सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा पर हुई कार्रवाई,कलेक्टरी से धोना पड़ा हाथ,राजनीति तेज

सरगुजा संभाग में और भी है इस तरह के अधिकारी, जानिए कौन....

रायपुर | कोरोना के इस कठिन दौर में सिविल सेवकों की सहानुभूति से इतर हटकर एक कलेक्टर की हेकड़ी साफ दिखाई दे रही है। इससे जाहिर होता है कि आज का एक युवा कलेक्टर अपने सेवा,सभ्यता और मूल सिद्धांतों से हट चुका है। 

मामला है सूरजपुर का। सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा सरेराह एक युवक को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि युवक कलेक्टर से पहले कुछ जानकारी लेने की कवायद करता है, लेकिन कलेक्टर पहले तो झिड़की देते हैं उसके बाद दोबारा कलेक्टर वापस बुलाकर उसकी मोबाइल को सड़क पर पटक देता है। उसके बाद एक तमाचा उस युवक के गाल पर कलेक्टर का पड़ जाता है। बात यहीं खत्म नहीं हुई, कलेक्टर ने बाकायदा अपने वर्दीधारी पुलिस को युवक को मारने के लिए निर्देशित भी करता है। 

कलेक्टर ने अपने ओहदे का हद तो पार कर ही दिया था। लेकिन उसके बाद उस युवक को पुलिस से पिटवा कर अपनी सारी हदें पार कर दी। 

जानकारी के मुताबिक युवक अपनी दादी की दवाई लेने के लिए घर से बाहर निकला है। इसी दौरान लॉकडाउन का मुआयना करने सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा सड़कों पर निकलते हैं। युवक ने कलेक्टर को घर से निकलने की जानकारी भी दी। लेकिन कलेक्टर अपने रुतबे के गुमान में युवक की बात ही नहीं सुनी और एक थप्पड़ जड़ दिया।

युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसमें कलेक्टर की थू-थू भी हो रही है। 

IAS एसोसिएशन नाराज

कलेक्टर रणबीर शर्मा के कृत्य पर IAS एसोसिएशन ने भी कड़ी आपत्ति जताई है भारतीय प्रशासनिक सेवा संघ ने अपने टि्वटर हैंडल पर लिखा-

“आईएएस एसोसिएशन कलेक्टर सूरजपुर, छत्तीसगढ़ के व्यवहार की कड़ी निंदा करता है। यह अस्वीकार्य है और सेवा और सभ्यता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सिविल सेवकों को सहानुभूति रखनी चाहिए और हर समय समाज को एक उपचारात्मक स्पर्श प्रदान करना चाहिए, खासकर इस कठिन समय में।”

माफ़ी काम नहीं आई 

सूरजपुर कलेक्टर रणबीर शर्मा अपने इस व्यवहार पर माफी भी मांगी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि आवेश में आकर उन्होंने एक युवक को तमाचा मारा है हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युवक गलत जानकारी और अभद्र व्यवहार कर रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद पहले तो कलेक्टर ने अपनी बात सही साबित करने की कोशिश की। यहाँ तक की कलेक्टर ने वीडियो को एडिट कर वायरल करने की बात कही थी। आखिरकार उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया।

CM  भूपेश की फौरी कार्रवाई 

मामला बिगड़ने का अंदेशा होने के बाद ही कलेक्टर शर्मा ने ये वीडियो जारी किया लेकिन कलेक्टर का माफीनामा भी मुख्यमंत्री के सामने नहीं चला। सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्वयं इस पर संज्ञान लेकर कलेक्टर को सूरजपुर से हटाने का तुरंत निर्देश जारी करने निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीटर हैंडल पर लिखा कि “एक नवयुवक से दुर्व्यवहार बेहद निंदनीय है। छत्तीसगढ़ में इस तरह का कोई भी कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”  साथ में मुख्यमंत्री ने इस घटना से क्षुब्ध होकर उस नवयुवक और उनके परिजनों से खेद व्यक्त भी किया है। मुख्यमंत्री ने नवयुवक के क्षतिग्रस्त मोबाईल की भरपाई भी करने नया मोबाइल युवक को देने कहा है।

CM  भूपेश के निर्देश के बाद सूरजपुर कलेक्टर रणवीर शर्मा को तुरंत हटाने के आदेश सामान्य प्रशासन विभाग से जारी कर दिया गया है। जिसके बाद सूरजपुर में रायपुर जिला पंचायत के सीईओ गौरव कुमार सिंह को सूरजपुर जिले का नया कलेक्टर पदस्थ किया गया है। वहीं रणबीर शर्मा को सूरजपुर से हटाकर मंत्रालय में संयुक्त सचिव (प्रतीक्षारत) पद पर पदस्थ किया गया।

