Video:IAS खेतान के ट्वीट पर छत्तीसगढ़ में आया राजनीतिक भूचाल

भाजपा ने सरकार पर दागा सवाल

रायपुर | छत्तीसगढ़ के आईएस चित्तरंजन खेतान के ट्वीट ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। इधर खेतान का ट्वीट भी लगातार आ रहा है। कभी सफाई तो कभी और कुछ लिखकर। ऐसे में राजनेताओं को अब बैठे बिठाए गरमा गरम खबर मिला गया और एक-दूसरे पर तीर छोड़ने का भी मौका मिल गया।

दरअसल,छत्तीसगढ़ आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष और रेवेन्यू बोर्ड के चेयरमैन चित्तरंजन खेतान ने कलेक्टरों के बचाव में 8 सितंबर को एक ट्वीट किया, जिसमे उनोने लिखा कि “Collector/DM पर ही सारी ज़िम्मेदारी और उसी से सबकी नाराज़गी। वो बहुत अच्छा भी और बहुत ख़राब भी। नेताओं के काम वो बनाए और नेताओं की डाँट वो खाए। क्या करें क्या न करें, बोल मेरे भाई?”

इस ट्वीट के बाद ही प्रदेश के नेताओं को लगा की उन पर अधिकारी ने टिपण्णी कर दी है। बस क्या था, जुबानी जंग छिड़ गई। तब IAS खेतान ने देखा की भूचाल आ गया तो फिर ट्वीट कर पहले ट्वीट पर सफाई देते हुए लिखा- “किसी दूसरे राज्य के DM पर कारवाई के संदर्भ पर किए गए Tweet की ग़लत व्याख्या की जा रही है। सामान्य Tweet था कि DM पर नीतियों व योजनाओं के क्रियान्वयन का अत्यधिक भार व दवाब नेताओं का रहता है। क्या-क्या करे एक अकेला ? पहले जैसी Limited योजनाएँ नहीं रही।”

खेतान छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ नौकरशाह हैं और उनकी पूछ परख भी अच्छी खासी है। कलेक्टरों के लिए किए गए ट्वीट के बाद प्रदेश के प्रमुख विपक्षी दल भाजपा भूपेश सरकार पर हमला तेज कर दिया है।

भाजपा का सरकार पर निशाना
भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने IAS अधिकारी सीके खेतान के ट्वीट को अधिकारीयों की नाराजगी सरकार पर होने की बात कह दिया है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि प्रदेश के आला अधिकारी और कर्मचारी राज्य सरकार के निर्णय से खासे परेशान हैं। सरकार इन अधिकारी कर्मचारी से काम तो करवा रही है, लेकिन नीतियों को छुपाने की भी पुरजोर कोशिश भी कर रही है। 2 वर्षों में भूपेश सरकार ने अब तक अधिकारी और कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित ही नहीं कर पाई है। यह बात आज एक वरिष्ठ आईएएस के ट्वीट ने सरकार के मंसूबे को उजागर कर दिया है। यही कारण है कि 2 साल में भूपेश सरकार ने जो भी योजनाएं लागू की उसे सफलता की ओर नहीं ले जा पाई और सभी योजनाएं धराशाई हो गई। संजय श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं को प्रदेश के अधिकारी और कर्मचारी ही अमलीजामा पहनाते हैं, इसलिए उन्हें विश्वास में लेना सबसे पहला सरकार का दायित्व और कर्तव्य होता है। तभी,सभी योजनाएं आम जनता तक सही तरीके से पहुंच पाती है, अन्यथा योजनाएं असफल हो जाती हैं। इस ट्वीट के बाद राज्य शासन को सजगता से अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को विश्वास में लेकर ही अगला कदम उठाना होगा,तभी जाकर छत्तीसगढ़ समृद्ध छत्तीसगढ़ बन सकता है।

 

वहीं सत्ता पक्ष की ओर से इसे तूल न देते हुए कांग्रेस संगठन ने जवाब देने से बचते रही और कह दिया की सरकार के प्रवक्ता ही इस पर जवाब देंगे। लेकिन अफसर के ट्वीट ने सरकार को भी सोचने पर मजबूर तो कर ही दिया है। साथ होइ विपक्ष को भी अब एक और मुद्दा मिलने से सरकार राजनितिक रूप से घिरने लगी है। अब सरकार क्या मोड़ लेती है, ये तो समय बताएगा।

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