अंबिकापुर में नामवापसी पर हंगामा, गालीगलौच और मारपीट में उतारू भाजपा-कांग्रेस के नेता

पार्षद प्रत्याशी का अपहरण कर नाम वापसी कराने का आरोप

अंबिकापुर। नगरीय निकाय चुनाव के अंतिम दिन नामांकन वापसी की प्रक्रिया चल रही थी। दोपहर करीब 3 बजे सहायक निर्वाचन अधिकारी एसडीएम अजय त्रिपाठी व हरेश मंडावी के कार्यालय में भाजपा व कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ता पहुंचे। यहां जाकिर हुसैन वार्ड से भाजपा प्रत्याशी सतपाल अरोरा को अपहरण कर नाम वापसी कराने का आरोप भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेसियों पर लगाया। इसी गहमा-गहमी के बीच भाजपा व कांग्रेस नेताओं के बीच गाली-गलौज होने लगी। इसी दौरान अचानक उनके बीच जमकर मारपीट हो गई। वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। मौके पर एडिशनल एसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। नगरीय निकाय चुनाव के अंतिम दिन नामांकन वापसी की प्रक्रिया चल रही थी। नामांकन फार्म वापस लेने की निर्धारित समय दोपहर ३ बजे से कुछ समय पूर्व ही अचानक सहायक निर्वाचन अधिकारी एसडीएम अजय त्रिपाठी व हरेश मंडावी के कार्यालय में भाजपा पदाधिकारी व कार्यकर्ता पहुंचे। उन्होंने जाकिर हुसैन वार्ड से घोषित भाजपा प्रत्याशी सतपाल अरोरा को कुछ कांग्रेसियों द्वारा जबरजस्ती घर से अपहरण कर नामांकन फार्म वापस कराए जाने का आरोप लगाया। इसे लेकर एसडीएम कार्यालय के बाहर खड़े कांग्रेस-भाजपा पदाधिकारियों व समर्थकों के बीच जमकर गाली-गलौज हुई।

विवाद इतना बढ़ गया कि भाजपा व कांग्रेस दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अखिलेश सोनी, अंबिकेश केशरी व कांग्रेस से जाकिर हुसैन वार्ड के प्रत्याशी शफी अहमद ने सहायक निर्वाचन अधिकारी हरेश मंडावी के कार्यालय में पहुंचे, जहां भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह अरोरा द्वारा जो नामांकन फार्म वापस लिए जाने के लिए आवेदन जमा किया गया था, उसे शफी अहमद ने वापस करवा दिया। इसके बाद बाहर आकर दोनों पक्ष के पदाधिकारियों ने इसकी जानकारी अपने-अपने समर्थकों को दी। इसके बावजूद कांग्रेस व भाजपा के पदाधिकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की होती रही। किसी तरह वरिष्ठ पदाधिकारियों के बीच-बचाव करने पर मामला शांत हुआ। दोनों पक्षों के समर्थक अलग-अलग खड़े थे।

कलक्टोरेट परिसर से खदेड़ा बाहर
विवाद के दौरान पुलिस ने किसी तरह भाजपा-कांग्रेस के समर्थकों को कलक्टोरेट परिसर से दूर खदेड़ा। लगभग आधे घंटे से भी अधिक समय तक यह विवाद चलता रहा। इसके बाद दोनों पक्ष के लोग कलक्टोरेट से वापस चले गए।

भूले राजनीतिक मर्यादा
भाजपा व कांग्रेस दोनों ही दल अपने आपको अनुशासन वाली पार्टी बताते है, लेकिन सोमवार को कलक्टोरेट परिसर में जो घटनाक्रम हुआ उससे राजनीतिक मर्यादा तार-तार होती नजर आई। दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठों के सम्मान का ख्याल नहीं रखा और हाथापाई के साथ ही एक-दूसरे के लिए अभद्र भाषा का भी जमकर उपयोग किया।