कोरिया के बंजर जमीन उगल रहे टनों अनाज…

समितियों में किसानों के पंजीयन ने खोल दिए राज

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ में अभी धान खरीदी शुरू नहीं हुई है। पर भूपेश सरकार के लिए सिरदर्द अभी से शुरू हो गया है। दिसंबर से खरीदी किए जाने के फैसले पर विपक्षी भाजपा आंदोलन में जुट गई तो चोरी छिपे खरीदे जा रहे धान जब्त करने में प्रशासन ने एड़ी-चोटी एक कर दिया है। राज्य सरकार जहां केंद्र सरकार पर सेंट्रल पूल में चावल खरीदने की अनुमति देने में हीला-हवाली का आरोप लगा रही है तो दूसरी ओर विपक्षी भाजपा भूपेश सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है। प्रदेश के बाहर से आने वाला अवैध धान भी एक चुनौती बनकर सामने आ रहा है। अब मामला कुछ और भी है। दरअसल समितियों में कई ऐसे किसानों के पंजीयन ऐसे हैं जिनकी बंजर जमीनें टनों अनाज उगल रही हैं।

एक ओर राज्य सरकार अवैध भंडारण और कोचिए के खिलाफ कार्यवाही कर खरीदी को पारदर्शिता बनाने में जुटी है, दूसरी ओर राजस्व अमले की मिलीभगत से कई ऐसे किसान जिनकी भूमि पर किसी भी तरह की खेती नहीं होती, उन्होंने पंजीयन 100-100 क्विंटल का करा रखा है। ऐसे में तय है कि खरीदी शुरू होते ही बाहर का धान इसमें खपायेगें, वहीं धान खरीदी की तैयारी में जुटा प्रशासन ने हर समिति में बारदाना पहुंचा दिया है।

                 जानकारी के अनुसार कोरिया जिला प्रशासन ने अवैध धान भंडारण को लेकर 13 प्रकरण दर्ज किए है, जिसमे 924 क्विंटल से ज्यादा धान जब्त भी किया है। आगामी 1 दिसंबर से धान खरीदी शुरू होना है। वहीं सूत्रों की माने तो जिले की सीमा से लगे क्षेत्रों में कई किसानों ने अपनी बंजर भूमि का पंजीयन करा रखा है, राजस्व अमले की मदद से कई किसानों ने बंजर भूमि पर 100-100 क्विंटल धान उगाया जाना बताया गया है, और बकायदा पंजीयन भी हो गया है।

                                ऐसे में खरीदी शुरू होते ही पहले ऐसे किसानों को बारदाना मिल जाएगा और दूसरे राज्यों का धान आसानी से बेचे जाने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रशासन को सीमावर्ती क्षेत्रों में धान की फसल का भौतिक सत्यापन कराए जाने की पहल करनी होगी, क्योंकि अभी से ऐसी शिकायते आम होती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की माने तो कई लोगों ने इस तरह धान खरीदी में गड़बड़ी करने का प्लान तैयार कर रखा है, ऐसे लोगों पर रोक लगाए जाने की बहुत जरूरत है। नहीं तो दूसरे राज्यों का धान यहां आसानी से खपाया जा सकेगा। प्रशासन को धान खरीदी समिति बरबसपुर,. माडीसरई, जनकपुर, केल्हारी, कंजिया, कोटाडोल, खडगवां, पोडी और कोडा पर कड़ी नजर रखे जाने की जरूरत है। यहां के समिति प्रबंधकों को भी धान खरीदी पर आने वाले धान की आवक पर पैनी नजर रखना होगा।

1 हजार से ज्यादा बारदाना है उपलब्ध
कोरिया जिले के बारदाना गोदाम में 1056 गाठान बारदाना भी मौजूद है, गोदाम प्रभारी की माने तो 474 गठान बारदाना भेजा जा चुका है। बीते वर्ष को 16 गठान बारदाना उनके पास है, जबकि इस वर्ष 1514 गठान बारदाना आया था, जिसमे 474 गठान बारदाना समितियों को भेजा जा चुका है। जिसमें बरबसपुर 25. माडीसरई 20, जनकपुर 20, कंजिया 10, कोटाडोल 10 कोडा 30, केल्हारी 40, चेनपुर 25, घुटरा 24, रजौली 15, सोनहत 15, पटना 30, गिरजापुर 30, खडगवां 30, पोडी 25, जिल्दा 25, छिंदडांड 20 गठान भेजा जा चुका है।

पड़ोसियों पर नजर
सरकार ने किसानों से ढाई हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की योजना बनाई है। इस स्थिति में पड़ोसी राज्यों के कारोबारियों की नजर छत्तीसगढ़ पर है। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में धान का समर्थन मूल्य 1850 रुपये है, वहीं ओडिशा में धान की खरीदी सोसायटी में नहीं मंडी में होती है। यहां व्यापारी बोली लगाकर धान खरीदी करते हैं। यही कारण है कि यहां के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पाता। इस स्थिति में कारोबारी छत्तीसगढ़ में ज्यादा से ज्यादा धान बेचकर मुनाफा कमाना चाह रहे हैं।

कड़ी कार्रवाई होगी-खाद्य अधिकारी
इस संबंध में जिला खाद्य अधिकारी गणेश राम कुर्रे ने बतायाकि कलेक्टर साहब से अनुमति मिल चुकी है, एसडीएम, तहसीलदार ऐसे पंजीयन की जांच करेंगे, और सामने आने पर कड़ी कार्यवाही होगी।

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