हाथियों के उत्पात से सकते में ग्रामीण, रातों की नींद उडी

वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने किया विभाग का बचाव

बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ में हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों के मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। सरगुजा और कोरिया इन दो क्षेत्र में सबसे ज्यादा ग्रामीण हाथी से पीड़ित हैं। मदमस्त हाथी जंगलो से निकलकर ग्रामीण क्षेत्रो में पहुंच जाते है। गांव में पहुंचकर हाथी किसानो के खेत में पहुंचकर खड़ी फसलों को रौंदकर पूरी तरह से बर्बाद करने में कहीं पीछे नहीं है।

              वही इन हाथियों के सामने कोई ग्रामीण आ गया तो खैर नहीं। कोरिया और सरगुजा क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में लगातार तीन ग्रमीणो की दर्दनाक मौत हुई है। गांव में कई घरो को भी हाथियों के दल ने नष्ट कर दिया है। अब इस क्षेत्र के लोग रात में अपने कच्चे घरो से दूर होकर किसी दूसरे के पक्के मकान में आश्रय लेने में मजबूर है। लोग रात भर जागकर अपने-अपने खेतों और घरों का पहरा भी दे रहे है।

 

वन विभाग से नाराजगी
हाथियों के आतंक से निजात नहीं मिलने से लोगों की नाराजगी वन विभाग पर है। क्षेत्रवासियों का कहना है की वन विभाग का अमला इन हाथियों को पकड़ने में दक्ष नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी सुरक्षा का गुहार लगाए हैं लेकिन अब तक हाथियों से बचाव के कोई ठोस पहल नहीं की गई है। आपको बता दें की वन विभाग के आंकड़ों के हिसाब से प्रदेश में अभी हाथियों की अनुमानित संख्या 254 है। इसमें से सरगुजा वन वृत्त में 110, बिलासपुर वृत्त में 121 व रायपुर वन वृत्त में 23 हाथी हैं। वनमंडल ,कोरिया, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, जशपुर, कोरबा, मरवाही, रायगढ़, महासमुंद क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित माने जा रहे है। हलाकि हाथियों का दल शहरी क्षेत्रो के आसपास भी देखा गया है। शहरी क्षेत्रों में हाथियों को रोकने में फिलहाल वन विभाग सफल तो हुआ है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रो में काफी मशक्कत वन विभाग को आज भी करनी पड़ रही है।

 

सेल्फी लेने में मस्त है युवा
दहशत के माहौल के बीच ग्रामीण युवा हाथियों के झुण्ड के साथ सेल्फी लेते भी दिखाई दे रहे हैं। लोगो के मना करने के बावजूद भी युवा मनचलों को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। हाथी के तालाब में नहाते हुए कैमरे में कैद करने से भी ग्रामीण बाज नहीं आ रहे है। ऐसे स्थिति में हाथी के बिचकने से काल के गाल में समाने से कोई इन्हे नहीं रोक सकता। बीते तीन दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ा है। सूरजपुर के बिहारपुर रेंज में एक व्यक्ति की हाथियों के दल के चपेट में आने से मौत हो गयी। इस क्षेत्र के 27 हाथियों का दल भ्रमण कर रहा है ऐसे में मृतक उनके संपर्क में आ गया, हाथियों ने उसे मौके पर ही मार डाला। दूसरी ओर बहरादेव समूह के 13-14 हाथियों का दल है। आसपास के ग्राम सोनगरा, बगड़ा, डुमरिया बगड़ा में ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त है।

 

वन मंत्री ने किया वन विभाग का बचाव
प्रदेश के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने विभागीय अमले के द्वारा किये जा रहे काम को सकारात्मक बताया। मंत्री अकबर ने कहा की वन विभाग के द्वारा हाथियों में कॉलर आईडी लगाया गया है जिससे हाथियों के दलों पर निगरानी किया जा सके। ट्रैकिंग के आधार पर जैसे ही वन विभाग के अमले को हाथियों के गांव में घुसने की जानकारी होती है तो उसी समय ग्रामीणों को इसकी सुचना देकर सचेत कर दिया जाता है। ताकि ग्रामीण क्षेत्र से हट जाए। इसके साथ ही उत्पाती हाथियों को वन विभाग ट्रेंकुलाइज कर अपने काबू में भी करता है। जिससे ग्रामीणों को कोई नुक्सान न हो। वन मंत्री ने कहा कि हाथियों की सूंघने की शक्ति अन्य जानवरों से 15 हजार गुना अधिक है। यही कारण है कि शराब या धान के गंध से उसके करीब पहुच जाते है और घर या खेत को नुकसान पहुचते है। उन्होंने माना कि शहरी क्षेत्र में हाथियों का दल पहुंच चुका है, लेकिन इसकी सूचना वन विभाग द्वारा लगातार दिया जाता है। लेकिन आरंग और बलोदाबाजार के लोगों को अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ा। वन मंत्री ने ग्रामीणों से अपील की है की ग्रामीण हाथियों से छेड़खानी न करे.हाथी दल के सामने हॉर्न न बजाये और न ही सेल्फी लेने की कोशिश करे। वन विभाग हाथियों से बचाव के लिए पूरी तरह से चिंतित हैं। वन विभाग ग्रामीणों को सचेत भी करता रहता है ताकि हाथियों की चपेट से ग्रामीण दूर रह सकें।

लेमरू एलीफेंट प्रोजेक्ट होगा कारगर – मोहम्मद अकबर
हाथियों के आतंक से बचने के लिए अब राज्य सरकार ने लेमरू एलीफेंट रिजर्व की परिकल्पना की है। जिसके अंतर्गत उत्पाती हाथियों को लाकर उसके स्थिति को सामान्य किया जाएगा। लेमरू प्रोजेक्ट के लिए 1995 वर्ग किलोमीटर में रिजर्व एरिया बनाया गया है। आगे चलकर इसके परिक्षेत्र को और विकसित किया जाएगा। लेमरू प्रोजेक्ट में हसदेव अरंड एरिया के केचमेंट को शामिल किये जाने की बात वन मंत्री ने कही। उन्होंने कहा की इससे हाथियों को पानी की व्यवस्था हो सकेगी। वहीं उन्होंने कहा कि कुमकी हाथियों को दल में शामिल किया गया था लेकिन उसका कोई खास परिणाम देखने को नहीं मिला है। लेमरू प्रोजेक्ट के चलते किसी ग्रामीणों को उस क्षेत्र से निकाले जाने को उन्होंने अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से यदि कोई प्रोजेक्ट के आसपास के क्षेत्र को छोड़ना चाहता है तो वह हट सकता है, लेकिन सरकार के द्वारा कोई दबाव नहीं है।