कलेक्टर कार्रवाई पर राजनीति 

कलेक्टर रणबीर शर्मा पर हुई कार्रवाई के बाद भी राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा भी जमकर होने लगी है। पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जड़ते नजर आ रहे हैं। सत्ताधारी दल यानी कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार की कार्यवाही को सही ठहराते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना की। सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कलेक्टर पर हुई कार्यवाही से इस साफ जाहिर हो गया है कि प्रदेश में जवाबदेही का निर्वहन पूरे संवेदनशीलता के साथ होना जरूरी है। यदि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही देखी गई तो इस तरह की कार्यवाही भी निश्चित है। उन्होंने कहा की जन सामान्य से अशिष्टता और अभद्रता भूपेश सरकार में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री के इस कार्यवाही से साफ जाहिर होता है संवेदनशीलता प्रशासन के मूल में होना जरूरी है। बिना संवेदनशीलता के कोई भी प्रशासन जन उन्मुख नहीं हो सकता है।

भाजपा कहती है 

भारतीय जनता पार्टी ने इसे कांग्रेस के सरकार का अमानवीय कृत्य करार दिया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने प्रदेश की सत्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भूपेश सरकार कोरोना के समय पूरी स्वतंत्रता के साथ कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंप दी है और यही नतीजा है कि आज कलेक्टर की अमानवीय कृत्य सामने दिखाई दे रही है। संजय श्रीवास्तव ने कहा कि एक युवक अपने परिवार के लिए दवाई लेने जाता है और उसे सरेराह पिटा जाता है। इससे साफ लगता है कि सरकारी तंत्र आम जनता पर हावी है। इससे सरकार की कार्यवाही साफ नजर आती है। भाजपा ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जवाब मांगा है कि क्या कोरोना संकटकाल में इस तरह का बर्ताव क्या उचित है। उन्होंने यह भी कहा कि कलेक्टर सहित पूरे जिला प्रशासन को उस युवक के परिवार से माफी मांगना चाहिए।

शर्मा का विवादों से नाता 

कलेक्टर रणबीर सिंह पर ये दूसरी बार कार्रवाई हुई है। रमन शासन काल में अगस्त 2015 में एक पटवारी के शिकायत पर ACB ने रणबीर शर्मा को वसूली के लिए दबाब बनाने का एक आडियो हाथ लगने के बाद 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था| इसके बाद शर्मा को कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर एसडीएम पद से हटाकर मंत्रालय अटैच किया गया था। दूसरा विवाद शर्मा के नाम तब जुड़ा जब वे मरवाही-गाैरेला में पदस्थ थे। उन्होंने एक जंगली भालू को गोली मारने का आदेश दिया था। इन मामलों की जांच पड़ताल और कार्यवाहियों के बीच ही रणबीर शर्मा सूरजपुर कलेक्टर बना दिए गए।

सरगुजा संभाग के ये अकड़बाज अधिकारी  

सूरजपुर जिला कलेक्टर के थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल होने के बाद अब सूरजपुर के ही एक एसडीएम प्रकाश सिंह राजपूत का इसी प्रकार का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमे SDM राजपूत एक युवक को सड़क पर थप्पड़ मरते दिखाई दे रहे हैं। ये वाक्या भी लॉकडाउन के दौरान मुआयना का ही है। लॉकडाउन का पालन करवाने प्रशासनिक अधिकारी खुद सड़क उतरे हैं। ये सही बात भी है लेकिन अधिकारीयों को अमानवीय कृत्य करने की छूट तो नहीं है।

एसडीएम ने युवक से निकलने का कारण भी नहीं पूछा और उसको थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही नहीं थप्पड़ मारने के बाद उससे उठक-बैठक भी करवाई गई।  इस दौरान युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता भी नजर आया। अब क्या ये वीडियो वायरल होने के बाद SDM प्रकाश सिंह राजपूत पर भी शासन की गाज गिरेगी।

बात यही नहीं रुकी सरगुजा संभाग के जशपुर जिले के बगीचा में भी SDM ज्योति बबली कुजूर पर मटन, चिकन मंगाने और खुलेआम पैसों की डिमांड करने का मामला कलेक्टर के सामने आया था। SDM  ज्योति बबली पर तो ये भी आरोप था कि वो ना सिर्फ खुलेआम पैसों की डिमांड करती है, बल्कि कर्मचारियों से बदतमीजियां व थप्पड़ मार देने की धमकियां तक देती है। ज्योति बबली कुजूर के खिलाफ उनके अधीनस्थ तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों ने एक साथ कलेक्टर को तीन पन्नों में शिकायत किया था। शिकायत पर कार्रवाई हुई और SDM ज्योति बबली कुजूर को बगीचा से हटाकर जशपुर बुला लिया गया।  वहीँ उनके स्थान पर एसडीएम आकांक्षा तिवारी को बगीचा में पदस्थ किया गया है।

बहरहाल कोरोना ने जहां लोगों को तोड़कर रख दिया है, वहीँ इस तरह के प्रशसनिक अधिकारीयों ने भी शासन के दामन पर कीचड़ उछालना नहीं छोड़ा। लॉकडाउन में अनावश्यक घर से निकलने पर सजा देना भी जरुरी है क्यूंकि लोग भी बेपरवाह हो गए हैं और इन्ही लापरवाही के कारण ही दूसरे लहर में कोरोना का तांडव सभी ने देखा। लेकिन वास्तविकता को कतई नकारना नहीं चाहिए अन्यथा शासन का गाज इस तरह के अधिकारीयों पर तो गिरेगा।