकोष्ठ के सदस्य गंगा प्रसाद साहू ने उक्त मामले को सामाजिक बदलाव का संकेत बताया है। साहू ने कहा कि अब समय है महिलाओं का पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चलने का। समाज द्वारा लगातार महिलाओं को पुरुषों के बराबर खड़े करने का प्रयास किया जा रही है। अब पति खो चुकी महिला को अपने ही परिवार के शुभ कार्यो में आशीर्वाद नही देने की परंपरा भी समाज ने समाप्त कर दी है। ऐसा उदाहरण मुनगा सेर की एक महिला ने अपने पुत्र की शादी में उसे आशीर्वाद देकर परम्परा तोड़ी। अब दूसरी कड़ी में ग्राम कौहकूड़ा की बेटियों ने मां की अर्थी को कन्धा देकर मात्र पुरुषो के कन्धा देने की परंपरा तोड़ दी। ज्ञात हो कि इसके पूर्व साहू समाज द्वारा शव पर सभी शामिल लोगों के चादर(कपड़ा) चढ़ाने की परंपरा को भी समाप्त कर चादर की कीमत चढ़ाने का प्रावधान किया। जिससे जुटे रुपयों को गरीबों के हित में लगाया जा रहा है।